घेराबंदी: चीन के खिलाफ साझा मोर्चा बना रहे हैं जापान और वियतनाम, इस 'गेमचेंजर' समझौते पर किए दस्तखत
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि ये समझौता हाल में दोनों देशों की सेनाओं में गहराते गए संबंधों का परिणाम है। मार्च 2020 में जापान ने अपने रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की वियतनाम के अधिकारियों के साथ के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी। उसके बाद वियतनाम ने जापान के लड़ाकू जहाजों और विमानों के अपने यहां आने की इजाजत दे दी...
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जिस समय दुनिया का ध्यान ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, और अमेरिका के बीच परमाणु पनडुब्बी निर्माण के लिए हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर टिका रहा है, तभी जापान और वियतनाम के रक्षा मंत्रियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है। कई विशेषज्ञों ने इसे मुलाकात को ‘गेम चेंजर’ (तस्वीर बदल देने वाली बैठक) कहा है। जापान के रक्षा मंत्री नोबुओ किशी और वियतनाम के रक्षा मंत्री फान वान गियांग के बीच ये बैठक वियतनाम के हनोई में हुई।
रक्षा मंत्रियों की बैठक हनोई बैठक के बाद दोनों देशों के सेना प्रमुखों ने एक “अभूतपूर्व” समझौते पर दस्तखत किए। इसमें प्रावधान है कि दोनों देश एक दूसरे को सैनिक उपकरण बेच सकेंगे। उनकी सेनाएं आपस में टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान कर सकेंगी। साथ ही इस समझौते में दोनों देशों की सेनाओं के साझा अभ्यास और साइबर क्षेत्र में सहयोग के प्रावधान हैं। समझौते के तहत अब दोनों देशों के आपसी संबंधों को एक नया और अधिक ऊंचा स्तर दे दिया गया है। जानकारों का कहना है कि इस समझौते के बाद अब संभव है कि वियतनाम जापान के नौसैनिक वाहन हासिल करने में सक्षम हो जाए।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि ये समझौता हाल में दोनों देशों की सेनाओं में गहराते गए संबंधों का परिणाम है। मार्च 2020 में जापान ने अपने रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की वियतनाम के अधिकारियों के साथ के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी। उसके बाद वियतनाम ने जापान के लड़ाकू जहाजों और विमानों के अपने यहां आने की इजाजत दे दी।
यह भी ध्यान दिलाया गया है कि जापान के रक्षा मंत्री किशी की ताजा वियतनाम यात्रा अगस्त में अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की हुई वियतनाम यात्रा के बाद हुई है। हैरिस ने वियतनाम से कहा था कि वह दक्षिण चीन सागर में चीन के जोर-जबर्दस्ती वाले व्यवहार का मुकाबला करने में अमेरिका का साथ दे। गौरतलब है कि जापान इस क्षेत्र में अमेरिकी खेमे का एक महत्त्वपूर्ण देश है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स के मुताबिक हैरिस की यात्रा के समय वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह ने वियतनाम स्थित चीनी राजदूत शियोंग बो को आश्वासन दिया था कि वियतनाम चीन के खिलाफ मोर्चेबंदी में शामिल नहीं होगा। लेकिन इस वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण के मुताबिक अब वियतनाम ने अमेरिकी खेमे के एक अहम देश के साथ जो रक्षा समझौता किया है, उसे अवश्य ही चीन के खिलाफ समझा जाएगा।
इस विश्लेषण में ध्यान दिलाया गया है कि इस समझौते की घोषणा उसी समय हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने क्वैड्रैंगुलर सिक्युरिटी डायलॉग (क्वैड) के सदस्य देशों की शिखर बैठक आयोजित करने का फैसला किया। ये बैठक शुक्रवार को होगी, जिसमें अमेरिका के अलावा भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेता भाग लेंगे। इन तमाम देशों के चीन के साथ संबंध तनावपूर्ण हैँ।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक जापान और वियतनाम के बीच पहले से मजबूत आर्थिक संबंध हैं। अब ताजा समझौते के साथ इसमें रक्षा संबंध का पहलू जुड़ा है। जानकारों का कहना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जापान अब सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वियतनाम जैसे ही समझौते उसने फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने भी किए हैं। इन सभी को चीन की घेराबंदी का हिस्सा समझा गया है।