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एलएसी पर तनाव कम करने के लिए भारत-चीन के बीच पांच बिंदुओं पर बनी सहमति

Sat, 12 Sep 2020 05:02 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, मॉस्को Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 12 Sep 2020 05:02 AM IST
सार

  • मॉस्को में विदेशमंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेशमंत्री वांग यी के बीच एलएसी पर तनाव घटाने के लिए पांच बिंदुओं पर बनी सहमति
  • भारतीय पक्ष ने कहा, आमने-सामने वाली जगहों पर पीएलए की उकसाने वाली कार्रवाई द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन

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jaishankar wang yi met in moscow agreed on five point plan for resolving border face off in Ladakh
एस जयशंकर- वांग यी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनावपूर्ण हालात के बीच भारत और चीन सीमा पर शांति और सद्भाव की बहाली के लिए कदम उठाने पर राजी हो गए हैं। रूस की राजधानी मॉस्को में विदेशमंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेशमंत्री वांग यी के बीच करीब ढाई घंटे चली मुलाकात में सीमा पर तनाव घटाने के लिए बातचीत जारी रखने, सैनिकों को पीछे हटाने और मतभेदों को विवाद में न बदलने समेत पांच बिंदुओं पर सहमति बनी। वहीं, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एलएसी पर मौजूदा हालात की समीक्षा, रक्षा तैयारियों और भावी रणनीति पर चर्चा के लिए दिल्ली में रक्षामंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल हुए। 

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सरकार के सूत्रों ने बताया कि मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन के विदेशमंत्रियों की बैठक से इतर हुई जयशंकर और वांग की मुलाकात में भारतीय पक्ष ने सीमा पर बड़ी संख्या में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) पर तैनाती और साजोसामान का जमावड़ा करने पर कड़ी आपत्ति जताई। हालांकि, चीनी पक्ष इस बारे में अपनी सफाई नहीं दे पाया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने चीनी पक्ष को साफ तौर पर कहा कि सीमा पर पीएलए सैनिकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी 1993 और 1996 सीमा समझौतों के मुताबिक नहीं है। एलएसी पर आमने-सामने वाली जगहों पर पीएलए की उकसाने वाली कार्रवाई द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन है।
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भारत ने चीन से कहा है कि सीमा पर यथास्थिति में एकतरफा बदलाव की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, जयशंकर ने वांग से कहा, रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और सद्भाव कायम होना जरूरी है। उन्होंने वांग से यह भी कहा कि पूर्वी लद्दाख में हाल में हुई घटनाओं का असर द्विपक्षीय संबंधाें के विकास पर पड़ता है। ऐसे में मौजूदा गतिरोध को हल करने के लिए तत्काल समाधान की जरूरत है, यह दोनों देशों के हित में भी है। दोनों देशों के विदेश मंत्रालय ने मुलाकात के बाद बातचीत का ब्योरा दिया।
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चीन ने कहा, दोनों देशों में भरोसा हो, संदेह नहीं हो
वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी करते हुए विदेशमंत्री वांग यी के हवाले से कहा, दो बड़े और पड़ोसी देश होने के नाते मतभेद होना सामान्य बात है। महत्वपूर्ण यह है कि इन मतभेदों को उचित तरीके से रखा जाना चाहिए और नेताओं का मार्गदर्शन लेना चाहिए। वांग ने इस बात पर बल दिया कि दोनों देशों में सहयोग की जरूरत है, न कि विवाद की। आपसी भरोसे की आवश्यकता है न कि संदेह की। हालात मुश्किल हों, तो आपसी भरोसे और आपसी संबंधों के स्थायित्व को अहम रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। गोलीबारी जैसी अन्य उकसाने वाली हरकत फौरन बंद हों। दोनों देशों के सीमा पर तैनात सैनिकों में संवाद कायम हो।

इन पांच बिंदुओं पर सहमति, जो तय करेंगे भावी रिश्तों की दिशा

 

  • दोनों विदेश मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि मौजूदा स्थिति किसी के हित में नहीं है, इसीलिए वे इस बात पर राजी हुए कि सीमा पर तैनात दोनों देशों की सेनाओं को संवाद जारी रखना चाहिए, उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए और तनाव को कम करना चाहिए।
  • संयुक्त बयान के अनुसार, जयशंकर और वांग ने सहमति जताई कि दोनों पक्षों को भारत-चीन संबंधों को विकसित करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी आम सहमति से मार्गदर्शन लेना चाहिए, जिसमें मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना शामिल है।
  • दोनों मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि सीमा के प्रबंधन से जुड़े सभी मौजूदा समझौतों और नियमों का पालन करना चाहिए, शांति और सौहार्द बनाए रखना चाहिए और किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचना है, जो तनाव बढ़ा सकती है।
  • जयशंकर और वांग वार्ता में इस बात पर सहमत हुए कि जैसे ही सीमा पर स्थिति बेहतर होगी, दोनों पक्षों को सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाने के लिए नए विश्वास को स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए।
  • संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा मामले पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) तंत्र के माध्यम से संवाद और संचार जारी रखने के लिए सहमति व्यक्त की है। उन्होंने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि इसकी बैठकों में भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र जारी रहना चाहिए।


 

यह भी पढ़ें- चीन को रोकने के लिए हिंद महासागर में सहयोग बढ़ाएंगे भारत और फ्रांस

चीन ने दो बार की घुसपैठ की कोशिश
भारत और चीन के बीच सीमा पर मई की शुरुआत से गतिरोध जारी है। हाल ही में 29-30 अगस्त की रात चीन ने घुसपैठ की कोशिश की। इसके कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और ज्यादा बढ़ गया। चीन की सेना ने पेंगोंग झील के दक्षिणी छोर की पहाड़ी पर कब्जा करने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय जवानों ने नाकाम कर दिया। चार दिन बाद चीन के फिर घुसपैठ की कोशिश की और इस बार भी भारतीय जवानों ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

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