टोक्यो ओलंपिक में रिकॉर्ड सफलता से इटली में छिड़ गई है नागरिकता कानून पर बहस
इटली की ओलंपिक समिति के अध्यक्ष गियोवानी मालागो ने अपील की है कि प्रोफेशनल खिलाड़ियों को नागरिकता देने के मामले में अब देश में ज्यादा उदारता बरतनी चाहिए। इटली के नागरिकता के कानून के मुताबिक विदेश में जन्मे लोगों के लिए यहां की नागरिकता हासिल करना एक जटिल प्रक्रिया है...
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ओलंपिक खेलों में इस बार इटली ने रिकॉर्ड संख्या में पदक जीते। उसके बाद से देश में नागरिकता अधिकारों को लेकर बहस खड़ी हो गई है। इटली ने इस बार कुल 40 पदक जीते। इटली का जो दल टोक्यो गया था, उसमें अलग-अलग नस्लीय मूल के खिलाड़ी थे। दल में 15 फीसदी ऐसे खिलाड़ी थे, जिनका या फिर उनके माता-पिता का जन्म किसी दूसरे देश में हुआ। इटली की एथलेटिक्स टीम में तो ऐसे खिलाड़ियों की संख्या 40 फीसदी थी।
नस्लीय रूप से विभिन्नता वाली टीम ने इटली के लिए अभूतपूर्व गौरव हासिल किया। उससे ये चर्चा जोर पकड़ गई है कि देश में नागरिकता देने की नीति आखिर क्या होनी चाहिए। इटली की ओलंपिक समिति के अध्यक्ष गियोवानी मालागो ने अपील की है कि प्रोफेशनल खिलाड़ियों को नागरिकता देने के मामले में अब देश में ज्यादा उदारता बरतनी चाहिए। इटली के नागरिकता के कानून के मुताबिक विदेश में जन्मे लोगों के लिए यहां की नागरिकता हासिल करना एक जटिल प्रक्रिया है।
ज्यादातर यूरोपीय देशों की तरह इटली में भी नागरिकता किसी व्यक्ति के माता-पिता की राष्ट्रीयता के आधार पर दी जाती है। जबकि कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में अगर बच्चे का जन्म वहां हुआ हो, तो उसी आधार पर उसे नागरिकता मिल जाती है। इटली में लागू नियम के मुताबिक अगर किसी आव्रजक दंपति के बच्चे का जन्म यहां होता है, तो उसे सिर्फ जन्म के आधार पर नागरिकता नहीं मिलती है। 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग इटली की नागरिकता के लिए अर्जी दे सकते हैं, लेकिन उससे संबंधित प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम तीन साल लग जाते हैं।
मालागो ने कहा है कि तीन साल तक इंतजार करना किसी प्रोफेशनल खिलाड़ी के लिए बहुत मुश्किल होता है। लेकिन इस समय यूरोप में आव्रजन विरोधी माहौल है। ऐसे समय में खिलाड़ियों को ध्यान में रख कर नागरिकता कानून में संशोधन का दक्षिणपंथी गुटों की तरफ से प्रबल विरोध होने की संभावना है। इसे देखते हुए देश के गृह मंत्री लुसियाना लामोरगीसी ने इस मामले में राजनीतिक आम सहमति बनाने पर जोर दिया है।
लेकिन वामपंथी नेताओं ने कहा है कि नागरिकता कानून को सिर्फ खिलाड़ियों के लिए उदार नहीं बनाया जाना चाहिए। वामपंथी झुकाव वाली डेमोक्रेटिक पार्टी ने कहा है कि वह इस मामले में संसद में बहस का नोटिस देगी। उन्होंने कहा- ‘ओलंपिक खेलों ने वही बात साबित की है, जो हम काफी समय से कहते रहे हैं। नागरिकता एक अधिकार है, कोई ऐसी चीज नहीं, जिसे कमा कर हासिल करना पड़े।’ उन्होंने कहा- अधिकार सबके लिए होते हैं, सिर्फ किन्ही खास श्रेणी के लोगों के लिए नहीं। इसलिए नियम सबके लिए समान होने चाहिए, चाहे वो ओलंपिक खिलाड़ी हों, या डॉक्टर या कारखाने का मजदूर।
लेकिन धुर दक्षिणपंथी लीग पार्टी ने कहा है कि अगर नागरिकता की शर्तों को उदार बनाने के लिए कोई बिल संसद में आया, तो वह उसे पारित नहीं होने देगी। पार्टी की नेता निकोला मोल्तेनी ने कहा- नागरिकता एक हैसियत है, अधिकार नहीं। इसलिए लीग पार्टी ये सुनिश्चित करेगी कि देश में नागरिकता का नियम न बदला जाए।