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इटली: एक बिशप ने कहा- सांता क्लाज कोई नहीं है, तो मच गया हंगामा

Mon, 13 Dec 2021 06:56 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 13 Dec 2021 06:56 PM IST
सार

इटली के सिसली प्रांत में स्थित नोटो में एक बिशप ने एक कला उत्सव के दौरान बच्चों से कह दिया कि सांता क्लाज असल में कोई नहीं है। उन्होंने कहा- ‘सांता क्लाज का अस्तित्व नहीं है। मैं तुम लोगों को बताना चाहता हूं कि जिस लाल परिधान में सांता क्लाज के आने की बात मानी जाती है, वह परिधान कोका कोला ने चुना था...

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Italy bishop told children, Santa Claus does not exist. red dress in which Santa Claus is believed to come was chosen by Coca-Cola
सांता क्लाज - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

क्रिसमस करीब आते ही पश्चिमी देशों में सांता क्लाज की चर्चा शुरू हो जाती है। मान्यता है कि सांता क्लाज क्रिसमस से ठीक पहले गुपचुप रात में आकर बच्चों को तोहफा दे जाते हैं। लोग मानते हैं कि सांता क्लाज पवित्र हृदय के बच्चों को इनाम देने के मकसद से आते हैं। बहुत से लोग सांता क्लाज को फादर क्रिसमस भी कहते हैं।

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लेकिन इटली में इस बार एक चर्च के बिशप ने इस बारे में एक ऐसी बात बोल दी, जिससे बवाल खड़ा हो गया है। आखिरकार बिशप को इसके लिए माफी मांगनी पड़ी। ईसाई धर्म में बिशप एक बड़ा पद होता है।

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लिया कोका-कोला का नाम

इटली के सिसली प्रांत में स्थित नोटो में एक बिशप ने एक कला उत्सव के दौरान बच्चों से कह दिया कि सांता क्लाज असल में कोई नहीं है। उन्होंने कहा- ‘सांता क्लाज का अस्तित्व नहीं है। मैं तुम लोगों को बताना चाहता हूं कि जिस लाल परिधान में सांता क्लाज के आने की बात मानी जाती है, वह परिधान कोका कोला ने चुना था। इसका चुनाव कंपनी ने सिर्फ अपने इश्तहार के मकसद से किया था।’

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बिशप के इस बयान को लेकर सिसली के मीडिया में सुर्खियां बन गईं। पूरे प्रांत और देश भर में इसकी चर्चा हुई। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बिशप ने जिस उत्सव में ये बात कही, उसका आयोजन सेंट निकोलस फीस्ट डे पर किया गया था। ईसाई मान्यता में सेंट निकोलस ही वो शख्स हैं, जिनसे सांता क्लाज का किरदार प्रेरित है।  

जब बिशप स्टेगलियानों की ये टिप्पणी वायरल हो गई और उसकी आलोचना होने लगी, तब उनके प्रेस सेक्रेटरी ने एक फेसबुक पोस्ट लिख कर माफी मांगी। प्रेस सेक्रेटरी फादर अलेसांद्रो पाओलिनी ने लिखा- ‘सबसे पहले मैं बिशप की तरफ से माफी मांगता हूं, जिनके बयान से बच्चों को निराशा हुई। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि स्टेगलियानों का बच्चों को मायूस करने का बिल्कुल ही इरादा नहीं था।’

परंपराएं बन रही हैं कारोबारी

पाओलिनी ने कहा कि बिशप का मकसद क्रिसमस और उसकी खूबसूरत परंपराओं पर एक नजर डालना था। ये परंपराएं अपने साथ एक किस्म की जागरूकता ले लाती हैं। बिशप का मकसद यह बताना था कि क्रिसमस की खूबसूरत परंपराओं को अब कारोबारी रूप दिया जा रहा है और उन्हें ईसाई धर्म की मूलभूत मान्यताओं से अलग किया जा रहा है।

पाओलिनी ने कहा- ‘अगर हम सांता क्लाज से कोई सबक ले सकते है, तो वो यह है कि उपयोग के लिए कम से कम उपहार दिए जाएं, जबकि दूसरों से साझा करने के लिए अधिक तोहफे दिए जाएं।’



स्टेगलियानो ने भी इटली के अखबार ला रिपब्लिका को दिए एक इंटरव्यू में सफाई दी। उन्होंने कहा- मेरा यह बिल्कुल मतलब नहीं था कि सांता क्लाज का अस्तित्व नहीं है। मैं सिर्फ सांता का जो असली रूप है और जो असली रूप नहीं है, उसके बीच फर्क बताना चाहता था। उन्होंने कहा- उपभोक्ता संस्कृति ने क्रिसमस त्योहार के सच्चे अर्थ को धुंधला कर दिया है। इस त्योहार का असली मतलब है दूसरों के साथ अपनी चीजें साझा करना।

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