दुबई के अस्पताल में भर्ती परवेज मुशर्रफ को पाकिस्तान लाना होगा बड़ी चुनौती
- सरकार ने कहा, पाकिस्तान लाने के लिए करेंगे कानूनी विकल्पों का विश्लेषण
- मार्च 2016 में सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से गए थे, बाद में भगोड़ा घोषित हुए
- आभास था कि सजा होगी, इसलिए हाईकोर्ट में पहले से दायर की थी याचिका
- वीडियो जारी कर कहा, देशद्रोह का केस बेबुनियाद, मैंने मुल्क की खिदमत की
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विस्तार
पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ को पाकिस्तान की विशेष अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाने के बाद पाक सरकार ने कहा है कि उन्हें वापस लाने के कानूनी रास्तों पर सरकार विचार करेगी। हालांकि उन्हें पाकिस्तान लाना ही मौजूदा सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। वे मार्च 2016 को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद दुबई चले गए थे, इस बीच विशेष कोर्ट ने उन्हें भगौड़ा तक करार दे दिया था।
भारत के खिलाफ आतंकियों के शिविरों को बढ़ावा देने का गुनाह स्वीकार कर चुके मुशर्रफ फिलहाल दुबई में अपना इलाज करवा रहे हैं। सुनवाई के समय कई दफा तलब किए जाने के बावजूद वे विशेष कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए हैं। दूसरी ओर पीएम इमरान खान की सूचना और प्रसारण पर विशेष सहायक फिरदौस आशिक अवान ने कहा कि सरकार अदालत के फैसले से राष्ट्रहित व सियासी असर पर विस्तार से समीक्षा करेगी।
इस्लामाबाद में अवान ने पत्रकारों से कहा कि सरकार ने कानून विशेषज्ञों से चर्चा की है। इसमें फैसले के कानूनी व सियासी पहलु और राष्ट्रहित पर प्रभाव का विश्लेषण हुआ। मुशर्रफ को पाकिस्तान वापस लाने के सवाल पर अवान ने कहा कि इस प्रकिया पर भी कानूनी टीम के साथ सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बुधवार को विदेश यात्रा से लौटकर जमीनी हकीकत और कानूनी प्रावधानों को देखेंगे और इसके बाद कोई फैसला लिया जाएगा।
दूसरी ओर फैसला आने के फौरन बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने ट्वीट किया, ‘लोकतंत्र सबसे अच्छा बदला है।’
दुबई से ही वीडियो भेज कह चुके, ‘नहीं आऊंगा’
पाक हाईकोर्ट व विशेष अदालत ने मुशर्रफ को कई बार तलब किया। वे हर बार बीमारी का बहाना बनाकर देश लौटने से इनकार करते रहे। हाल में उन्हाेंने अस्पताल से एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें बिस्तर पर लेटे-लेटे कहा, ‘देशद्रोह का केस बेबुनियाद है। गद्दारी छोड़िए, मैंने तो इस मुल्क की कई बार खिदमत की है। कई बार जंग लड़ी। 10 साल तक सेवा की। आज मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मेरे खिलाफ जांच के लिए कमीशन बनाया गया। बेशक बनाइए। लेकिन, कमीशन यहां आकर मेरी तबियत देखें और बयान दर्ज करें। इसके बाद कोई कार्रवाई करे।’
सजा से बचने को हाईकोर्ट में पहले से याचिका
दुबई के अस्पताल में भर्ती परवेज मुशर्रफ को पहले से ऐसी सजा के आभास के चलते उन्होंने पिछले हफ्ते अपने वकीलों के जरिए लाहौर हाईकोर्ट में अपील दर्ज कराई। इसमें उन्होंने हाईकोर्ट से विशेष अदालत में चल रही सुनवाई को रुकवाने की मांग की। मुशर्रफ का कहना था कि उन्होंने हाईकोर्ट में पहले ही विशेष अदालत के गठन के खिलाफ याचिका दी है, जिसमें मुकदमे की मंशा पर सवाल उठाया है।
पाक इतिहास में सजा-ए-मौत पाने वाले पहले सैन्य शासक
पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को पेशावर की विशेष अदालत ने मंगलवार को देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा सुनाई। भारत के साथ 1999 के कारगिल युद्ध की योजना बनाने वाले मुशर्रफ पाकिस्तान के इतिहास में मौत की सजा पाने वाले पहले सैन्य शासक और दूसरे शीर्ष अधिकारी हैं। उनसे पहले जुल्फिकार अली भुट्टो को 1977 में प्रधानमंत्री पद से हटाकर फांसी पर चढ़ा दिया गया था।
मुशर्रफ पर 2007 में निर्वाचित सरकार का तख्तापलट करने के बाद आपातकाल घोषित करने के लिए देशद्रोह का आरोप था। इस आरोप की सुनवाई पेशावर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही थी। मंगलवार को पीठ ने इसे अपराध मानते हुए मुशर्रफ के खिलाफ 2-1 के मत से फैसला सुनाया। मुशर्रफ के खिलाफ 2014 में यह मामला शुरू हुआ था।
इसके बाद मुशर्रफ मार्च 2016 में इलाज कराने के नाम पर दुबई चले गए और फिर सुरक्षा, स्वास्थ्य का हवाला देते हुए वह कभी वापस नहीं लौटे। जस्टिस सेठ, जस्टिस नजर अकबर और जस्टिस शाहिद करीम की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला 19 नवंबर को सुरक्षित रखा था। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 27 नवंबर को इस फैसले को सुनाने पर रोक लगाते हुए सरकार को 5 दिसंबर तक नई अभियोजन टीम बनाने का भी निर्देश दिया था।
सरकार द्वारा गठित नई टीम पांच दिसंबर को विशेष अदालत के समक्ष पेश हुई, इसके बाद विशेष अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 17 दिसंबर की तारीख तय की थी।
मुशर्रफ का उद्भव और सफर
- अक्तूबर 1999 में तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ के विरुद्ध सैन्य विद्रोह कर सत्ता हाथ में ली।
- जून 2001 में सैन्य प्रमुख रहते हुए खुद को पाकिस्तान का राष्ट्रपति घोषित किया।
- अप्रैल 2002 में विवादित जनमत संग्रह कराकर पांच साल के लिए फिर राष्ट्रपति बने
- अक्तूबर 2007 में दोबारा राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
- अगस्त 2008 में मुख्य सत्ताधारी पार्टियों के दबाव के बाद राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया।
सुनवाई के समय जज ने कहा था कि सरकार का इरादा नहीं सजा दिलवाने का
सरकार की ओर से नई अभियोजन टीम 5 दिसंबर को विशेष अदालत में पेश हुई जिसके बाद विशेष अदालत ने 17 दिसंबर को फैसले की तारीख तय की। सुनवाई शुरू होते ही सरकारी वकीलों ने नई याचिकाएं पेश कीं। एक याचिका में पूर्व पीएम शौकत अजीज, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोगर और पूर्व कानून मंत्री जाहिद हामिद को संदिग्ध बनाने को कहा गया। इस पर जस्टिस करीम ने कहा था कि सरकार के पास सही इरादे नहीं हैं। मुशर्रफ के वकील रजा बशीर ने कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति को बचाव का अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि वे बुरी सेहत के कारण अदालत में पेश नहीं हो सकते हैं।
शरीफ सरकार ने चलाया मुकदमा
देशद्रोह का यह मुकदमा तीन नवंबर 2007 को आपातकाल लगाने पर दर्ज हुआ था। नवाज शरीफ के 2013 में सत्ता में लौटने पर दिसंबर में मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला फिर से शुरू किया गया। 31 मार्च 2014 को मुशर्रफ आरोपी करार दिए गए और उसी साल सितंबर में अभियोजन ने सारे साक्ष्य विशेष अदालत के सामने रखे। इसके खिलाफ दायर अपीलों के कारण मुकदमे में देरी हुई। सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी के बाद मुशर्रफ मार्च 2016 में पाकिस्तान से बाहर चले गए थे।