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Israel: गाजा से फलस्तीनियों के विस्थापन पर इस्राइली नेताओं का समर्थन, विस्थापन पर दुनिया ने जताई आपत्ति

Sat, 16 Aug 2025 04:02 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sat, 16 Aug 2025 04:02 PM IST
सार

गाजा युद्ध के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अन्य नेताओं ने फलस्तीनियों के बड़े पैमाने पर विस्थापन की योजना का समर्थन किया है। इसे वे मानवीय कदम बता रहे हैं, जबकि फलस्तीनी और अंतरराष्ट्रीय संगठन इसे जबरन निर्वासन और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानते हैं। इस्राइल अफ्रीकी देशों से भी बातचीत कर रहा है।

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Israeli leader benjamin netanyahu support mass relocation of Palestinians from Gaza Donald Trump announce this
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजमिन नेतन्याहू - फोटो : ANI

विस्तार

गाजा पट्टी में जारी युद्ध के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अन्य नेताओं ने गाजा से फलस्तीनियों के बड़े पैमाने पर विस्थापन के विचार को खुलकर समर्थन दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से फरवरी में पहली बार सामने आई इस योजना को इस्राइल मानवीय पहल के रूप में पेश कर रहा है, जबकि फलस्तीनी और अंतरराष्ट्रीय संगठन इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं।
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प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कई मौकों पर कहा है कि युद्ध समाप्त करने की शर्तों में से एक यह होगी कि गाजा के लोग चाहें तो देश छोड़ सकें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “ट्रंप योजना” सही और क्रांतिकारी है। इसी तरह इस्राइली रक्षा मंत्री कैट्ज ने भी सेना को योजना तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें जमीनी रास्तों, समुद्र और हवाई मार्ग से गाजा छोड़ने के विकल्प शामिल हैं।
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फलस्तीनियों की प्रतिक्रिया
फलस्तीनी नागरिकों और उनके नेताओं का कहना है कि यह ‘स्वेच्छा से पलायन’ नहीं बल्कि मजबूरी में की जा रही निर्वासन की कोशिश है। गाजा के नागरिक इस बात पर अड़े हैं कि वे अपनी जमीन छोड़कर कहीं और नहीं जाएंगे। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक एक गाजा निवासी इस्माइल जायदाह ने कहा कि यह हमारी जमीन है, हम यहीं पैदा हुए और यहीं मरेंगे। हमें कहीं और जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज
मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि इस्राइल का यह कदम जबरन विस्थापन के बराबर होगा और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करेगा। इस्राइल का तर्क है कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था होगी ताकि नागरिक युद्ध और विनाश से बच सकें। वहीं, संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने चेतावनी दी है कि गाजा को रहने योग्य न छोड़ना, फलस्तीनियों की पहचान और अधिकारों पर स्थायी हमला है।

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अफ्रीकी देशों से भी बातचीत
इस्राइल अब अफ्रीकी देशों से भी बातचीत कर रहा है ताकि वे फलस्तीनियों को शरण देने पर सहमत हों। हालांकि, इन देशों में खुद युद्ध और अकाल की स्थिति बनी हुई है। जैसे-जैसे गाजा में लड़ाई आगे बढ़ रही है और अधिक इलाकों को तबाह किया जा रहा है, यह मुद्दा और भी गंभीर होता जा रहा है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण है और आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ने की संभावना है।

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