{"_id":"62a9f92bd12fff22db5a901b","slug":"israel-scientists-discovers-treatment-vaccine-for-hiv-aids","type":"story","status":"publish","title_hn":"HIV AIDS: एचआईवी एड्स की बीमारी से जल्दी मिलेगी निजात, इस्राइल के वैज्ञानिकों ने हासिल की अहम सफलता ","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
HIV AIDS: एचआईवी एड्स की बीमारी से जल्दी मिलेगी निजात, इस्राइल के वैज्ञानिकों ने हासिल की अहम सफलता
Wed, 15 Jun 2022 08:52 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 15 Jun 2022 08:52 PM IST
सार
वैज्ञानिकों को ऐसी वैक्सीन बनाने में सफलता मिली है, जिसकी एक ही खुराक एचआईवी वायरस को मार सकती है। इस्राइल के तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को अहम सफलता मिली है।
विज्ञापन
एचआईवी एड्स
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एचआईवी एड्स जैसी लाइलाज बीमारी का इलाज खोजने की कोशिशें लगातार जारी है। इसी कड़ी में तेल अवीव विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अहम सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने शरीर में मौजूद टाइप-बी वाइट ब्लड सेल्स के जीन में कुछ बदलाव किए, जिससे एचआईवी वायरस मर गया। कुछ दिन पहले रेक्टल कैंसर मरीजों को ठीक करने में सफलता मिली थी।
एचआईवी-एड्स से मिलेगी निजात
कैंसर के बाद वैज्ञानिकों ने शायद एचआईवी-एड्स जैसी लाइलाज बीमारी से निजात पाने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है। वैज्ञानिकों को ऐसी वैक्सीन बनाने में सफलता मिली है, जिसकी एक ही खुराक एचआईवी वायरस को मार सकती है। इस्राइल के तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए इस टीके के लैब परिणाम बहुत सकारात्मक रहे हैं। वैज्ञानिकों ने शरीर में मौजूद टाइप-बी वाइट ब्लड सेल्स के जीन में कुछ बदलाव किए, जिससे एचआईवी वायरस टूट गया। इस सफलता ने उम्मीद जगाई है कि एचआईवी-एड्स जैसी बीमारी का इलाज भी दूर नहीं है।
एचआईवी-एड्स का कोई इलाज नहीं
एचआईवी-एड्स का अभी तक कोई इलाज नहीं है। हालांकि दवाओं से इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है और एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक जीवित रह सकता है। यह बीमारी एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस से फैलती है। यह वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करता है। इसका इलाज नहीं होने पर एड्स हो सकता है।
विज्ञापन
टाइप-बी व्हाइट ब्लड सेल्स का इस्तेमाल किया
इस लाइलाज बीमारी का तोड़ निकालने के लिए डॉ. आदि बार्गेल के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने टाइप-बी व्हाइट ब्लड सेल्स का इस्तेमाल किया। ये कोशिकाएं हमारे शरीर में वायरस और खतरनाक बैक्टीरिया से लड़ने के लिए एंटीबॉडी पैदा करती हैं। ये व्हाइट ब्लड सेल्स अस्थि मज्जा में बनती हैं। परिपक्व होने पर रक्त के माध्यम से शरीर के अंगों तक पहुंचते हैं। वैज्ञानिकों ने इन बी कोशिकाओं के जीन को संशोधित करके एचआईवी वायरस के कुछ हिस्सों से संपर्क किया। इससे उनमें कुछ बदलाव आया। उसके बाद इन तैयार बी कोशिकाओं का एचआईवी वायरस से मुकाबला किया गया, तो वायरस टूटता हुआ दिखाई दिया।
डॉ. बरजेल ने कहा कि लैब में जिन मॉडलों पर इस उपचार का परीक्षण किया गया, उन्होंने बहुत अच्छे परिणाम दिखाए। उनके शरीर में एंटीबॉडी की संख्या भी काफी बढ़ गई और एचआईवी वायरस को खत्म करने में सफल रहे। यह शोध नेचर मैगजीन में प्रकाशित हुआ है। मेडिकल जर्नल ने अपने निष्कर्ष में इन एंटीबॉडी को सुरक्षित, शक्तिशाली और काम करने योग्य बताया है।
विज्ञापन
एचआईवी-एड्स से मिलेगी निजात
कैंसर के बाद वैज्ञानिकों ने शायद एचआईवी-एड्स जैसी लाइलाज बीमारी से निजात पाने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है। वैज्ञानिकों को ऐसी वैक्सीन बनाने में सफलता मिली है, जिसकी एक ही खुराक एचआईवी वायरस को मार सकती है। इस्राइल के तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए इस टीके के लैब परिणाम बहुत सकारात्मक रहे हैं। वैज्ञानिकों ने शरीर में मौजूद टाइप-बी वाइट ब्लड सेल्स के जीन में कुछ बदलाव किए, जिससे एचआईवी वायरस टूट गया। इस सफलता ने उम्मीद जगाई है कि एचआईवी-एड्स जैसी बीमारी का इलाज भी दूर नहीं है।
विज्ञापन
एचआईवी-एड्स का कोई इलाज नहीं
एचआईवी-एड्स का अभी तक कोई इलाज नहीं है। हालांकि दवाओं से इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है और एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक जीवित रह सकता है। यह बीमारी एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस से फैलती है। यह वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करता है। इसका इलाज नहीं होने पर एड्स हो सकता है।
विज्ञापन
टाइप-बी व्हाइट ब्लड सेल्स का इस्तेमाल किया
इस लाइलाज बीमारी का तोड़ निकालने के लिए डॉ. आदि बार्गेल के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने टाइप-बी व्हाइट ब्लड सेल्स का इस्तेमाल किया। ये कोशिकाएं हमारे शरीर में वायरस और खतरनाक बैक्टीरिया से लड़ने के लिए एंटीबॉडी पैदा करती हैं। ये व्हाइट ब्लड सेल्स अस्थि मज्जा में बनती हैं। परिपक्व होने पर रक्त के माध्यम से शरीर के अंगों तक पहुंचते हैं। वैज्ञानिकों ने इन बी कोशिकाओं के जीन को संशोधित करके एचआईवी वायरस के कुछ हिस्सों से संपर्क किया। इससे उनमें कुछ बदलाव आया। उसके बाद इन तैयार बी कोशिकाओं का एचआईवी वायरस से मुकाबला किया गया, तो वायरस टूटता हुआ दिखाई दिया।
डॉ. बरजेल ने कहा कि लैब में जिन मॉडलों पर इस उपचार का परीक्षण किया गया, उन्होंने बहुत अच्छे परिणाम दिखाए। उनके शरीर में एंटीबॉडी की संख्या भी काफी बढ़ गई और एचआईवी वायरस को खत्म करने में सफल रहे। यह शोध नेचर मैगजीन में प्रकाशित हुआ है। मेडिकल जर्नल ने अपने निष्कर्ष में इन एंटीबॉडी को सुरक्षित, शक्तिशाली और काम करने योग्य बताया है।