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Israel-Lebanon Talks: इस्राइल-लेबनान के बीच 14-15 मई को अगले दौर की बातचीत, अमेरिकी विदेश विभाग ने दी जानकारी
Sat, 09 May 2026 07:25 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 09 May 2026 07:25 AM IST
सार
इस्राइल और लेबनान के बीच 14 और 15 मई को शांति वार्ता होगी। अमेरिका की मदद से होने वाली इस चर्चा का लक्ष्य हिजबुल्लाह को निष्क्रिय करना और लेबनान में स्थिरता लाना है। फिलहाल दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू है, बावजूद इसके दोनों ओर से हमले जारी है।
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इस्राइल और लेबनान के बीच अगले दौर की बातचीत 14 और 15 मई को
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिकी विदेश विभाग ने जानकारी दी है कि इस्राइल और लेबनान के बीच अगले दौर की बातचीत 14 और 15 मई को होगी। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच एक व्यापक शांति और सुरक्षा समझौता करना है। साथ ही इसमें हिजबुल्लाह से जुड़े मुद्दों पर भी बात होगी। अमेरिका इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।
क्या बोले अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता?
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता थॉमस टॉमी पिगॉट ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया। उन्होंने बताया कि आने वाली बातचीत 23 अप्रैल को हुई बातचीत के आधार पर आगे बढ़ेगी। उस बैठक का नेतृत्व खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया था। अमेरिका इन दो दिनों की बातचीत में दोनों देशों की सरकारों के बीच तालमेल बिठाने का काम करेगा।
विदेश विभाग के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधि शांति और सुरक्षा के ढांचे पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसमें सीमाओं का निर्धारण और लेबनान के लिए मानवीय सहायता जैसे विषय शामिल होंगे। अमेरिका का लक्ष्य पिछले दो दशकों के उन असफल तरीकों को बदलना है, जिनकी वजह से हिजबुल्लाह जैसे उग्रवादी गुट मजबूत हुए। इन गुटों ने लेबनान की सरकारी सत्ता को कमजोर किया और इस्राइल की उत्तरी सीमा के लिए खतरा पैदा किया।
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बातचीत का केंद्र शांति स्थापित करना
अमेरिका ने साफ किया है कि बातचीत का केंद्र लेबनान की संप्रभुता को बहाल करना और लंबे समय के लिए क्षेत्र में स्थिरता व शांति लाना है। दोनों पक्ष अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार हैं। अमेरिका मतभेदों को दूर करने की कोशिश करेगा ताकि इस्राइल को सुरक्षा और लेबनान को पुनर्निर्माण में मदद मिल सके।
ये भी पढ़ें: ट्रंप का बड़ा दावा: नौ युद्ध खत्म कराए, अब रूस-यूक्रेन की बारी; ईरान और हंतावायरस को लेकर कही ये बात
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बात पर जोर दिया कि शांति तभी संभव है जब लेबनान की सरकार का अपनी जमीन पर पूरा अधिकार हो। इसके लिए हिजबुल्लाह का पूरी तरह निहत्था होना जरूरी है। बता दें कि अमेरिका हिजबुल्लाह को एक विदेशी आतंकी संगठन मानता है।
स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम?
बयान में आगे कहा गया, ये चर्चाएं दशकों से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने और दोनों देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम हैं। पिछले महीने, ट्रंप ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, इस्राइल में राजदूत माइक हकाबी और लेबनान में राजदूत मिशेल इस्सा के साथ एक बैठक के बाद, दोनों पक्षों के बीच 10-दिन के संघर्ष विराम को बढ़ाने की घोषणा की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि युद्धविराम को तीन हफ्तों के लिए बढ़ाया गया है।
इस बीच, मार्को रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता पूरी तरह संभव है, लेकिन क्षेत्रीय हालात के कारण यह कठिन होगा। उन्होंने हिजबुल्लाह को शांति के रास्ते में मुख्य बाधा बताया। रुबियो के अनुसार, हिजबुल्लाह लेबनान की जमीन का इस्तेमाल इस्राइल पर हमले के लिए करता है, जिससे लेबनान के लोगों को भी भारी नुकसान होता है। फिलहाल दक्षिण लेबनान में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई और उत्तर में हिजबुल्लाह के हमले जारी हैं।
अन्य वीडियो-
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क्या बोले अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता?
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता थॉमस टॉमी पिगॉट ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया। उन्होंने बताया कि आने वाली बातचीत 23 अप्रैल को हुई बातचीत के आधार पर आगे बढ़ेगी। उस बैठक का नेतृत्व खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया था। अमेरिका इन दो दिनों की बातचीत में दोनों देशों की सरकारों के बीच तालमेल बिठाने का काम करेगा।
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विदेश विभाग के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधि शांति और सुरक्षा के ढांचे पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसमें सीमाओं का निर्धारण और लेबनान के लिए मानवीय सहायता जैसे विषय शामिल होंगे। अमेरिका का लक्ष्य पिछले दो दशकों के उन असफल तरीकों को बदलना है, जिनकी वजह से हिजबुल्लाह जैसे उग्रवादी गुट मजबूत हुए। इन गुटों ने लेबनान की सरकारी सत्ता को कमजोर किया और इस्राइल की उत्तरी सीमा के लिए खतरा पैदा किया।
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बातचीत का केंद्र शांति स्थापित करना
अमेरिका ने साफ किया है कि बातचीत का केंद्र लेबनान की संप्रभुता को बहाल करना और लंबे समय के लिए क्षेत्र में स्थिरता व शांति लाना है। दोनों पक्ष अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार हैं। अमेरिका मतभेदों को दूर करने की कोशिश करेगा ताकि इस्राइल को सुरक्षा और लेबनान को पुनर्निर्माण में मदद मिल सके।
ये भी पढ़ें: ट्रंप का बड़ा दावा: नौ युद्ध खत्म कराए, अब रूस-यूक्रेन की बारी; ईरान और हंतावायरस को लेकर कही ये बात
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बात पर जोर दिया कि शांति तभी संभव है जब लेबनान की सरकार का अपनी जमीन पर पूरा अधिकार हो। इसके लिए हिजबुल्लाह का पूरी तरह निहत्था होना जरूरी है। बता दें कि अमेरिका हिजबुल्लाह को एक विदेशी आतंकी संगठन मानता है।
स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम?
बयान में आगे कहा गया, ये चर्चाएं दशकों से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने और दोनों देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम हैं। पिछले महीने, ट्रंप ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, इस्राइल में राजदूत माइक हकाबी और लेबनान में राजदूत मिशेल इस्सा के साथ एक बैठक के बाद, दोनों पक्षों के बीच 10-दिन के संघर्ष विराम को बढ़ाने की घोषणा की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि युद्धविराम को तीन हफ्तों के लिए बढ़ाया गया है।
इस बीच, मार्को रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता पूरी तरह संभव है, लेकिन क्षेत्रीय हालात के कारण यह कठिन होगा। उन्होंने हिजबुल्लाह को शांति के रास्ते में मुख्य बाधा बताया। रुबियो के अनुसार, हिजबुल्लाह लेबनान की जमीन का इस्तेमाल इस्राइल पर हमले के लिए करता है, जिससे लेबनान के लोगों को भी भारी नुकसान होता है। फिलहाल दक्षिण लेबनान में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई और उत्तर में हिजबुल्लाह के हमले जारी हैं।
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