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'नर्क' में वापसी: तबाह हो चुके गाजा में एक यूएन मानवीय सहायताकर्मी का सफर
Sat, 29 Jun 2024 11:42 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 29 Jun 2024 11:42 AM IST
सार
फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) में वरिष्ठ संचार अधिकारी, लुइस वॉटरिज ने बताया कि आप उत्तरी गाजा, मध्य इलाके और दक्षिणी गाजा से बमबारी, धमाकों को सुन सकते हैं। “गाजा अब पृथ्वी पर वास्तव में नर्क है, यहां बहुत ही गर्मी है...कचरा हर जगह बिखरा पड़ा है, लोग प्लास्टिक शीट के नीचे रह रहे हैं, जहां तापमान और बढ़ जाता है।”
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गाजा में तबाही का मंजर।
- फोटो : UNICEF
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विस्तार
पिछले 9 महीनों से युद्धग्रस्त गाजा पट्टी में प्रवेश करना बेहद चुनौतीपूर्ण है और वहां सहायता आपूर्ति व ईंधन की किल्लत के बीच मानवीय सहायताकर्मी एक कठोर वास्तविकता का सामना कर रहे हैं। मौजूदा हालात में जरूरतमंदों तक अतिआवश्यक राहत पहुंचाने के लिए उनके पास सीमित साधन हैं। यूएन सहायताकर्मी लुइस वॉटरिज ने गाजा वापस पहुंचने के बाद यूएन न्यूज़ को शुक्रवार को यह जानकारी दी है।
फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) में वरिष्ठ संचार अधिकारी, लुइस वॉटरिज ने बताया कि आप उत्तरी गाजा, मध्य इलाके और दक्षिणी गाजा से बमबारी, धमाकों को सुन सकते हैं। “गाजा अब पृथ्वी पर वास्तव में नर्क है, यहां बहुत ही गर्मी है...कचरा हर जगह बिखरा पड़ा है, लोग प्लास्टिक शीट के नीचे रह रहे हैं, जहां तापमान और बढ़ जाता है।”
सात अक्तूबर को दक्षिणी इस्राइल पर हमास व अन्य चरमपंथी गुटों के आतंकी हमलों और लोगों को बंधक बनाए जाने के बाद, इस्राइली सैन्य बलों ने बड़े पैमाने पर गाजा में जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिससे बड़ी संख्या में फलस्तीनी हताहत हुए हैं और एक विशाल मानवीय संकट उपजा है। गुरूवार को दक्षिणी गाजा में स्थित केरेम शेलॉम सीमा चौकी पार करने के बाद, लुइस वॉटरिज ने कहा कि नजदीक में स्थित रफा शहर बर्बाद हो चुका है।
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इससे पहले, उन्होंने मई महीने में गाजा का दौरा किया था जहां रफा उनका शिविर था। उस समय इस्राइली सेना ने इस अहम सीमा चौकी को अपने नियंत्रण में ले लिया था, जिससे गाजा में राहत पहुंचाने में अवरोध खड़े हो गए थे। यूएन सहायताकर्मी ने वहाँ से जब मध्य गाजा में स्थित अपने शिविर तक का सफ़र शुरू किया तो उन्हें रास्ते में भी बर्बादी के वही दृश्य दिखाई दिए। “खान युनिस से होकर गुज़रना स्तब्धकारी था...यह एक वीरान शहर बन चुका है, हर चीज़ बर्बाद हो चुकी है।”
“अब, ऐसे बहुत से परिवार हैं जो इन बर्बाद, खंडहर हो चुकी इमारतों में रह रहे हैं। जहां दीवारें पूरी तरह टूट चुकी हैं, वहां कंबल या प्लास्टिक शीट लगा ली गई है।” लुइस वॉटरिज ने उन ख़बरों की पुष्टि की है कि नौ महीनों से जारी भीषण इस्राइली बमबारी के बाद कानून-व्यवस्था दरक चुकी है। गाजा में आम नागरिकों के जीवन में विशाल उठापठक हुई है। जरूरतमंद फलस्तीनी भोजन की तलाश में मानवीय राहत ट्रकों के केरेम शेलॉम चौकी को पार करने के बाद रास्ते में ही रोकने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
“जब हम पहुंचे तो सड़क पूरी तरह से लूटपाट कर रहे लोगों से भरी थी। हम वहां उसी समय आए, जब कुछ राहत ट्रक पहुंचे थे, और सैकड़ों हथियारबंद व्यक्ति उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। हमने जिन ट्रकों को रास्ते में पार किया, वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे, उनकी विंडस्क्रीन चकनाचूर हो चुकी थी...ये पूरी तरह से अराजकता जैसा महसूस हुआ।”
‘हर एक यूएन इमारत’ ध्वस्त या क्षतिग्रस्त
लुइस वॉटरिज ने बताया कि गाजा पट्टी में केरेम शेलॉम चौकी से ख़ान युनिस, डेयर अल बालाह और उससे परे अन्य इलाकों में यूएन केंद्रों पर भारी क्षति हुई है। बमबारी के कारण कई इमारतों में विशाल गढ्ढे और छेद हो गए हैं। “हर एक UNRWA सुविधा केंद्र- स्कूल, भंडारण व्यवस्था, खाद्य वितरण इत्यादि को बहुत क्षति पहुंची है या वे बर्बाद हो गई हैं। गोलियों के निशान, टूटी हुई दीवारें, एक-दूसरे के ऊपर ध्वस्त हो चुके फर्श, आप सोच नहीं सकते हैं कि ये सभी अंतरराष्ट्रीय कानून के अन्तर्गत संरक्षित यूएन केन्द्र थे।”
मानवीय सहायता मामलों में संयोजन के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) ने बताया कि 2024 की शुरुआत के बाद से अब तक, गाजा में अक्टूबर 2023 की तुलना में केवल 14 प्रतिशत ईंधन को भेजे जाने की अनुमति दी गई है। अक्तूबर 2023 से पहले हर महीने 1.4 करोड़ लीटर ईंधन गाजा पट्टी में भेजा जा रहा था, जबकि अब यह घटकर 20 लाख लीटर ही रह गया है।
लुइस वॉटरिज ने कहा कि ईंधन ना होने की वजह से कहीं जाना संभव नहीं है, जिससे मानवीय सहायता प्रयास और अधिक कठिन हो गए हैं। UNRWA के पास, फिलहाल उपलब्ध आपूर्ति का वितरण करने की योजना है, जैसे कि गद्दे और बिस्तर, मगर यह बेहद सीमित है। यह दर्शाता है कि मानवीय सहायता अभियान कितना चुनौतीपूर्ण है, जब हमारे पास अपनी आवाजाही के लिए भी ईंधन नहीं है।
इन चुनौतियों के अलावा, UNRWA कर्मचारियों को अन्य कठिनाइयों से भी जूझना पड़ रहा है। लुइस वॉटरिज ने बताया कि मैं उनसे मिलना चाहती हूं। वे ठीक हैं, लेकिन रफा से विस्थापित होने के बाद से बड़े सदमे में हैं। उनके पास भी कुछ नहीं बचा है।
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)
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फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) में वरिष्ठ संचार अधिकारी, लुइस वॉटरिज ने बताया कि आप उत्तरी गाजा, मध्य इलाके और दक्षिणी गाजा से बमबारी, धमाकों को सुन सकते हैं। “गाजा अब पृथ्वी पर वास्तव में नर्क है, यहां बहुत ही गर्मी है...कचरा हर जगह बिखरा पड़ा है, लोग प्लास्टिक शीट के नीचे रह रहे हैं, जहां तापमान और बढ़ जाता है।”
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सात अक्तूबर को दक्षिणी इस्राइल पर हमास व अन्य चरमपंथी गुटों के आतंकी हमलों और लोगों को बंधक बनाए जाने के बाद, इस्राइली सैन्य बलों ने बड़े पैमाने पर गाजा में जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिससे बड़ी संख्या में फलस्तीनी हताहत हुए हैं और एक विशाल मानवीय संकट उपजा है। गुरूवार को दक्षिणी गाजा में स्थित केरेम शेलॉम सीमा चौकी पार करने के बाद, लुइस वॉटरिज ने कहा कि नजदीक में स्थित रफा शहर बर्बाद हो चुका है।
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इससे पहले, उन्होंने मई महीने में गाजा का दौरा किया था जहां रफा उनका शिविर था। उस समय इस्राइली सेना ने इस अहम सीमा चौकी को अपने नियंत्रण में ले लिया था, जिससे गाजा में राहत पहुंचाने में अवरोध खड़े हो गए थे। यूएन सहायताकर्मी ने वहाँ से जब मध्य गाजा में स्थित अपने शिविर तक का सफ़र शुरू किया तो उन्हें रास्ते में भी बर्बादी के वही दृश्य दिखाई दिए। “खान युनिस से होकर गुज़रना स्तब्धकारी था...यह एक वीरान शहर बन चुका है, हर चीज़ बर्बाद हो चुकी है।”
“अब, ऐसे बहुत से परिवार हैं जो इन बर्बाद, खंडहर हो चुकी इमारतों में रह रहे हैं। जहां दीवारें पूरी तरह टूट चुकी हैं, वहां कंबल या प्लास्टिक शीट लगा ली गई है।” लुइस वॉटरिज ने उन ख़बरों की पुष्टि की है कि नौ महीनों से जारी भीषण इस्राइली बमबारी के बाद कानून-व्यवस्था दरक चुकी है। गाजा में आम नागरिकों के जीवन में विशाल उठापठक हुई है। जरूरतमंद फलस्तीनी भोजन की तलाश में मानवीय राहत ट्रकों के केरेम शेलॉम चौकी को पार करने के बाद रास्ते में ही रोकने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
“जब हम पहुंचे तो सड़क पूरी तरह से लूटपाट कर रहे लोगों से भरी थी। हम वहां उसी समय आए, जब कुछ राहत ट्रक पहुंचे थे, और सैकड़ों हथियारबंद व्यक्ति उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। हमने जिन ट्रकों को रास्ते में पार किया, वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे, उनकी विंडस्क्रीन चकनाचूर हो चुकी थी...ये पूरी तरह से अराजकता जैसा महसूस हुआ।”
‘हर एक यूएन इमारत’ ध्वस्त या क्षतिग्रस्त
लुइस वॉटरिज ने बताया कि गाजा पट्टी में केरेम शेलॉम चौकी से ख़ान युनिस, डेयर अल बालाह और उससे परे अन्य इलाकों में यूएन केंद्रों पर भारी क्षति हुई है। बमबारी के कारण कई इमारतों में विशाल गढ्ढे और छेद हो गए हैं। “हर एक UNRWA सुविधा केंद्र- स्कूल, भंडारण व्यवस्था, खाद्य वितरण इत्यादि को बहुत क्षति पहुंची है या वे बर्बाद हो गई हैं। गोलियों के निशान, टूटी हुई दीवारें, एक-दूसरे के ऊपर ध्वस्त हो चुके फर्श, आप सोच नहीं सकते हैं कि ये सभी अंतरराष्ट्रीय कानून के अन्तर्गत संरक्षित यूएन केन्द्र थे।”
मानवीय सहायता मामलों में संयोजन के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) ने बताया कि 2024 की शुरुआत के बाद से अब तक, गाजा में अक्टूबर 2023 की तुलना में केवल 14 प्रतिशत ईंधन को भेजे जाने की अनुमति दी गई है। अक्तूबर 2023 से पहले हर महीने 1.4 करोड़ लीटर ईंधन गाजा पट्टी में भेजा जा रहा था, जबकि अब यह घटकर 20 लाख लीटर ही रह गया है।
लुइस वॉटरिज ने कहा कि ईंधन ना होने की वजह से कहीं जाना संभव नहीं है, जिससे मानवीय सहायता प्रयास और अधिक कठिन हो गए हैं। UNRWA के पास, फिलहाल उपलब्ध आपूर्ति का वितरण करने की योजना है, जैसे कि गद्दे और बिस्तर, मगर यह बेहद सीमित है। यह दर्शाता है कि मानवीय सहायता अभियान कितना चुनौतीपूर्ण है, जब हमारे पास अपनी आवाजाही के लिए भी ईंधन नहीं है।
इन चुनौतियों के अलावा, UNRWA कर्मचारियों को अन्य कठिनाइयों से भी जूझना पड़ रहा है। लुइस वॉटरिज ने बताया कि मैं उनसे मिलना चाहती हूं। वे ठीक हैं, लेकिन रफा से विस्थापित होने के बाद से बड़े सदमे में हैं। उनके पास भी कुछ नहीं बचा है।
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)