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Ground Report: युद्धग्रस्त देश के लोगों में अपनी सेना के प्रति अकूत प्यार; नरसंहार की फिराक में था हिजबुल्ला

Mon, 14 Oct 2024 04:21 AM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 14 Oct 2024 04:21 AM IST
सार

उत्तर का युद्ध प्रभावित क्षेत्र हाइफा हो या दक्षिण का गाजा पट्टी से लगता इलाका सेडरत या हो सेंटर का तेल अवीव या येरुशलम। इस्राइल में सबसे बड़ा त्योहार योम किप्पुर मनाया जा रहा था। तेल अवीव के रहने वाले एमोख ओल कहते हैं कि 1973 के बाद यह पहला पर्व पड़ा है जब देश युद्ध में होने के बाद इसे मना रहा है।

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Israel Hamas Conflict Ground Report from Haifa IDF soldiers kid happy situation amid tension
लेबनान सीमा पर हिजबुल्ला कैंपों की तस्वीर और साइकिलिंग करते बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सड़कों पर जश्न मनाया जा रहा है। युवाओं की टोलियां नाच-गा रहीं हैं। कोई सड़कों पर साइकिलिंग कर रहा है, तो कोई दोस्तों संग खाली सड़क पर बैठ गप्पें मार रहा। बच्चे सड़कों पर फुटबॉल खेल रहे हैं। हर ओर मस्ती हर ओर खुशियां हैं। यह युद्ध में पड़े इस्राइल की वह तस्वीर है जो  पूरी दुनिया में उसे शायद सबसे अलग बनाती है। बीते दो दिनों से पूरा देश योम किप्पुर उत्सव मना रहा था। सड़कों पर जश्न का माहौल। इस चिंता से दूर कि पिछले साल इसी त्योहार पर हमास के आतंकियों ने जो युद्ध शुरू किया था उसने समूचे इस्राइल को दुनिया के सबसे बड़े युद्ध क्षेत्र में तब्दील कर दिया है। अमर उजाला ने युद्धग्रस्त इस्राइल की यह तस्वीर देखी।

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उत्तर का युद्ध प्रभावित क्षेत्र हाइफा हो या दक्षिण का गाजा पट्टी से लगता इलाका सेडरत या हो सेंटर का तेल अवीव या येरुशलम। इस्राइल में सबसे बड़ा त्योहार योम किप्पुर मनाया जा रहा था। तेल अवीव के रहने वाले एमोख ओल कहते हैं कि 1973 के बाद यह पहला पर्व पड़ा है जब देश युद्ध में होने के बाद इसे मना रहा है। वह कहते हैं कि उनको इस बात की चिंता है कि देश में क्या हालात हैं। लेकिन उनको भरोसा है कि उनकी सेना इतनी सक्षम है कि वह युद्ध में होने के बाद भी खुली सड़कों पर नाच सकते हैं, गा सकते हैं।
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तेल अवीव की सड़कों पर अमर उजाला ने इस्राइली लोगों की हिम्मत और अपनी सेना के लिए जमकर प्यार देखा। यहां के सबसे बड़े वाणिज्यिक केंद्र आरजेली के सामने करीब 40 युवाओं का समूह सड़क पर देश के पारंपरिक गीत गा रहा था। यहां ओलुख सेम कहते हैं कि वह बचपन से ही युद्ध देखते आए हैं। इसलिए हमास, हिजबुल्ला और ईरान की मिसाइलें उनकी हिम्मत को नहीं तोड़ सकते। वह कहते हैं, आप सड़कों पर जश्न को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि क्या  यहां युद्ध का कोई असर दिख रहा है।
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जश्न जरूरी है ताकि बना रहे सेना का मनोबल
तेल अवीव की एक रिहायशी सोसाइटी के करीब दर्जन भर से ज्यादा छोटे-छोटे बच्चे भी सड़कों पर साइकिल चलाने उतरे थे। इन बच्चों के परिजनों का कहना था कि आप विदेश से युद्ध कवर करने आए हैं इसलिए आपको यह युद्ध क्षेत्र नजर आता है। लेकिन, हमारे लिए यह युद्ध क्षेत्र नहीं है। यहां की सगोना मार्केट के रिहायशी इलाके में रहने वाले ओलिव डेल कहते हैं कि अगर हम लोग छोटे-छोटे बच्चों के साथ सड़कों पर जश्न मनाने नहीं उतरेंगे तो हमारी सेना पर इसका कुछ और ही प्रभाव पड़ेगा।

  • हम अपनी सेना को बच्चों के साथ सड़कों पर उतरकर जश्न मनाते हुए खेलते और गाते हुए यह जताना चाहते हैं कि उनकी वजह से हम सुरक्षित हैं।

न मिसाइलों का डर और न सायरन की चिंता
कुछ दिन पहले तेल अवीव इलाके में लगातार सायरन बजते रहे थे। इसका मतलब यह था कि दुश्मनों ने आसपास मिसाइलें दागनीं शुरू की हैं। लेकिन उन मिसाइलों की चिंता से दूर और बजने वाले सायरनों से निश्चिंत एलिन छोटे बच्चे संग सड़कों पर फुटबॉल खेलने निकली थीं। इस्राइल डिफेंस फोर्स की सैनिक एलिन बताती हैं कि वह दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे सकती हैं। इसलिए उनको मिसाइलों और लगातार बजने वाले सायरनों की बिल्कुल चिंता नहीं है। उनका कहना है कि वह बचपन से ऐसे माहौल में पली बढ़ी हैं कि युद्ध नाम का डर उनको विचलित नहीं करता। वह यही भाव अपने बच्चे में भरना चाहती हैं।

तेल अवीव में साइकिल चला रहे बच्चों की टोली भी अपने में मस्त थी। छोटे-छोटे बच्चों ने जब अपना वीडियो बनाते हुए देखा तो सब एक साथ जमा होकर नृत्य करने लगे।  

  • यह पूछने पर कि इस वक्त तो यहां युद्ध  चल रहा है, सुरक्षा का भी अलर्ट जारी है, फिर भी साइकिल चला रहे हो, डर नहीं लगता? जवाब में बच्चों ने हमास व हिजबुल्ला को ललकारना शुरू कर दिया। बोले, हमास व हिजबुल्ला के आतंकियों से डर जाएं, यह नहीं हो सकता।

नरसंहार की फिराक में था हिजबुल्ला, हमास की तर्ज पर लेबनान बॉर्डर पर तैयार किया नेटवर्क
गाजा पट्टी में हमास ने आतंक का जो मॉडल अपनाया, उसी तर्ज पर हिजबुल्ला ने लेबनान बॉर्डर पर अपना नेटवर्क खड़ा किया है। उसने इस्राइल सीमा पर लेबनान के अंदर बसे गांव के अलावा भी कई बड़े-बड़े सेंटरों पर कैंप बना लिए हैं। इस्राइल डिफेंस फोर्स के जवानों ने बताया कि हिजबुल्ला इस्राइल में घुसने की फिराक में था।

अमर उजाला ने अधिकारियों से बातचीत की तो पता चला कि हमास की तरह हिजबुल्ला भी उत्तरी इलाके से शहर में घुसकर बड़े नरसंहार की तैयारी में था। यही वजह है कि गाजा पट्टी में हमास के टेरर मॉडल को नेस्तनाबूद करने में अहम भूमिका अदा करने वाले अफसरों और जवानों को हिजबुल्ला के मॉडल को खत्म करने का लक्ष्य दिया गया है। ये अफसर लेबनान सीमा पर उनके टेरर कैंपों को लगातार खत्म कर रहे हैं।

दुनिया की सबसे मजबूत खुफिया एजेंसी मोसाद समेत इस्राइल की तमाम एजेंसियां तब फेल हो गई थीं, जब गाजा पट्टी से हमास लड़ाकों ने इस्राइल में घुसकर नरसंहार शुरू कर दिया था। पिछले साल सात अक्तूबर को हुए हमले के बाद हिजबुल्ला ने भी उत्तरी हिस्से में रॉकेट दागने शुरू किए थे। इसके बाद लेबनान सीमा पर गाजा पट्टी की तरह बड़ी संख्या में हिजबुल्ला लड़ाकों को भेजना शुरू कर दिया। अब जबकि इस्राइल और हिजबुल्ला में सीधे तौर पर युद्ध चल रहा है, तो यह बात सामने निकल कर आई कि हिजबुल्ला ने हमले की पूरी योजना तैयार कर रखी थी। बिल्कुल वैसे ही जैसे हमास ने गाजापट्टी के भीतर गाजा शहर और खान यूनिस समेत गजालिया और अबसान अल कबीर जैसे शहरों में घरों और बड़े सेंटरों में कैंप बनाकर हमला किया था।





हमास जैसी हिमाकत नहीं कर सकता हिजबुल्ला
इस्राइल में लंबे समय से युद्ध की रिपोर्टिंग कर रहे स्थानीय पत्रकार रेनेनेल कहते हैं कि हमास का इस्राइल में घुसकर नरसंहार करना खुफिया एजेंसियों और सरकार की बड़ी नाकामी थी। हमने सबक लिया है और हिजबुल्ला समेत बड़े दुश्मन देशों को जवाब देना शुरू किया। हिजबुल्ला दुश्मन देशों की मदद से छोटे-छोटे हमले तो कर रहा है, लेकिन हमास जैसी हिमाकत दिखाने की हिम्मत नहीं कर सकता।

रेनेनल कहते हैं, हिजबुल्ला के ठिकानों से बड़ी मात्रा में बरामद हो रहे गोला-बारूद से स्पष्ट अंदाजा लग रहा है कि यह संगठन हमास की तर्ज पर ही नेटवर्क विकसित कर इस्राइल में घुसने की फिराक में लगा हुआ है। बीते कुछ दिनों में सेना ने जिस तरह उसके ठिकानों को ध्वस्त किया है, साफ हो रहा है कि वह पूरी रणनीति बनाकर इस्राइल में नरसंहार के साथ बड़े हमले करना चाहता है।

स्थानीय लोगों में भय नहीं, उन्हें सेना पर भरोसा
हिजबुल्ला की खतरनाक साजिश और मिसाइलों के हमले के बावजूद इस्राइल के उत्तरी हिस्से में रह रहे लोगों में भय नहीं है। लोग बेधड़क सड़कों पर घूम रहे हैं। यहां रहने वाले पूर्व नौसैनिक ओकेन रोशनेम कहते हैं, हिजबुल्ला के निशाने वाले इलाकों में रहने के बावजूद उन्हें सेना पर पूरा भरोसा है।

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