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संघर्ष: इस्राइल-हमास गाजा में क्यों छिड़ा युद्ध, क्यों खून बहाने पर आमादा हैं ये मुल्क, जानें विस्तार से
Tue, 18 May 2021 08:51 PM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, गाजा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, गाजा
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 18 May 2021 08:51 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय कानून असैन्य नागरिकों या नागरिक इलाकों में अनैतिक बल के इस्तेमाल पर रोक लगाता है और इस तरह तेल अवीव अपार्टमेंट ब्लॉक में रॉकेट दागना सीधे तौर पर नियम का उल्लंघन है। लेकिन दोनों पक्षों ने नियमों को ताक पर रखकर एक दूसरे को ताकत दिखाने की कोशिश में लगे हैं और इन सब के बीच पिस रहे हैं गाजा के नागरिक।
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Israel Hamas war
- फोटो : PTI
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विस्तार
गाजा पट्टी में इस्राइल और चरमपंथी संगठन हमास के बीच संघर्ष लगातार जारी है। दोनों पक्षों के बीच समझौते की बजाय आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दोनों एक दूसरे को युद्ध की स्थिति पैदा करने के लिए गुनहगार मान रहे हैं।इस्राइल का कहना है कि हमास फिलीस्तीन की जनता का इस्तेमाल मानव ढाल की तरह करता है वहीं हमास का कहना है कि इस्राइल अत्याधिक बल का इस्तेमाल कर रहा है। हमास और अन्य फिलीस्तीनी समूह ने इस्राइल के ऊपर सैकड़ों रॉकेट से हमले किए हैं वहीं इस्राइल भी अपनी ताकत दिखा रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय कानून असैन्य नागरिकों या नागरिक इलाकों में अनैतिक बल के इस्तेमाल पर रोक लगाता है और इस तरह तेल अवीव अपार्टमेंट ब्लॉक में रॉकेट दागना सीधे तौर पर नियम का उल्लंघन है। लेकिन दोनों पक्षों ने नियमों को ताक पर रखकर एक दूसरे को ताकत दिखाने की कोशिश में लगे हैं और इन सब के बीच पिस रहे हैं गाजा के नागरिक। बता दें कि गाजा में करीब 20 लाख लोग एक छोटे तटीय क्षेत्र में रहते हैं। संकरी जगह और लगातार बमबारी की वजह से गाजा के लोगों के पास सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए बेहद कम ही जगहें बचती हैं। गाजा में 2007 में हमास के सत्ता संचालन में आ जाने के बाद इस्राइल और मिस्र ने यहां कड़े प्रतिबंध लगा दिए जिससे इस जगह को छोड़ कर जाना किसी भी नागरिक के लिए बहुत ही मुश्किल है।
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इस प्रतिबंध से निकलने के लिए ही हमास जैसे चरमपंथी संगठन फिलीस्तीनी नागरिकों के साथ मिलकर इस्राइल को अपनी ताकत दिखाने की कोशिश में लगे हैं। वहीं इस्राइल और पश्चिमी देश हमास को आतंकी संगठन के रूप में मानते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि गाजा में हमास का बहुत बड़ा प्रभाव है, एक तरह से इनके सदस्य यहां सरकार चलाते हैं और वैसे लोग जो इस्राइल के प्रतिबंध से परेशान हैं वे इनका बखूबी साथ दे रहे हैं। ये सभी लोग नौकरशाह और पुलिस के रूप में इसके साथ काम करते हैं। हालांकि गाजा में ही कुछ ऐसे समूह भी हैं जो हमास का विरोध करते हैं।
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बता दें कि इस साल की शुरुआत में, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने 2014 में पिछले युद्ध के दौरान इजरायल और फिलिस्तीनी उग्रवादियों द्वारा किए गए संभावित युद्ध अपराधों की जांच शुरू की थी। ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष पहले से ही इसी रणनीति का उपयोग कर रहे हैं।
फिलिस्तीनी लड़ाके स्पष्ट रूप से निर्मित आवासीय क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और उन्होंने स्कूलों, मस्जिदों, घरों के करीब सुरंगों, रॉकेट लॉन्चरों और भी बुनियादी ढांचे को तैनात किया है।वहीं एक अभियोजक को यह साबित करना होगा कि युद्ध के दौरान गैर-लड़ाकों को दी गई सुरक्षा से लाभ उठाने के लिए लड़ाकों ने जानबूझकर नागरिकों के पास सैन्य संपत्तियां रखीं।
फ्रांस और स्विट्जरलैंड जैसा है मामला
वहीं जिनेवा अकेडमी ऑफ इंटरनेशनल ह्यूमेनिटेरियन लॉ एंड ह्यूमन राइट्स के प्रोफेसर मार्को ससोली उदाहरण के रूप में में समझाते हुए कहते हैं कि अगर फ्रांस स्विट्जरलैंड पर हमला करता हो तो स्विस लोगों को जिनेवा की रक्षा करने पर प्रतिबंध नहीं है, इसमें स्विस सैनिकों को शामिल करना, तोपखानों के स्थानों को जिनेवा के भीतर भी तैनात करना शामिल है। अंतरराष्ट्रीय कानून संघर्ष के समय हर पक्ष पर लागू होता है।
फ्रांस जिनेवा में लड़ सकता है लेकिन यहां समान अनुपात का मुद्दा बड़े स्तर पर आता है और इस दृश्य के साथ आगे देखें तो क्या जिनेवा पर फ्रांस द्वारा हमला करना उकसावे के दायरे में आता है? वैसे ही इस्राइल के आलोचक उस पर असंगत बल प्रयोग का आरोप लगाते हैं। आलोचक कहते हैं कि एक तरह से इतना बड़ा ताकतवर देश अपनी सबसे मजबूत सेना के साथ वह एक चरमपंथी समूह के खिलाफ युद्ध कर रहा है जिसके पास आधुनिक हथियार नहीं हैं और जिसके रॉकेट को इजराइल के मिसाइल रोधी रक्षा उपकरण रास्ते में ही मार गिराते हैं।