{"_id":"60a76e3b8ebc3e7fc91e0b05","slug":"israel-and-palestinian-faction-hamas-finally-agreed-to-a-ceasefire-also-promised-not-to-take-any-offensive-action-anymore","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस्राइल-फिलस्तीनी टकराव: युद्धविराम की शर्तें स्पष्ट नहीं, दोनों पक्षों के अलग-अलग बयान","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
इस्राइल-फिलस्तीनी टकराव: युद्धविराम की शर्तें स्पष्ट नहीं, दोनों पक्षों के अलग-अलग बयान
Fri, 21 May 2021 01:54 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 21 May 2021 01:54 PM IST
सार
विश्लेषकों का कहना है कि हालिया लड़ाई ने यरुशलम, गाजा और फिलस्तीनियों के मसले को एक बार फिर से दुनिया के एजेंडे पर ऊपर ला दिया है। इससे मानव अधिकार संगठनों की उन रिपोर्टों पर विश्व मंचों पर फिर से चर्चा हुई है, जिनमें इस्राइल पर मानवाधिकारों के घोर हनन के आरोप लगाए गए हैं...
विज्ञापन
इस्राइल
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ग्यारह दिन तक फिलस्तीनी इलाकों पर हमले जारी रखने के बाद आखिरकार इस्राइल युद्ध विराम पर राजी हुआ। फिलस्तीनी गुट हमास ने भी अब कोई आक्रामक कार्रवाई ना करने का वादा किया है। लेकिन युद्धविराम किन शर्तों पर हुआ है, इसे लेकर दोनों पक्षों ने अलग-अलग ब्योरे दिए। इस्राइल के प्रधानमंत्री के कार्यालय ने कहा कि यह एक ‘दोतरफा और बिना शर्त युद्धविराम’ है।
विज्ञापन
लेकिन कुछ खबरों के मुताबिक मिस्र के जिस प्रस्ताव के आधार पर युद्धविराम पर सहमति बनी, उसमें कहा गया है कि आगे चल कर गाजा से संबंधित मुद्दों पर दोनों पक्ष बातचीत करेंगे। हमास के अधिकारियों ने कहा है कि युद्धविराम यरुशलम में इस्राइल की नीति बदलने के वादे के आधार पर हुआ है। इन वायदों में अल-अक्सा मस्जिद की निगरानी की व्यवस्था बदलना और पूर्वी यरुशलम से फिलस्तीनियों को निकालने पर रोक शामिल हैं। मगर इस्राइली अधिकारियों ने दो-टूक इनकार किया कि ऐसा कोई वचन दिया गया है।
विज्ञापन
लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि हालिया लड़ाई ने यरुशलम, गाजा और फिलस्तीनियों के मसले को एक बार फिर से दुनिया के एजेंडे पर ऊपर ला दिया है। इससे मानव अधिकार संगठनों की उन रिपोर्टों पर विश्व मंचों पर फिर से चर्चा हुई है, जिनमें इस्राइल पर मानवाधिकारों के घोर हनन के आरोप लगाए गए हैं। इनमें अमेरिकी मानव अधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट भी शामिल है।
विज्ञापन
इसके अलावा इस्राइली मानव अधिकार संगठनों- येश दिन और बी’टीसलेम की रिपोर्टें भी इस्राइल के लिए असहज करने वाली हैं। उनमें इस्राइल सरकार पर नस्लभेदी नीति चलान के आरोप लगाए गए हैं। इस्राइली संगठनों ने कहा है कि अगर इस्राइल सरकार ने इस नीति को नहीं रोका और अगर उसे जवाबदेह नहीं ठहराया गया, तो उससे इस्राइल और आसपास के देशों के लिए बड़ा खतरा पैदा होगा।
इस बार लड़ाई का एक खास नतीजा अमेरिका में इस्राइल के लिए समर्थन में दरार पड़ जाना रहा। वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू की एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि पहले अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों में इस्राइल को लेकर जो सहमति रहती थी, आम-सहमति को इस बार जोरदार चुनौती मिली। ये चुनौती न सिर्फ डेमोक्रेटिक पार्टी में नए उभरे प्रोग्रेसिव खेमे से मिली, बल्कि बेला और गिगी हदीद जैसे कई सुपर मॉडल्स, हॉलीवुड स्टार, शिक्षाशास्त्रियों और जन संगठनों ने भी फिलस्तीनियों के अधिकारों का समर्थन किया। अमेरिकी शहरों में इस्राइली हमलों के खिलाफ प्रदर्शन किए गए, जिनमें हजारों लोगों ने शिरकत की।
हालांकि ऐसे प्रदर्शन यूरोपीय शहरों में भी हुए, लेकिन इस्राइल के लिए ये तसल्ली की बात रही कि वहां सरकारों का रुख इस बार उसके प्रति नरम रहा। विश्लेषकों ने कहा है कि इस मामले में ऐसा लगता है कि अमेरिका और यूरोप ने अपनी भूमिकाएं बदल लीं। पहले यूरोपियन यूनियन के भीतर इस्राइल की आक्रामक नीतियों की अक्सर आलोचना होती थी, लेकिन इस बार वहां उसके प्रति सहानुभूति देखी गई। जबकि उसके सबसे बड़े समर्थक अमेरिका उसके हमलों को लेकर गहरे मतभेद उभर आए।
ये साफ हुआ कि इस्राइल की गतिविधियों पर अमेरिका का निर्णायक प्रभाव अब भी बना हुआ है। जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि राष्ट्रपति जो बाइडन के इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन करने के तुरंत बाद युद्धविराम के संकेत मिलने लगे। खबरों के मुताबिक बाइडन ने दो टूक कहा था कि वे युद्धविराम चाहते हैं। इस बीच संकेत हैं कि सिर्फ युद्धविराम से अमेरिकी राजनीति में इस्राइल-फिलस्तीन का मुद्दा अभी शांत नहीं होने वाला है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव खेमे ने गाजा इलाके के पुनर्निर्माण की मांग उठा दी है। सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा है कि गाजा में मानवीय मदद और पुनर्निर्माण के साथ-साथ स्थायी शांति के लिए कदम उठाना अब जरूरी है। राष्ट्रपति बाइडन ने भी एक बयान में कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्र से मिल कर गाजा के लोगों को मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण संबंधी मदद पहुंचाने के लिए काम करेंगे। जानकारों का कहना है कि ये बातें इस्राइल को रास नहीं आएंगी।