क्या 'ड्रैगन' के दावे को मिल गई मान्यता: चीन की घुसपैठ पर इंडोनेशिया ने क्यों साध रखी है ‘रहस्यमय चुप्पी’?
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि चीन के 6,900 टन के हाइयांग डिजी-10 जहाज और उसकी रक्षा में तैनात चीन के तटरक्षक गार्डों का जहाज 21 अक्तूबर तक इंडोनेशियाई इलाके में रहे। 22 अक्तूबर को उन्होंने वहां से वापसी की...
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चीन के एक जहाज ने इंडोनेशिया के समुद्र तटों पर सात हफ्तों तक सर्वेक्षण किया। वो जहाज उतनी दूर तक गया, जिसे इंडोनेशिया का खास समुद्री इलाका माना जाता है। लेकिन इस मामले में इंडोनेशिया के अधिकारियों ने रहस्यमय चुप्पी साध रखी है। इससे इस बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर इंडोनेशिया चीन के प्रति ये उदारता क्यों दिखा रहा है।
आसियान के शिखर सम्मेलन से पहले लौटा
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि चीन के 6,900 टन के हाइयांग डिजी-10 जहाज और उसकी रक्षा में तैनात चीन के तटरक्षक गार्डों का जहाज 21 अक्तूबर तक इंडोनेशियाई इलाके में रहे। 22 अक्तूबर को उन्होंने वहां से वापसी की। यानी दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संघ- आसियान के शिखर सम्मेलन की शुरुआत से चार दिन पहले उन्होंने इंडोनेशियाई क्षेत्र से लौटने का फैसला किया। वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन का सर्वे जहाज ग्वांगझाऊ स्थित अपने बंदरगाह की तरफ लौटा।
विश्लेषकों का कहना है कि इतनी लंबी अवधि तक चीनी जहाज को इंडोनेशिया के विशेष समुद्री क्षेत्र में मौजूद रहने की इजाजत देने का मतलब यह है कि इंडोनेशिया ने दक्षिण चीन सागर में चीनी दावे के मुताबिक उसकी समुद्री सीमा को गुपचुप मान्यता दे दी है। इस चीनी दावे को नाइन डैश लाइन नाम से जाना जाता है। ये समझ जा रहा है कि चीन का दावा इंडोनेशिया के खास समुद्री क्षेत्र के अंदर तक है, जहां वियतनाम की समुद्री सीमा भी टकराती है। इस लिहाज से चीनी जहाज का वहां जाना इंडोनेशियाई सीमा क्षेत्र में चीन की घुसपैठ माना जाएगा।
विश्लेषकों के मुताबिक यह रहस्यमय है कि इंडोनेशिया ने इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है। इस बारे में कैनबरा स्थित ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के विश्लेषक मैल्कम डेविस ने एशिया टाइम्स से कहा- ‘मेरी राय में इंडोनेशिया अभी ऐसा कुछ नहीं करना चाहता, जिससे तनाव बढ़े। लेकिन अगर इंडोनेशिया यह समझता है कि इससे चीन संतुष्ट हो जाएगा, तो उसे झटका खाने के लिए तैयार रहना चाहिए। चीन को अगर आप एक इंच छूट देते हैं, तो वह एक मील तक कब्जा जमा लेता है।’
चीन को भेजे विरोध पत्र
लंदन स्थित चैटहैम हाउस में एसोसिएट फेलॉ बिल हेयटॉन ने भी इस राय से सहमति जताई है। उन्होंने कहा है- ‘अगर इंडोनेशिया सरकार ने इस पर अभी तक चीन को विरोध पत्र नहीं भेजा है, तो उसे तुरंत ऐसा करना चाहिए। वरना वह ऐसी मिसाल कायम करेगी, जिससे उसके अधिकारों का क्षरण होगा।’
एशिया टाइम्स के मुताबिक राजनयिकों के लिए यह समझना मुश्किल बना हुआ है कि इंडोनेशिया ने चुप्पी क्यो साध रखी है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि इंडोनेशियाई सेना के हमेशा ही अमेरिका के साथ करीबी संबंध रहे हैं। इस साल अप्रैल में जब बाली में इंडोनेशिया की पनडुब्बी केआरआई नांगाला-402 डूब गई, उस समय चीन ने उसे बचाने में कोई मदद नहीं पहुंचाई थी।
इसके बावजूद इंडोनेशिया के समुद्री मामलों के मंत्री लाहुत पंजायतन ने पिछले हफ्ते अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान चीनी घुसपैठ की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया। पंजायतन की अमेरिका में वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान से मुलाकात हुई थी। उसके बाद एक भाषण में उन्होंने कहा- ‘हमारी चीन के साथ कोई समस्या नहीं है। कुछ क्षेत्रों को लेकर हमारे मतभेद हैं, लेकिन मेरी राय में हम उन्हें संभालने में सक्षम हैं।’