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Naval Power: क्या अब चीन की नौसैनिक ताकत अब अमेरिका से भी ज्यादा है? अमेरिकी अधिकारी का सनसनीखेज खुलासा

Fri, 24 Feb 2023 04:07 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 24 Feb 2023 04:07 PM IST
सार

Naval Power: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने पिछले साल अपनी नौसेना संबंधी योजना का दस्तावेज जारी किया था। उसके मुताबिक पेंटागन का मकसद अमेरिकी नौ सेना को साल 2045 तक 350 लड़ाकू जहाज उपलब्ध कराने का है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ये संख्या चीन से काफी कम पड़ेगी...

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Is China naval power now more than US? official Navy official revealed
Naval Power: China - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौ सेना ने यह कह कर पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है कि नौ सैनिक ताकत में चीन अमेरिका पर बढ़त हासिल कर चुका है। चीन के पास अब अमेरिका से अधिक बेड़े हैं और उसने जहाज बनाने के मामले में अमेरिका से अधिक क्षमता प्राप्त कर ली है। अमेरिकी नौसेना का यह आकलन इसी हफ्ते सामने आया है।

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वाशिंगटन स्थित नेशनल प्रेस क्लब में एक बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिका के नौसेना सेक्रेटरी कार्लोस डेल टोरो ने कहा कि चीन लगातार दूसरे देशों की समद्री संप्रभुता का उल्लंघन करने की कोशिश करता है। इससे वह दक्षिण चीन सागर में अमेरिका के सहयोगी देशों के आर्थिक हितों को चोट पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा- चीन ने अब दुनिया भर में अधिक संख्या में बेड़े तैनात कर रहा है। इसके जवाब में अमेरिका को भी अपनी नौसैनिक शक्ति को आधुनिक बनाना चाहिए। टोरो ने कहा कि भविष्य में अमेरिका को अधिक जहाजों की जरूरत पड़ेगी, ताकि वह बढ़ रहे खतरे का मुकाबला कर सके।

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विश्लेषकों के मुताबिक टोरो के इस बयान से अमेरिकी रणनीतिकारों के कान खड़े हो गए हैं। टोरो ने दोनों देशों की नौ सेना के पास मौजूद क्षमताओं का तुलनात्मक विवरण भी दिया। इसके मुताबिक चीन आने वाले वर्षों में लगभग चार सौ लड़ाकू जहाजों को तैनात करने की स्थिति में होगा, जबकि अमेरिका के पास अभी ऐसे 340 जहाज ही हैं।

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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने पिछले साल अपनी नौसेना संबंधी योजना का दस्तावेज जारी किया था। उसके मुताबिक पेंटागन का मकसद अमेरिकी नौ सेना को साल 2045 तक 350 लड़ाकू जहाज उपलब्ध कराने का है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ये संख्या चीन से काफी कम पड़ेगी। अमेरिकी कांग्रेस के बजट कार्यालय ने पिछले नवंबर में अपनी एक रिपोर्ट में ध्यान दिलाया था कि कई अमेरिकी लड़ाकू जहाज पुराने पड़ रहे हैं, जिन्हें रिटायर कराना होगा। उससे अमेरिकी नौ सेना के पास मौजूद जहाजों की संख्या और घट जाएगी।

डेल टोरो के इस बयान यहां चिंता और बढ़ गई है कि अमेरिका चीन की जहाज निर्माण और मरम्मत क्षमता का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं रह गया है। उन्होंने कहा- ‘चीन के पास 13 शिपयार्ड हैं और उनके कुछ शिपयार्ड अधिक क्षमता वाले हैं। उनके एक शिपयार्ड की क्षमता तो हमारे सभी शिपयार्ड्स की साझा क्षमता से ज्यादा है। हमारे सामने यह सबसे बड़ा खतरा है।’

अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर नेशनल डिफेंस की पिछले अक्तूबर में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिका में सात शिपयार्ड ऐसे हैं, जहां नौसेना के लिए बड़े और गहराई तक जा सकने वाले जहाज बनाए जाते हैं। जबकि डेल टोरो ने कहा कि समस्या सिर्फ शिपयार्ड्स की संख्या की नहीं है। बल्कि शिपयार्ड्स में काम करने के लिए कर्मचारियों की जरूरत होती है और इस मामले में चीन को काफी बढ़त हासिल है।

अमेरिकी कांग्रेस की अनुसंधान सेवा ने पिछले नवंबर में बताया था कि अमेरिकी नौ सेना ने चीन के साथ बढ़ी खाई को पाटने के उपाय किए हैं। इसके तहत प्रशांत महासागर में अधिक संख्या में जहाजों की तैनाती गई है और उन्हें अधिक सक्षम भी बनाया गया है।

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