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ईरान बना इस्राइल-बहरीन में समझौते की बड़ी वजह, ट्रंप को अमेरिकी चुनाव में बढ़त की उम्मीद
Sun, 13 Sep 2020 01:14 AM IST
Jeet Kumar
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 13 Sep 2020 01:14 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : twitter
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशों को पश्चिम एशिया में यूएई के बाद बहरीन के साथ इस्राइल के शांति समझौते को अहम बताया जा रहा है। लेकिन एक सच्चाई यह है कि इस समझौते की बड़ी वजह ईरान की नीतियां बनीं जो बहरीन के शासकों को चुनौती दे सकती हैं।
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इसीलिए बहरीन को अमेरिका का साथ देने के लिए मजबूर होना पड़ा। दरअसल, 760 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले बहरीन को ईरानी हमले की आशंका थी। इसी कारण उसने अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य अड्डे को अपने यहां मंजूरी भी दी।
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बहरीन को अब ईरान से सियासी चुनौती थी। चूंकि बहरीन की अधिकांश आबादी (60 फीसदी) शिया है लेकिन यहां पर 1783 से ही सुन्नी अल खलीफा परिवार के लोग शासक रहे हैं।
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इन हालातों में एक बार बहरीन पर कब्जा जमाने में नाकाम रह चुका ईरान अब देश में ईरानी उग्रवादियों को हथियार दे रहा है। ऐसे में ईरान से निपटने के लिए उसे किसी मित्र की जरूरत थी जो वक्त पड़ने पर उसका साथ दे सके। इस्राइल के रूप में बहरीन को ईरान का साझा शत्रु अमेरिका ने सुझाया और उसने हाथ मिलाने में बेहतरी समझी।
ऐतिहासिक सफलता का दिन : ट्रंप
बहरीन-इस्राइल समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, आज एक और ऐतिहासिक सफलता। दोनों देशों के बीच इस डील का ऐलान अमेरिका पर 11 सितंबर को हुए आतंकी हमले के 19 साल पूरे होने के दिन किया गया। ट्रंप एक सप्ताह बाद ही व्हाइट हाउस में यूएई और इस्राइल के बीच समझौते पर दस्तखत के लिए समारोह आयोजित करने जा रहे हैं। बहरीन के विदेश मंत्री भी समारोह में मौजूद रहेंगे।
अमेरिकी चुनाव में बढ़त की उम्मीद
विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति को चुनाव से ठीक पहले एक और सियासी जीत मिली है। इससे वे इस्राइल समर्थकों को अपने पाले में ला सकेंगे। ट्रंप, नेतन्याहू और किंग हमद ने कहा, यह ऐतिहासिक सफलता है जो पश्चिम एशिया में शांति को बढ़ावा देगी। तीनों नेताओं ने कहा, इससे इलाके में स्थिरता, सुरक्षा व समृद्धि बढ़ेगी।