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IRAN: क्या पिता अयातुल्लाह से दो कदम आगे निकल रहे हैं सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई?

Thu, 12 Mar 2026 08:49 PM IST
शशिधर पाठक वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन। Published by: शशिधर पाठक Updated Thu, 12 Mar 2026 08:49 PM IST
सार

क्या ईरान के खिलाफ अमेरिका-इस्राइल की जंग का फायदा रूस और चीन को मिलने वाला है? हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के साये ने आधी दुनिया को सता रखा है। आखिर इसके मायने क्या हैं, जानिए...

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Iran: Is Supreme Leader Mojtaba Khamenei Going Two Steps Beyond His Father
मोजतबा खामेनेई - फोटो : एक्स/ @M_H_Karimipour

विस्तार

पश्चिम जल रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अपने पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई से दो कदम आगे निकल कर दुनिया को आगाह कर रहे हैं। मोजतबा सर्वोच्च नेता बनने के बाद पहली बार संबोधन के लिए सामने आए। दूसरा मोर्चा खोलने और शहादत का बदला लेने की धमकी दे डाली। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर पश्चिम एशिया में उठ रही आग की लपट कितना और धधकेगी?

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भारतीय राजनयिक भी हालात पर नजर बनाए हैं। खुफिया और सुरक्षा से जुड़े पूर्व अधिकारियों का कहना है कि जैसे रूस के रणनीतिकारों से यूक्रेन के आकलन में गलती हो गई थी, उसी तरह से अमेरिका के रणनीतिकार सही आकलन करने में चूक गए। मास्को में विनोद शर्मा हैं। लंबे समय से भारत रूस संबंध, आयात-निर्यात में भूमिका निभाते हैं। विनोद शर्मा का कहना है कि यहां सवाल रणनीतिक तैयारी का है। साफ दिखाई दे रहा है कि ईरान का होमवर्क काफी बड़ा है। 
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पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि मध्य एशिया में फैली अशांति ने मानो चीन और रूस की मुंह मांगी मुराद पूरी कर दी हो। दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को इससे बड़ा फायदा होगा। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच में टकराव से रूस का जहां पश्चिम एशिया में प्रभाव बने रहने का संकेत मिल रहा है, वहीं चीन की ऊर्जा सुरक्षा की चिंता भी खत्म हो जाने के आसार हैं, जबकि अमेरिका के लिए थोड़ा मुश्किल समय खड़ा हो गया है।
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क्या रूस से ज्यादा अमेरिका फंस गया?
रूस 2022 से यूक्रेन से युद्ध लड़ रहा है, लेकिन रणनीतिकारों का मानना है कि रूस से ज्यादा इस समय इस्राइल और अमेरिका के सामने भू-राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। पहले अमेरिका रूस को यूक्रेन के साथ शांति समझौते के लिए बातचीत की टेबल पर आने की अपील कर रहा था। अब यही अपील रूस अमेरिका से कर रहा है। 

शाश्वत कुमार अर्थ शास्त्री हैं। उन्हें ईरान के साथ युद्ध लंबा खिंचने में अमेरिका में आर्थिक मंदी आने की भी संभावना दिखाई दे रही है। शाश्वत कहते हैं कि यूरोपीय देश भी स्थिति को लेकर चिंतित हैं, लेकिन अभी किसी के पास समस्या के समाधान का कोई ठोस उपाय नहीं है। रक्षा मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि अमेरिका के पास तबाही के सभी घातक हथियार हैं, लेकिन केवल इससे काम नहीं काम नहीं चलेगा। ईरान के साथ युद्ध भी उसके लिए बहुत खर्चीला (हर रोज दो अरब डालर के करीब की लड़ाई) पड़ रहा है। अमेरिका के सामने एक पेचीदा स्थिति है। वह ईरान में बड़े हमले कर सकता है, लेकिन महाविनाश के हथियार का उपयोग करने में बड़ा संकट है। अब खाड़ी के देशों के लिए भी यह लड़ाई कठिन होती जा रही है। अब वह अमरिका का साथ देने में खुला संकोच करने लगे हैं।

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ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ने क्या किया?
मोजतबा खामेनेई को अपने पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई से अधिक सख्त माना जाता है। अमेरिका और इस्राइल के हमले में मोजतबा ने न केवल अपने पिता, मां, बहन को खोया, बल्कि अपने निजी परिवार को भी खो दिया। इसमें ईरान की फ्रंट लाइन लीडरशिप भी मारी गई। मोजतबा इसे शहादत मानते हैं और शहादत का बदला लेने का आत्मबल दिखा रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी शांति के लिए तीन बड़ी शर्ते रख दी हैं। शर्तें मानना एक तरह से अमेरिका और इस्राइल की हार जैसा होगा। मोजतबा ने साफ किया कि ईरान अमेरिका के सैन्य अड्डे समेत अन्य पर हमला करता रहेगा। ईरान दूसरा मोर्चा भी खोल सकता है। ईरान स्टेट आफ होर्मुज के रूट को बंद रखेगा।

इसमें रूस और चीन का रोल क्या है?
रूस और चीन ईरान के सहयोगी देश हैं। रूस के साथ ईरान का रक्षा करार है। हथियारों के आयात-निर्यात की सहमति, समझौता है। चीन के साथ ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, खुफिया एवं सुरक्षा सूचना साझेदारी की सहमति है। ईरान ने रूस का यूक्रेन से युद्ध के गंभीर समय में सहयोग किया था। रूस ईरान के साथ भी मर्यादा को खुलकर निभा रहा है। माना जाता है कि ईरान की घातक मिसाइलों में रूस की छाप है। चीन का तकनीकी सहयोग है। अमेरिका ने भी रूस पर ईरान को गोपनीय सूचना देने का आरोप लगाया है।

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