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चाबहार रेलवे परियोजना से बाहर नहीं हुआ भारत, ईरान ने दी सफाई

Thu, 16 Jul 2020 02:17 PM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 16 Jul 2020 02:17 PM IST
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Iran gave clarification on Chabahar Zahedan Railway Project claims no deal with india on it
ईरानी विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

ईरान ने चाबहार-जाहेदान रेलवे परियोजना से भारत को बाहर किए जाने के दावों को खारिज किया है। एक भारतीय समाचारपत्र की रिपोर्ट में भारत को इस परियोजना से बाहर किए जाने के दावे को ईरान ने गलत बताया है। ईरान के बंदरगाहों और समुद्री संगठन के डिप्टी फरहाद मोंतासिर ने बुधवार को अल जजीरा के साथ बातचीत में कहा, 'यह खबर बिल्कुल गलत है क्योंकि ईरान ने भारत के साथ चाबहार-जाहेदान रेलवे परियोजना को लेकर कोई डील नहीं की है।'

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ईरानी न्यूज एजेंसी के अनुसार, मोंतासिर ने कहा, 'ईरान ने भारत के साथ चाबहार में निवेश के लिए बस दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। पहला बंदरगाह की मशीनरी और उपकरणों को लेकर है और दूसरा भारत का यहां 150 मिलियन डॉलर का निवेश है।'
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मोंतासिर ने कहा कि अमेरिका की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधो का चाबहार में ईरान और भारत के संबंधों और सहयोग से कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि 2018 में अमेरिका 2012 के ईरान स्वतंत्रता और प्रति-प्रसार अधिनियम (आईएफसीए) के तहत चाबहार बंदरगाह परियोजनाओं में छूट देने के लिए राजी हो गया था।
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ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने बंदरगाह परियोजना को 'ईरान के आर्थिक भविष्य के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया था।' भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इरकॉन इंटरनेशनल ने इस परियोजना के लिए हर सेवा और फंड देने की बात कही है। जानकारी के अनुसार, कंपनी परियोजना में लगभग 1.6 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी।

चाबहार में हुई उल्लेखनीय प्रगति

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, जहां तक चाबहार बंदरगाह की बात है स्पष्ट है कि 2003 से जारी प्रतिबद्धता को 2016 में पीएम नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान मूर्तरूप दिया गया। 2016 से अब तक प्रतिबंध की तमाम स्थितियों के बावजूद चाबहार बंदरगाह परियोजना में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई।

एक भारतीय कंपनी 2018 से बंदरगाह को संचालित कर रही है और वहां आवाजाही भी बढ़ी है। दिसंबर 2018 के बाद से 82 जहाज वहां से आए। इनमें अकेले 52 जहाज पिछले 12 महीनों में चले। वहां से 12 लाख टन कार्बो और 8200 कंटेनर पहुंचे। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए चाबहार बंदरगाह का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं।

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