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तेहरान का नया फरमान: इंटरनेट खुला लेकिन डिजिटल आजादी अब भी बंद, युद्ध के बीच कैसे ईरान ने मीडिया पर कसा शिकंजा

Thu, 28 May 2026 04:31 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 28 May 2026 04:31 AM IST
सार

ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर नए प्रतिबंध लगाते हुए इस्राइली मीडिया और विदेश स्थित फारसी चैनलों को सामग्री इस्तेमाल करने से रोक दिया है। दूसरी ओर महीनों बाद इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बहाल हुई हैं, लेकिन सोशल मीडिया और कई वेबसाइटों पर अब भी सख्त पाबंदियां जारी हैं। आइए, विस्तार से जानते ईरान के और क्या क्या पाबंदियां लगा रखी है...

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Internet Is Open Yet Digital Freedom Remains Curtailed How Iran Tightened Grip on Media Amidst Conflict
ईरान में सोशल मीडिया पर फिर बढ़ी सेंसरशिप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ईरान में अमेरिका और इस्राइल के साथ जारी तनाव के बीच अब सूचना और इंटरनेट पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है। ईरानी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए नए नियम लागू करते हुए साफ कर दिया है कि उनके फोटो, वीडियो और रिपोर्ट का इस्तेमाल इस्राइली मीडिया या विदेशों में चल रहे फारसी चैनल नहीं कर सकेंगे। दूसरी तरफ महीनों बाद इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बहाल तो हुई हैं, लेकिन आम लोगों को अब भी धीमी स्पीड, भारी सेंसरशिप और सोशल मीडिया प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि युद्ध और राजनीतिक तनाव के बीच ईरान सूचना पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर रहा है।
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क्या हैं ईरान के नए मीडिया प्रतिबंध?
ईरान के संस्कृति और इस्लामिक मार्गदर्शन मंत्रालय ने तेहरान में काम कर रहे कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों को नया निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि ईरान से भेजी जाने वाली हर फोटो, वीडियो, रिपोर्ट और मीडिया सामग्री के साथ यह चेतावनी लिखना जरूरी होगा कि उसका इस्तेमाल इस्राइली मीडिया या ईरान के बाहर चलने वाले फारसी टीवी चैनल नहीं कर सकते। ईरान पहले से ही बीबीसी फारसी, वीओए फारसी, मनोटो टीवी और ईरान इंटरनेशनल जैसे चैनलों पर सख्त रोक लगाए हुए है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्ध की स्थिति को देखते हुए यह कदम जरूरी है।
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इंटरनेट बहाल हुआ, लेकिन क्या सच में सामान्य हुई स्थिति?
ईरान में जनवरी से शुरू हुआ इंटरनेट प्रतिबंध दुनिया के सबसे लंबे राष्ट्रीय इंटरनेट शटडाउन में से एक माना जा रहा है। अब सरकार ने कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं बहाल की हैं, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कई लोगों ने शिकायत की कि इंटरनेट बेहद धीमा चल रहा है और यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर भारी पाबंदियां बनी हुई हैं। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्थाओं के अनुसार ईरान की इंटरनेट क्षमता अभी भी पहले की तुलना में काफी कम है। डेटा ट्रैफिक भी सामान्य स्तर तक नहीं पहुंचा है। लोगों को डर है कि सरकार कभी भी दोबारा इंटरनेट बंद कर सकती है।

आम लोगों और कारोबार पर कितना पड़ा असर?
लंबे इंटरनेट शटडाउन ने ईरान की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला है। ऑनलाइन काम करने वाले लाखों लोगों की कमाई लगभग बंद हो गई। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, गेमर, छोटे कारोबारी और डिजिटल सेवाओं से जुड़े लोग आर्थिक संकट में पहुंच गए। कई लोगों को अपना सामान बेचना पड़ा या दूसरे काम तलाशने पड़े। इंटरनेट बंद होने से परिवारों का संपर्क भी टूट गया। विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों से महीनों तक बात नहीं हो सकी। सरकार की पाबंदियों के दौरान वीपीएन की कीमतें भी कई गुना बढ़ गई थीं, जिससे आम लोग खुले इंटरनेट तक पहुंच नहीं बना सके।


क्या युद्ध और राजनीति के कारण बढ़ा डिजिटल नियंत्रण?
ईरानी सरकार ने इंटरनेट बंदी और मीडिया नियंत्रण को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर सही ठहराया। अधिकारियों का कहना था कि अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद सैन्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह जरूरी था। हालांकि आलोचकों का आरोप है कि सरकार असहमति और विरोध की आवाज दबाने के लिए डिजिटल नियंत्रण का इस्तेमाल कर रही है। जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी इंटरनेट बंद किया गया था। उस समय हजारों लोगों की गिरफ्तारी और हिंसक कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। अब युद्ध और राजनीतिक तनाव के माहौल में सरकार सूचना के हर माध्यम पर कड़ी नजर रख रही है।

क्या ईरान में डिजिटल आजादी और सिमट जाएगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान आने वाले समय में इंटरनेट और मीडिया पर और कड़ा नियंत्रण लागू कर सकता है। सरकार पहले ही राष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क को बढ़ावा दे रही है, जिसमें लोगों को सीमित वेबसाइटों और सेवाओं तक ही पहुंच मिलती है। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों और खास वर्गों को अलग सिम कार्ड देकर वैश्विक इंटरनेट एक्सेस उपलब्ध कराया जा रहा है। दूसरी ओर आम नागरिक अब भी सेंसरशिप और निगरानी के बीच जी रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, होर्मुज क्षेत्र का तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच ईरान की डिजिटल नीति आने वाले दिनों में और ज्यादा सख्त हो सकती है।
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