तोक्यो ओलंपिक: आईओसी अध्यक्ष के ‘शांति मिशन’ से छिड़ा जापान में विवाद, नोबल पुरस्कार की है चाहत
आलोचकों का कहना है कि ओलंपिक इंतजामों पर ध्यान देने के बजाय बाक ने इस यात्रा का कार्यक्रम बना कर एक पब्लिसिटी स्टंट किया है। हिरोशिमा में परमाणु हथियारों विरोधी संगठन हिरोशिया कांग्रेस ने एक बयान में कहा- ‘बाक तोक्यो से बाहर गए जहां आपातकाल लगा हुआ है...
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अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक के शुक्रवार को जापानी शहर हिरोशिमा का दौरा करने के फैसले से जापान में एक विवाद खड़ा हो गया है। घोषित तौर पर यह बताया गया कि बाक ने शांति का संदेश देने के लिए हिरोशिमा जाने की योजना बनाई। गौरतलब है कि हिरोशिमा ही दुनिया का पहला स्थान था, जहां दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने परमाणु बम गिराया था। लेकिन बाक की यात्रा के सिलसिले में आईओसी के दावे पर जापानी मीडिया में यकीन नहीं किया गया। उनकी यात्रा के मकसद को लेकर यहां कई कयास लगाए गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि तोक्यो जहां कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट बना हुआ है, वहीं हिरोशिमा में इस महामारी का ज्यादा असर नहीं है। आलोचकों का कहना है कि ओलंपिक इंतजामों पर ध्यान देने के बजाय बाक ने इस यात्रा का कार्यक्रम बना कर एक पब्लिसिटी स्टंट किया है। हिरोशिमा में परमाणु हथियारों विरोधी संगठन हिरोशिया कांग्रेस ने एक बयान में कहा- ‘बाक तोक्यो से बाहर गए जहां आपातकाल लगा हुआ है। उनकी हिरोशिमा यात्रा को बहुत से लोग सीधे तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे। बेशक इसे सियासी मकसद से की गई यात्रा समझा जाएगा।’
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में थॉमस बाक की जैसी विवादित गतिविधियां रही हैं, उससे भी उनकी हिरोशिमा यात्रा को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। बीते मंगलवार को उन्होंने भूलवश जापान की जनता का जिक्र चीन की जनता कह कर किया। इसको लेकर सोशल मीडिया में तूफान खड़ा हो गया, जबकि मुख्यधारा के मीडिया में भी उसकी खूब चर्चा हुई। जापान में स्थिति यह है कि बाक जहां भी गए हैं, वहां उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का आयोजन हुआ है।
पैसिफिक यूनिवर्सिटी में राजनीति और शासन के प्रोफेसर जुलेस बायकॉफ ने तोक्यो के अखबार जापान टाइम्स से कहा- ‘अब यह साफ है कि इस समय किसी को जीत की जरूरत है, तो वह खुद ओलंपिक है।’ यहां कयास लगाए गए हैं कि आईओसी अध्यक्ष ने एक खास मकसद से शांति यात्रा पर हिरोशिमा जाने का फैसला किया। हिरोशिया में बाक की यात्रा का विरोध करने वाले एक संगठन के कार्यकर्ता नारोकी कुनो ने जापान टाइम्स से कहा- ‘बाक की यात्रा का मकसद नोबेल पुरस्कार के लिए लॉबिंग करना है।’
इस सिलसिले में ये ध्यान दिलाया गया है कि हाल में आईओसी कई तरह के सवालों से घिरी रही है। ओलंपिक खेल आयोजन विरोधी आंदोलन दुनिया के कई हिस्सों में चला है। इसके बावजूद आईओसी ने स्थानीय लोगों की भावनाओं पर ध्यान नहीं दिया। कोरोना महामारी के बावजूद तोक्यो में खेलों का आयोजन कराने पर वह जिस तरह अड़ी रही, उससे भी उसकी छवि खराब हुई है। आलोचकों ने कहा है कि इसीलिए बाक ने शांति की सियासत करने का फैसला किया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आईओसी ने हर बार ऐसे सवालों को टाल दिया है कि क्या वह बाक का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की योजना बना रही है। इस सिलसिले में बाक के पिछले अक्तूबर में दिए एक भाषण का जिक्र किया गया है, जो उन्होंने सिओल शांति पुरस्कार को स्वीकार करते हुए दिया था। तब उन्होंने कहा था- ‘जब कुर्बतिन ने 1894 में पेरिस स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सोरबॉन में आईओसी की स्थापना की, तब उस मौके पर 13 ऐसे लोग मौजूद थे, जो सबसे पहले नोबेल पुरस्कार पाने वालों में शामिल हुए। उससे यह साबित होता है कि आईओसी के नजर में खेल और शांति एक दूसरे से जुड़े हुए पहलू हैं।’ यहां पूछा जा रहा है कि क्या अब बाक भी महामारी के बीच हो रहे तोक्यो ओलंपिक का इस्तेमाल उस सूची में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए कर रहे हैं?