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Pahalgam Attack: मेलबर्न में पहलगाम हमले के विरोध में उतरे भारतीय, 'पाकिस्तान आतंकवाद बंद करो' के लगे नारे
Sat, 26 Apr 2025 02:35 PM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
Published by: बशु जैन
Updated Sat, 26 Apr 2025 02:35 PM IST
सार
मेलबर्न, लंदन, काठमांडू समेत तमाम जगहों पर भारतीय समुदाय पहलगाम हमले के विरोध में सड़क पर उतर आया है। दर्शनकारियों ने निर्दोष लोगों की मौत पर दुख जताया। साथ ही पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए और ऐसे हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकी समूहों को समर्थन और पनाह देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की।
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मेलबर्न में पहलगाम हमले का विरोध करते भारतीय।
- फोटो : ANI
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विस्तार
पहलगाम आतंकी हमले को लेकर देश ही नहीं दुनिया भर के भारतीयों में भी आक्रोश है। मेलबर्न, लंदन, काठमांडू समेत तमाम जगहों पर भारतीय समुदाय पहलगाम हमले के विरोध में सड़क पर उतर आया है। मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर पर शनिवार को भारतीय समुदाय के हजारों लोगों ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी ने हाथों में तख्तियां पकड़ रखी थीं। उन्होंने पाकिस्तान आतंकवाद बंद करो, पाकिस्तान सेना आतंकी सेना और हिंदुओं का जीवन मायने रखता है जैसे नारे लगाए। उधर, काठमांडू में भी लोगों ने पाकिस्तान दूतावास के पास विरोध प्रदर्शन किया।
इसके अलावा लंदन में भी पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर भारतीय समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया। लोगों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने निर्दोष लोगों की मौत पर दुख जताया। साथ ही पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए और ऐसे हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकी समूहों को समर्थन और पनाह देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की।
ये भी पढ़ें: पाकिस्तानियों की एक और बेशर्मी भरी करतूत, भारतीय प्रदर्शनकारियों को किया गला काटने का इशारा
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भारतीय समुदाय ने मांग की कि ब्रिटेन सरकार पाकिस्तान के उच्चायुक्त को आधिकारिक स्पष्टीकरण के लिए बुलाए। पाकिस्तान को सार्वजनिक रूप से हत्याओं की निंदा करनी चाहिए और आतंकवाद के समर्थन को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। साथ ही अपराधियों और उनकी फंडिंग करने वालों को न्याय के दायरे में लाने के लिए कूटनीतिक दबाव डालना चाहिए।
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इसके अलावा लंदन में भी पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर भारतीय समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया। लोगों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने निर्दोष लोगों की मौत पर दुख जताया। साथ ही पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए और ऐसे हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकी समूहों को समर्थन और पनाह देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की।
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भारतीय समुदाय ने मांग की कि ब्रिटेन सरकार पाकिस्तान के उच्चायुक्त को आधिकारिक स्पष्टीकरण के लिए बुलाए। पाकिस्तान को सार्वजनिक रूप से हत्याओं की निंदा करनी चाहिए और आतंकवाद के समर्थन को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। साथ ही अपराधियों और उनकी फंडिंग करने वालों को न्याय के दायरे में लाने के लिए कूटनीतिक दबाव डालना चाहिए।
पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन।
- फोटो : ANI
कब और कहां हुई आतंकी वारदात
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम शहर के निकट ‘मिनी स्विटरलैंड’ नाम से मशहूर पर्यटन स्थल पर मंगलवार दोपहर हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक हैं। यह 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद घाटी में हुआ सबसे घातक हमला है। एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि 26 मृतकों में दो विदेशी और दो स्थानीय निवासी हैं। हथियारबंद आतंकवादी 'मिनी स्विट्जरलैंड' में घुस आए और भोजनालयों के आसपास घूम रहे, खच्चर की सवारी कर रहे, पिकनिक मना रहे पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। पाकिस्तान में स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
ये भी पढ़ें: एलओसी पर रातभर गोलीबारी, पाक चौकियों से फायरिंग; सेना ने दिया मुंहतोड़ जवाब
भारत ने लिए थे पांच कड़े फैसले
पहलगाम हमले के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम को नई दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक हुई और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 1960 की सिंधु जल संधि पर रोक लगाने, अटारी में एकीकृत जांच चौकी को तत्काल प्रभाव से बंद करने का भी फैसला किया। यह घोषणा की गई कि दक्षेस वीजा छूट योजना (एसवीईएस) के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और पाकिस्तानी नागरिकों को अतीत में जारी किए गए ऐसे किसी भी वीजा को रद्द माना जाएगा।
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम शहर के निकट ‘मिनी स्विटरलैंड’ नाम से मशहूर पर्यटन स्थल पर मंगलवार दोपहर हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक हैं। यह 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद घाटी में हुआ सबसे घातक हमला है। एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि 26 मृतकों में दो विदेशी और दो स्थानीय निवासी हैं। हथियारबंद आतंकवादी 'मिनी स्विट्जरलैंड' में घुस आए और भोजनालयों के आसपास घूम रहे, खच्चर की सवारी कर रहे, पिकनिक मना रहे पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। पाकिस्तान में स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
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भारत ने लिए थे पांच कड़े फैसले
पहलगाम हमले के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम को नई दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक हुई और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 1960 की सिंधु जल संधि पर रोक लगाने, अटारी में एकीकृत जांच चौकी को तत्काल प्रभाव से बंद करने का भी फैसला किया। यह घोषणा की गई कि दक्षेस वीजा छूट योजना (एसवीईएस) के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और पाकिस्तानी नागरिकों को अतीत में जारी किए गए ऐसे किसी भी वीजा को रद्द माना जाएगा।
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