{"_id":"6507af44198410cc650c3816","slug":"indian-traditional-knowledge-yoga-providing-peace-and-strength-to-people-of-ukraine-after-amid-heavy-bombing-2023-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yoga: योग की शरण में यूक्रेनी, भारी बमबारी के बीच लोगों को शांति-संबल प्रदान कर रही भारतीय पारंपरिक विद्या","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Yoga: योग की शरण में यूक्रेनी, भारी बमबारी के बीच लोगों को शांति-संबल प्रदान कर रही भारतीय पारंपरिक विद्या
Mon, 18 Sep 2023 07:30 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कीव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कीव
Published by: जलज मिश्रा
Updated Mon, 18 Sep 2023 07:30 AM IST
सार
योग प्रशिक्षक जालोजनी बताते हैं कि युद्ध की शुरुआत में लोगों ने शहर छोड़ना शुरू कर दिया था। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन योग कक्षा चलानी पड़ती थी। हालांकि, बाद में लोग घरों को लौटने लगे और योग कक्षा फिर से गुलजार हो गई।
विज्ञापन
योग।
- फोटो : istock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रूस की तरफ से लगातार की जा रही बमबारी के कारण यूक्रेन के लोग जानमाल के नुकसान के साथ-साथ भारी मानसिक तनाव का भी सामना कर रहे हैं। युद्ध से पैदा हुए इस तनाव को दूर करने के लिए यूक्रेन के अग्रिम शहरों में रह रहे लोग भारतीय योग पद्धति का सहारा लेने लगे हैं। डोनेस्क क्षेत्र के क्रामटोरस्क शहर में लोग हफ्ते में तीन दिन सुबह-सुबह योगाभ्यास के लिए इकट्ठा होते हैं। आर्द्र हवा व मधुर संगीत के बीच तहखाने में होने वाला योगाभ्यास तनाव दूर करने में मददगार साबित हो रहा है।
52 वर्षीय योग प्रशिक्षक सेरही जालोजनी शांत स्वर में कहते हैं, बाहरी दुनिया को त्याग दें। इसके बाद वह धीरे-धीरे लोगों को ध्यान की स्थिति में ले जाते हैं। कभी-कभी, बहुमंजिला इमारत के पाइपों के माध्यम से बहते पानी की आवाज संगीत को बाधित करती है और याद दिलाती है कि योग सत्र बेसमेंट में चल रहा है। जालोजनी कहते हैं, अपने दिलो-दिमाग में शांति, तसल्ली व संतुलन महसूस करें...। योगाभ्यास में शामिल लोगों की बाहरी दुनिया काफी अशांत है, जहां कुछ घंटे बाद होने वाला धमाका उनके जीवन को अशांत कर देता है। जालोजनी कहते हैं, युद्ध ने लोगों को व्याकुल कर दिया है। यहां उन्हें शांति मिली। योगाभ्यास करने वालों में विक्टोरिया ओमेलचेंको (47) शामिल हैं, जिन्होंने क्रामटोरस्क छोड़ दिया था। हालांकि, कुछ महीनों बाद वह लौट आईं।
युद्ध शुरू हुआ तो शहर छोड़ा, योग नहीं
योग प्रशिक्षक जालोजनी बताते हैं कि युद्ध की शुरुआत में लोगों ने शहर छोड़ना शुरू कर दिया था। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन योग कक्षा चलानी पड़ती थी। हालांकि, बाद में लोग घरों को लौटने लगे और योग कक्षा फिर से गुलजार हो गई। हालांकि, उन्हें योग कक्षा जिम के बजाय ब्यूटी सैलून में लगानी पड़ी। इस योग स्टूडियो की दीवारों पर ब्यूटी सैलून की पुरानी तस्वीरें अब भी दिख जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
52 वर्षीय योग प्रशिक्षक सेरही जालोजनी शांत स्वर में कहते हैं, बाहरी दुनिया को त्याग दें। इसके बाद वह धीरे-धीरे लोगों को ध्यान की स्थिति में ले जाते हैं। कभी-कभी, बहुमंजिला इमारत के पाइपों के माध्यम से बहते पानी की आवाज संगीत को बाधित करती है और याद दिलाती है कि योग सत्र बेसमेंट में चल रहा है। जालोजनी कहते हैं, अपने दिलो-दिमाग में शांति, तसल्ली व संतुलन महसूस करें...। योगाभ्यास में शामिल लोगों की बाहरी दुनिया काफी अशांत है, जहां कुछ घंटे बाद होने वाला धमाका उनके जीवन को अशांत कर देता है। जालोजनी कहते हैं, युद्ध ने लोगों को व्याकुल कर दिया है। यहां उन्हें शांति मिली। योगाभ्यास करने वालों में विक्टोरिया ओमेलचेंको (47) शामिल हैं, जिन्होंने क्रामटोरस्क छोड़ दिया था। हालांकि, कुछ महीनों बाद वह लौट आईं।
विज्ञापन
युद्ध शुरू हुआ तो शहर छोड़ा, योग नहीं
योग प्रशिक्षक जालोजनी बताते हैं कि युद्ध की शुरुआत में लोगों ने शहर छोड़ना शुरू कर दिया था। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन योग कक्षा चलानी पड़ती थी। हालांकि, बाद में लोग घरों को लौटने लगे और योग कक्षा फिर से गुलजार हो गई। हालांकि, उन्हें योग कक्षा जिम के बजाय ब्यूटी सैलून में लगानी पड़ी। इस योग स्टूडियो की दीवारों पर ब्यूटी सैलून की पुरानी तस्वीरें अब भी दिख जाती हैं।
विज्ञापन