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UK: बुजुर्गों की देखभाल में लगे कर्मियों का शोषण, भारतीय मूल के खुफिया पत्रकार का दावा; रिपोर्ट में कही यह बात
Mon, 18 Dec 2023 06:11 PM IST
आदर्श शर्मा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, लंदन
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Mon, 18 Dec 2023 06:11 PM IST
सार
भारतीय मूल के खुफिया पत्रकार की एक रिपोर्ट ने ब्रिटेन में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया कि ब्रिटेन में बुजुर्गों की सेवा में लगे कर्मियों का शोषण हो रहा है। जानिए दावे में उन्होंने क्या कहा....
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विस्तार
ब्रिटेन से जुड़े खबर को लेकर एक खुफिया पत्रकार के दावे ने दुनियाभर के लोगों को हैरान कर दिया है। मानवाधिकार का हितैषी कहे जाने वाला ब्रिटेन में ही मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। खुफिया पत्रकार द्वारा दावे में कहा गया कि उत्तर-पूर्व इंग्लैंड में बुजुर्गों के लिए एक देखभाल गृह बनाया गया है, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। भारतीय मूल के खुफिया पत्रकार ने दावा किया कि यहां बुजुर्गों के देखभाल में लगे कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, जो एक चिंता का विषय है।
साथ ही पत्रकार ने दावा किया कि इनमें कई कर्मचारी विदेश से भर्ती किए गए हैं। साथ ही दावा किया गया कि देखभाल में लगे कर्मचारियों से एक भारतीय भर्ती एजेंसी द्वारा हजारों पाउंड का शुल्क लिया जाता है। अगर वहां मौजूद नर्स छोड़ने की कोशिश करती है तो उन पर वित्तीय दंड लगा दिया जाता है, साथ ही अनुबंध की शर्तों को पूरा न करने का हवाला दिया जाता है।
पिछले साल के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, स्वास्थ्य और देखभाल उद्योग में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए ब्रिटेन आने के लिए विदेशी श्रमिकों को एक लाख से अधिक वीजा जारी किए गए थे, इनमें से 39 हजार वीजा भारत के लोगों के पास गए थे। दावा करने वाले पत्रकार बालगोपाल ने एक बयान में कहा, जैसे-जैसे मैं विदेशी देखभालकर्ताओं के जीवन में गहराई से उतरा, मैंने शोषण, कर्ज, परिवार से अलगाव और गलतियां करने के लगातार डर की कहानी सुनी हैं।
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साथ ही उन्होंने कहा कि स्थायी वीजा लेना एक कठिन काम बन गया है, जिससे देखभाल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जिन लोगों को देखभाल का काम सौंपा गया है, वे वहां शोषण का सामना कर रहे हैं। यहां तक कि वहां मौजूद कर्मियों को अन्य नौकरी में जाने के लिए प्रतिबंधित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह शोषण की एक पराकाष्ठा है।
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साथ ही पत्रकार ने दावा किया कि इनमें कई कर्मचारी विदेश से भर्ती किए गए हैं। साथ ही दावा किया गया कि देखभाल में लगे कर्मचारियों से एक भारतीय भर्ती एजेंसी द्वारा हजारों पाउंड का शुल्क लिया जाता है। अगर वहां मौजूद नर्स छोड़ने की कोशिश करती है तो उन पर वित्तीय दंड लगा दिया जाता है, साथ ही अनुबंध की शर्तों को पूरा न करने का हवाला दिया जाता है।
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पिछले साल के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, स्वास्थ्य और देखभाल उद्योग में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए ब्रिटेन आने के लिए विदेशी श्रमिकों को एक लाख से अधिक वीजा जारी किए गए थे, इनमें से 39 हजार वीजा भारत के लोगों के पास गए थे। दावा करने वाले पत्रकार बालगोपाल ने एक बयान में कहा, जैसे-जैसे मैं विदेशी देखभालकर्ताओं के जीवन में गहराई से उतरा, मैंने शोषण, कर्ज, परिवार से अलगाव और गलतियां करने के लगातार डर की कहानी सुनी हैं।
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साथ ही उन्होंने कहा कि स्थायी वीजा लेना एक कठिन काम बन गया है, जिससे देखभाल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जिन लोगों को देखभाल का काम सौंपा गया है, वे वहां शोषण का सामना कर रहे हैं। यहां तक कि वहां मौजूद कर्मियों को अन्य नौकरी में जाने के लिए प्रतिबंधित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह शोषण की एक पराकाष्ठा है।