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कोरोना वैक्सीन बनाने वाली टीम में शामिल भारतीय मूल की वैज्ञानिक चंद्रबली दत्ता
Sun, 31 May 2020 09:51 AM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, लंदन
पीटीआई, लंदन
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sun, 31 May 2020 09:51 AM IST
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Chandrabali Datta
- फोटो : LinkedIn
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कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन खोजने की परियोजना पर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के पेशेवरों की एक टीम का हिस्सा भारतीय मूल की एक वैज्ञानिक का कहना है कि वह इस मानवतावादी कार्य से जुड़ कर सम्मानित महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दुनियाभर की आशाएं इस वैक्सीन के परिणाम से जुड़ी हुई हैं।
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कोलकाता में पैदा हुई चंद्रबली दत्ता विश्वविद्यालय के जेनर इंस्टीट्यूट में क्लीनिकल बायोमेनोफेक्चरिंग फैसिलिटी में कार्य करती हैं। यहां 'सीएचएडीओएक्स1 एनसीओवी-19' (ChAdOx1 nCoV-19) नामक वैक्सीन के मानव परीक्षणों के द्वितीय और तृतीय चरण का परीक्षण किया जा रहा है। इस वैक्सीन को खतरनाक वायरस से लड़ने के लिए एक संभावित हथियार के रूप में देखा जा रहा है।
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34 वर्षीय दत्ता यहां गुणवत्ता आश्वासन प्रबंधक के रूप में कार्य करती हैं। इनका काम यह सुनिश्चित करना है कि वैक्सीन के परीक्षण चरण में आगे बढ़ने से पहले अनुपालन के सभी स्तर सुनिश्चित किए जाएं।
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दत्ता ने कहा कि हम सभी लोग आशा कर रहे हैं कि यह अगले चरण पर सही ढंग से काम करे। पूरी दुनिया की निगाहें इस वैक्सीन पर टिकी हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से जुड़ना मानवतावादी कार्य से जुड़ने जैसा है। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं और इस वैक्सीन को सफल बनाने के लिए हर रोज घंटों मेहनत करते हैं ताकि मानव जीवन को बचाया जा सके।
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वैज्ञानिक ने कहा कि यह टीम का एक बड़ा प्रयास है और सभी ने इसकी सफलता के लिए चौबीसों घंटे काम किया है। मैं इस परियोजना का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रही हूं।
वैक्सीन के उत्पादन में लगी दत्ता की 25 विशेषज्ञों वाली टीम बेहतर ढंग से लिंग संतुलित हैं। दत्ता भारत में युवा लड़कियों को बायोसाइंस के क्षेत्र में कथित पुरुष प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उत्सुक हैं।
उन्होंने कहा कि यदि आप इस काम को करने के लिए प्रेरित हैं और आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार हैं तो यह आपकी फील्ड है। आजकल, बायोटेक और फार्मा के फील्ड में एक समान पुरुष-महिला अनुपात मिल रहा है, इसलिए बहुत सारे अवसर हैं।