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US: भारतीय राजदूत ने अमेरिकी सांसदों के साथ की बैठक, द्विपक्षीय व्यापार और यूक्रेन संकट पर हुई चर्चा
Sat, 13 Sep 2025 09:58 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 13 Sep 2025 09:58 PM IST
सार
US: अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कई अमेरिकी सांसदों से मुलाकात कर भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने यूक्रेन युद्ध को बातचीत और कूटनीति के जरिए हल करने की भारत की नीति को दोहराया। इस दौरान उन्होंने भारत-चीन संबंधों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी और रूस से तेल खरीद को लेकर भारत के पक्ष को भी स्पष्ट किया।
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विनय मोहन क्वात्रा
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कई प्रमुख अमेरिकी सांसदों के साथ दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने के भारत के रुख को दोहराया।
क्वात्रा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, मैंने सीनेटर जेम्स मॉयलन को भारत-अमेरिकी व्यापार साझेदारी और उर्जा सहयोग से जुड़ी हालिया जानकारी दी। उन्होंने कहा, हमने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा हितों पर भी चर्चा की और यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद व कूटनीति के जरिए हल निकालने के भारत के समर्थन को दोहराया।
ये भी पढ़ें: अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी को सता रहा जासूसी का डर, चीनी नागरिकों को सभी परियोजनाओं से हटाया
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क्वात्रा ने अमेरिकी सांसद ग्रेग स्ट्यूबे से भी मुलाकात की और उन्हें व्यापार और उर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग पर जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए हर उस प्रयास का समर्थन करता है, जो संवाद और कूटनीति पर आधारित हो। राजदूत क्वात्रा ने सीनेटर यंग किम से भी चर्चा की, जो अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति की पूर्वी एशिया और प्रशांत उपसमिति की अध्यक्ष हैं।
उन्होंने कहा, मैंने भारत-चीन संबंधों को लेकर भारत का सही दृष्टिकोण साझा किया। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारी साझा प्राथमिकताओं और क्षेत्र में मिलकर काम करने के अवसरों पर भी चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब भारत व अमेरिका के संबंधों में कुछ तनाव दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए गए हैं, जिनमें से 25 फीसदी रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर हैं।
ये भी पढ़ें: 'रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए एकजुट होकर चीन पर लगाएं 50 से 100% टैरिफ', ट्रंप का नाटो देशों को पत्र
ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत रूसी तेल खरीदकर वॉर मशीन को ईंधन देने का काम कर रहा है। इन अधिकारियों में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार सलाहकार पीटर नवारो भी शामिल हैं। भारत ने अपने रुख का बचाव करते हुए कई बार स्पष्ट किया है कि उसकी उर्जा से जुड़ी खरीददारी पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और बाजार की जरूरतों के आधार पर है।
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क्वात्रा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, मैंने सीनेटर जेम्स मॉयलन को भारत-अमेरिकी व्यापार साझेदारी और उर्जा सहयोग से जुड़ी हालिया जानकारी दी। उन्होंने कहा, हमने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा हितों पर भी चर्चा की और यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद व कूटनीति के जरिए हल निकालने के भारत के समर्थन को दोहराया।
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क्वात्रा ने अमेरिकी सांसद ग्रेग स्ट्यूबे से भी मुलाकात की और उन्हें व्यापार और उर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग पर जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए हर उस प्रयास का समर्थन करता है, जो संवाद और कूटनीति पर आधारित हो। राजदूत क्वात्रा ने सीनेटर यंग किम से भी चर्चा की, जो अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति की पूर्वी एशिया और प्रशांत उपसमिति की अध्यक्ष हैं।
उन्होंने कहा, मैंने भारत-चीन संबंधों को लेकर भारत का सही दृष्टिकोण साझा किया। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारी साझा प्राथमिकताओं और क्षेत्र में मिलकर काम करने के अवसरों पर भी चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब भारत व अमेरिका के संबंधों में कुछ तनाव दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए गए हैं, जिनमें से 25 फीसदी रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर हैं।
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ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत रूसी तेल खरीदकर वॉर मशीन को ईंधन देने का काम कर रहा है। इन अधिकारियों में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार सलाहकार पीटर नवारो भी शामिल हैं। भारत ने अपने रुख का बचाव करते हुए कई बार स्पष्ट किया है कि उसकी उर्जा से जुड़ी खरीददारी पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और बाजार की जरूरतों के आधार पर है।
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