होर्मुज से यूक्रेन तक तनाव के बीच ट्रंप-एर्दोआन की बातचीत, तुर्किये ने समाधान पर दिया जोर; क्या है रणनीति?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोआन ने होर्मुज जलडमरूमध्य, यमन और रूस-यूक्रेन युद्ध पर बातचीत की। एर्दोआन ने कूटनीति के जरिए संघर्षों का समाधान निकालने में सहयोग देने की बात कही। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर भी चर्चा जारी है। क्या तुर्किये इन तनावों को कम कराने में भूमिका निभा पाएगा? क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य, यमन और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। एर्दोआन ने क्षेत्रीय संघर्षों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने के प्रयासों में तुर्किये का समर्थन दोहराया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी हैं। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।
होर्मुज और यमन के मुद्दे पर ट्रंप और एर्दोआन के बीच क्या बात हुई?
तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय के संचार निदेशालय के अनुसार, एर्दोआन और ट्रंप ने क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया। एर्दोआन ने कहा कि तुर्किये होर्मुज जलडमरूमध्य और यमन के घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है। उन्होंने इनसे जुड़े विवादों का समाधान कूटनीति के जरिए निकालने पर जोर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ने से तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना कई देशों के लिए अहम है।
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए तुर्किये क्या करना चाहता है?
एर्दोआन ने रूस और यूक्रेन के बीच रुकी हुई कूटनीतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू कराने में सहयोग देने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि तुर्किये बातचीत के जरिए युद्ध समाप्त करने के प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार है। तुर्किये ने इससे जुड़े प्रयासों में कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, बातचीत के दौरान युद्ध समाप्त करने के लिए किसी नए समझौते या ठोस पहल की घोषणा नहीं की गई। एर्दोआन का संदेश था कि संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए।
अमेरिका और तुर्किये के संबंधों को लेकर क्या चर्चा हुई?
दोनों नेताओं ने अमेरिका और तुर्किये के द्विपक्षीय संबंधों तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी बात की। तुर्किये अगले साल अमेरिका के साथ अपने राजनयिक संबंधों की 100वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है। एर्दोआन ने कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने और सहयोग का दायरा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, ट्रंप ने तुर्किये के गणतंत्र दिवस के अवसर पर एर्दोआन और वहां के लोगों को बधाई दी। उन्होंने आगामी तुर्किक राज्यों के संगठन के शिखर सम्मेलन की सफलता की भी कामना की।
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर क्या घटनाक्रम सामने आया?
यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर भी कूटनीतिक गतिविधियां जारी हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के पूर्व कमांडर मोहसेन रेजाई तक एक पत्र पहुंचाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने की संभावना तलाशना था। हालांकि, ट्रंप ने बाद में इस दावे पर सवाल उठाया कि उन्होंने वेंस को शांति वार्ता शुरू करने का निर्देश दिया था। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यह संपर्क ईरान के लिए चिकित्सा आपूर्ति से जुड़ा था।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कूटनीति की राह कितनी आसान है?
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत में कई चुनौतियां बनी हुई हैं। दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक राहत जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं। दूसरी ओर, ट्रंप ने संभावित सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने की चेतावनी भी दी है। ऐसे माहौल में एर्दोआन की ट्रंप से बातचीत क्षेत्रीय विवादों को कूटनीति के जरिए सुलझाने की तुर्किये की कोशिशों को सामने लाती है। हालांकि, इस बातचीत से होर्मुज, यमन, रूस-यूक्रेन युद्ध या अमेरिका-ईरान तनाव पर किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई है।