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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव: भारतीय मूल के नेताओं ने रचा इतिहास, 30 सीट जीतीं; कई राज्यों में डेमोक्रेट्स को मजबूती
Thu, 05 Nov 2026 08:44 AM IST
शिवम गर्ग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 05 Nov 2026 08:44 AM IST
सार
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 30 विधायी सीटों पर जीत दर्ज की। रंजीव पुरी, प्रिया सुंदरशन और नित्या रमण जैसे नाम चर्चा में हैं। आखिर किन राज्यों में भारतीयों ने रचा इतिहास? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव
- फोटो : Amar Ujala Graphics/AI
विस्तार
अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया है। अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकियों की बढ़ती ताकत एक बार फिर देखने को मिली। चुनाव में राज्य विधायिका की 41 सीटों पर उतरे भारतीय मूल के उम्मीदवारों में से कम से कम 30 ने जीत दर्ज की, जबकि दो अन्य उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में आगे चल रहे हैं। खास बात यह रही कि भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया।
मिशिगन और एरिजोना जैसे राज्यों में भारतीय-अमेरिकी नेताओं को अहम राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। वहीं, लॉस एंजिलिस के मेयर चुनाव में भारतीय मूल की नित्या रमण ने मौजूदा मेयर करेन बास पर बढ़त बना रखी है। हालांकि, इस मुकाबले में अभी अंतिम नतीजे घोषित नहीं हुए थे।
मिशिगन में रंजीव पुरी की बड़ी जीत, स्पीकर बनने की संभावना
मिशिगन में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और हाउस माइनॉरिटी लीडर रंजीव पुरी ने 24वें डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत दर्ज की। उन्हें करीब 66 फीसदी वोट मिले। इस चुनाव में डेमोक्रेट्स ने राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के बाद रंजीव पुरी के मिशिगन हाउस के स्पीकर बनने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी और सिख नेता होंगे।
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एरिजोना में प्रिया सुंदरशन की जीत, अहम पद मिलने की उम्मीद
एरिजोना में भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक नेता प्रिया सुंदरशन ने 18वें डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत हासिल की। उन्हें करीब 66 फीसदी वोट मिले। इस चुनाव में डेमोक्रेट्स ने एरिजोना की विधानसभा और सीनेट, दोनों सदनों में बढ़त हासिल की। इससे राज्य में पार्टी के लिए मजबूत राजनीतिक स्थिति बनने का रास्ता साफ हुआ है।
प्रिया सुंदरशन के सीनेट प्रेसिडेंट या बहुमत नेता जैसे अहम पद पर पहुंचने की चर्चा है। हालांकि, इस पद को लेकर अंतिम फैसला डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायकों की बैठक और मतदान के बाद ही होगा।
लॉस एंजिलिस मेयर चुनाव में नित्या रमण आगे
लॉस एंजिलिस के मेयर चुनाव में भारतीय मूल की नित्या रमण ने मौजूदा मेयर करेन बास के खिलाफ बढ़त बना ली। बुधवार शाम तक सामने आए नतीजों के अनुसार, रमण को करीब 52 फीसदी और बास को 48 फीसदी वोट मिले थे।
रमण को लगभग 4.05 लाख वोट मिले, जबकि बास के खाते में करीब 3.79 लाख वोट आए। उस समय तक अनुमानित मतदान का लगभग दो-तिहाई हिस्सा ही गिना गया था। इसलिए प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने इस मुकाबले को अभी निर्णायक घोषित नहीं किया था। इस बीच लॉस एंजिलिस के सिटी अटॉर्नी चुनाव में भारतीय मूल की मारिसा रॉय को भी सफलता मिली। उन्होंने जॉन मैककिनी को हराया और करीब 66 फीसदी वोट हासिल किए।
जॉर्जिया और टेक्सास में भारतीय मूल के नए चेहरों ने रचा इतिहास
जॉर्जिया के 97वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से ज्योत सिंह ने करीब 68 फीसदी वोट हासिल कर जीत दर्ज की। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के मुताबिक, वह जॉर्जिया की राज्य विधायिका के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी और पहले सिख-अमेरिकी नेता हैं। वहीं, टेक्सास के 47वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से पूजा सेठी ने करीब 63 फीसदी वोटों के साथ जीत हासिल की। उन्होंने इसे राज्य की राजनीति में भारतीय और एशियाई-अमेरिकी महिलाओं की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
इलिनॉय और न्यूयॉर्क में भी भारतीय नेताओं का दबदबा
इलिनॉय में नबीला सैयद ने 26वें सीनेट डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्बी हिल्स को हराया। उन्हें करीब 57 फीसदी वोट मिले। यह चुनाव राज्य के सबसे महंगे विधायी मुकाबलों में शामिल रहा। न्यूयॉर्क में लिसा कौल ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब रोलिसन को हराकर सीनेट की 39वीं सीट अपने नाम की। उन्हें लगभग 55 फीसदी वोट मिले। इसके अलावा, आयोवा में निखिल वागले बेहद करीबी मुकाबले में रिपब्लिकन उम्मीदवार से करीब 150 वोटों की बढ़त बनाए हुए थे।
कई राज्यों में भारतीय मूल के मौजूदा नेताओं की वापसी
भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने केवल नई सीटें ही नहीं जीतीं, बल्कि कई राज्यों में मौजूदा नेताओं ने भी अपनी सीट बरकरार रखी। इलिनॉय में राम विल्लीवालम ने करीब 73 फीसदी वोटों के साथ सीनेट सीट पर जीत हासिल की। केविन ओलिकल निर्विरोध चुने गए, जबकि सबा हैदर ने 84वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से करीब 71 फीसदी वोट हासिल किए।
नॉर्थ कैरोलिना में जय चौधरी ने करीब 75 फीसदी वोटों के साथ जीत दर्ज की। पेंसिल्वेनिया में अरविंद वेंकट, ओहियो में अनीता सोमानी और कनेक्टिकट में सुजाता गाडकर-विलकॉक्स ने भी अपनी-अपनी सीटें जीतीं। न्यूयॉर्क में जेरेमी कोनी ने लगातार चौथी बार जीत हासिल की। वहीं, विस्कॉन्सिन में रेणुका मायादेव ने करीब 90 फीसदी वोट प्राप्त किए। कैलिफोर्निया में ऐश कालरा और वॉशिंगटन में मनका ढींगरा ने भी शानदार प्रदर्शन किया। मनका को करीब 92 फीसदी वोट मिले।
कई अन्य भारतीय नेताओं को सफलता
राज्यव्यापी चुनावों में भी भारतीय मूल के नेताओं ने अच्छा प्रदर्शन किया। मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने गवर्नर वेस मूर के साथ दोबारा जीत हासिल की। उनके टिकट को करीब 63 फीसदी वोट मिले। वहीं, विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल जोश कौल ने लगभग 55 फीसदी वोटों के साथ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। उनके पिता भारत से अमेरिका आए थे।
स्थानीय निकायों में भी भारतीय मूल के उम्मीदवारों को सफलता मिली। यूटा में साल्ट लेक काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सिम गिल ने जीत हासिल की। उत्तरी कैरोलिना के वेक काउंटी में मोना सिंह ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि टेक्सास के हैरिस काउंटी में सिल्की जोशी-मलिक ने शिक्षा बोर्ड की सीट जीती।
विवेक रामास्वामी समेत कुछ भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों को हार
जहां एक तरफ भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, वहीं कुछ बड़े नामों को चुनाव में हार का सामना भी करना पड़ा। ओहियो के गवर्नर चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से हार मिली। उन्हें करीब 44 फीसदी वोट मिले, जबकि एक्टन को लगभग 52 फीसदी वोट हासिल हुए। न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमाटिरेड्डी भी अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स से चुनाव हार गईं। इसके अलावा, डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार भी अपने-अपने चुनावी मुकाबले नहीं जीत सके।
41 उम्मीदवारों में से 30 ने दर्ज की जीत
कुल मिलाकर अमेरिकी राज्य विधायिका की 41 सीटों पर भारतीय मूल के उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से 30 ने जीत हासिल की, दो उम्मीदवार आगे चल रहे थे, जबकि नौ को हार का सामना करना पड़ा। डेमोक्रेटिक पार्टी के 33 उम्मीदवारों में से 28 ने उन मुकाबलों में जीत दर्ज की जिनके नतीजे तय हो चुके थे। यानी उनकी सफलता की दर करीब 85 फीसदी रही। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी के छह उम्मीदवारों में से दो को जीत मिली और दोनों मौजूदा विधायक थे।
खास बात यह रही कि चुनाव लड़ने वाले भारतीय मूल के सभी मौजूदा विधायकों ने अपनी सीटें बरकरार रखीं। जीतने वाले 30 उम्मीदवारों में आठ निर्विरोध चुने गए, जबकि 15 महिलाएं हैं। इलिनॉय चार विजेताओं के साथ सबसे आगे रहा। न्यूयॉर्क में तीन और वॉशिंगटन तथा वर्मोंट में दो-दो भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
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मिशिगन और एरिजोना जैसे राज्यों में भारतीय-अमेरिकी नेताओं को अहम राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। वहीं, लॉस एंजिलिस के मेयर चुनाव में भारतीय मूल की नित्या रमण ने मौजूदा मेयर करेन बास पर बढ़त बना रखी है। हालांकि, इस मुकाबले में अभी अंतिम नतीजे घोषित नहीं हुए थे।
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मिशिगन में रंजीव पुरी की बड़ी जीत, स्पीकर बनने की संभावना
मिशिगन में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और हाउस माइनॉरिटी लीडर रंजीव पुरी ने 24वें डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत दर्ज की। उन्हें करीब 66 फीसदी वोट मिले। इस चुनाव में डेमोक्रेट्स ने राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के बाद रंजीव पुरी के मिशिगन हाउस के स्पीकर बनने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी और सिख नेता होंगे।
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एरिजोना में प्रिया सुंदरशन की जीत, अहम पद मिलने की उम्मीद
एरिजोना में भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक नेता प्रिया सुंदरशन ने 18वें डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत हासिल की। उन्हें करीब 66 फीसदी वोट मिले। इस चुनाव में डेमोक्रेट्स ने एरिजोना की विधानसभा और सीनेट, दोनों सदनों में बढ़त हासिल की। इससे राज्य में पार्टी के लिए मजबूत राजनीतिक स्थिति बनने का रास्ता साफ हुआ है।
प्रिया सुंदरशन के सीनेट प्रेसिडेंट या बहुमत नेता जैसे अहम पद पर पहुंचने की चर्चा है। हालांकि, इस पद को लेकर अंतिम फैसला डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायकों की बैठक और मतदान के बाद ही होगा।
लॉस एंजिलिस मेयर चुनाव में नित्या रमण आगे
लॉस एंजिलिस के मेयर चुनाव में भारतीय मूल की नित्या रमण ने मौजूदा मेयर करेन बास के खिलाफ बढ़त बना ली। बुधवार शाम तक सामने आए नतीजों के अनुसार, रमण को करीब 52 फीसदी और बास को 48 फीसदी वोट मिले थे।
रमण को लगभग 4.05 लाख वोट मिले, जबकि बास के खाते में करीब 3.79 लाख वोट आए। उस समय तक अनुमानित मतदान का लगभग दो-तिहाई हिस्सा ही गिना गया था। इसलिए प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने इस मुकाबले को अभी निर्णायक घोषित नहीं किया था। इस बीच लॉस एंजिलिस के सिटी अटॉर्नी चुनाव में भारतीय मूल की मारिसा रॉय को भी सफलता मिली। उन्होंने जॉन मैककिनी को हराया और करीब 66 फीसदी वोट हासिल किए।
जॉर्जिया और टेक्सास में भारतीय मूल के नए चेहरों ने रचा इतिहास
जॉर्जिया के 97वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से ज्योत सिंह ने करीब 68 फीसदी वोट हासिल कर जीत दर्ज की। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के मुताबिक, वह जॉर्जिया की राज्य विधायिका के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी और पहले सिख-अमेरिकी नेता हैं। वहीं, टेक्सास के 47वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से पूजा सेठी ने करीब 63 फीसदी वोटों के साथ जीत हासिल की। उन्होंने इसे राज्य की राजनीति में भारतीय और एशियाई-अमेरिकी महिलाओं की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
इलिनॉय और न्यूयॉर्क में भी भारतीय नेताओं का दबदबा
इलिनॉय में नबीला सैयद ने 26वें सीनेट डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्बी हिल्स को हराया। उन्हें करीब 57 फीसदी वोट मिले। यह चुनाव राज्य के सबसे महंगे विधायी मुकाबलों में शामिल रहा। न्यूयॉर्क में लिसा कौल ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब रोलिसन को हराकर सीनेट की 39वीं सीट अपने नाम की। उन्हें लगभग 55 फीसदी वोट मिले। इसके अलावा, आयोवा में निखिल वागले बेहद करीबी मुकाबले में रिपब्लिकन उम्मीदवार से करीब 150 वोटों की बढ़त बनाए हुए थे।
कई राज्यों में भारतीय मूल के मौजूदा नेताओं की वापसी
भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने केवल नई सीटें ही नहीं जीतीं, बल्कि कई राज्यों में मौजूदा नेताओं ने भी अपनी सीट बरकरार रखी। इलिनॉय में राम विल्लीवालम ने करीब 73 फीसदी वोटों के साथ सीनेट सीट पर जीत हासिल की। केविन ओलिकल निर्विरोध चुने गए, जबकि सबा हैदर ने 84वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से करीब 71 फीसदी वोट हासिल किए।
नॉर्थ कैरोलिना में जय चौधरी ने करीब 75 फीसदी वोटों के साथ जीत दर्ज की। पेंसिल्वेनिया में अरविंद वेंकट, ओहियो में अनीता सोमानी और कनेक्टिकट में सुजाता गाडकर-विलकॉक्स ने भी अपनी-अपनी सीटें जीतीं। न्यूयॉर्क में जेरेमी कोनी ने लगातार चौथी बार जीत हासिल की। वहीं, विस्कॉन्सिन में रेणुका मायादेव ने करीब 90 फीसदी वोट प्राप्त किए। कैलिफोर्निया में ऐश कालरा और वॉशिंगटन में मनका ढींगरा ने भी शानदार प्रदर्शन किया। मनका को करीब 92 फीसदी वोट मिले।
कई अन्य भारतीय नेताओं को सफलता
राज्यव्यापी चुनावों में भी भारतीय मूल के नेताओं ने अच्छा प्रदर्शन किया। मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने गवर्नर वेस मूर के साथ दोबारा जीत हासिल की। उनके टिकट को करीब 63 फीसदी वोट मिले। वहीं, विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल जोश कौल ने लगभग 55 फीसदी वोटों के साथ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। उनके पिता भारत से अमेरिका आए थे।
स्थानीय निकायों में भी भारतीय मूल के उम्मीदवारों को सफलता मिली। यूटा में साल्ट लेक काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सिम गिल ने जीत हासिल की। उत्तरी कैरोलिना के वेक काउंटी में मोना सिंह ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि टेक्सास के हैरिस काउंटी में सिल्की जोशी-मलिक ने शिक्षा बोर्ड की सीट जीती।
विवेक रामास्वामी समेत कुछ भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों को हार
जहां एक तरफ भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, वहीं कुछ बड़े नामों को चुनाव में हार का सामना भी करना पड़ा। ओहियो के गवर्नर चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से हार मिली। उन्हें करीब 44 फीसदी वोट मिले, जबकि एक्टन को लगभग 52 फीसदी वोट हासिल हुए। न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमाटिरेड्डी भी अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स से चुनाव हार गईं। इसके अलावा, डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार भी अपने-अपने चुनावी मुकाबले नहीं जीत सके।
41 उम्मीदवारों में से 30 ने दर्ज की जीत
कुल मिलाकर अमेरिकी राज्य विधायिका की 41 सीटों पर भारतीय मूल के उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से 30 ने जीत हासिल की, दो उम्मीदवार आगे चल रहे थे, जबकि नौ को हार का सामना करना पड़ा। डेमोक्रेटिक पार्टी के 33 उम्मीदवारों में से 28 ने उन मुकाबलों में जीत दर्ज की जिनके नतीजे तय हो चुके थे। यानी उनकी सफलता की दर करीब 85 फीसदी रही। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी के छह उम्मीदवारों में से दो को जीत मिली और दोनों मौजूदा विधायक थे।
खास बात यह रही कि चुनाव लड़ने वाले भारतीय मूल के सभी मौजूदा विधायकों ने अपनी सीटें बरकरार रखीं। जीतने वाले 30 उम्मीदवारों में आठ निर्विरोध चुने गए, जबकि 15 महिलाएं हैं। इलिनॉय चार विजेताओं के साथ सबसे आगे रहा। न्यूयॉर्क में तीन और वॉशिंगटन तथा वर्मोंट में दो-दो भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।