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UNHRC: फलस्तीन से जुड़े यूएनएचआरसी प्रस्ताव को भारत का समर्थन, पक्ष में किया मतदान; अमेरिका-पराग्वे का विरोध
Fri, 05 Apr 2024 10:41 PM IST
आदर्श शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जनेवा
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Fri, 05 Apr 2024 10:41 PM IST
सार
फलस्तीनी लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए यूएनएचआरसी एक मसौदा प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। जिसका भारत ने भी समर्थन किया। अमेरिका और पराग्वे ही ऐसे दो देश थे, जिन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया वहीं अल्बानिया, अर्जेंटीना और कैमरून ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक मसौदा प्रस्ताव के पक्ष में भारत ने शुक्रवार को मतदान किया, जिसमें फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के लिए अटूट अधिकार की पुष्टि की गई है। जिसमें फलस्तीनी के स्वतंत्र राज्य का अधिकार भी शामिल है।
मसौदा प्रस्ताव पर भारत ने जताई सहमति
'फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार' पर मसौदा प्रस्ताव जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अपनाया गया, जिसमें भारत समेत 42 सदस्य देशों ने पक्ष में मतदान किया। 47-सदस्यीय परिषद में अमेरिका और पराग्वे ही ऐसे दो देश थे, जिन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जबकि अल्बानिया, अर्जेंटीना और कैमरून ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
फलस्तीनी लोगों के अधिकारों की पुष्टि
प्रस्ताव में फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के जरूरी, स्थायी और अधिकार की पुष्टि की गई, जिसमें स्वतंत्रता, न्याय और सम्मान के साथ जीने का अधिकार और उनके स्वतंत्र फलस्तीन राज्य का अधिकार शामिल है। इसने संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों समेत अंतरराष्ट्रीय कानून और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मापदंडों के अनुरूप इस्राइल-फलस्तीनी युद्ध के लिए एक उचित, व्यापक और स्थायी शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त करने की आवश्यकता की भी पुष्टि की।
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दो राष्ट्र सिद्धांत समाधान को मिला बल
इस प्रस्ताव में इस्राइल से पूर्वी यरुशलम समेत अधिकृत फलस्तीनी क्षेत्र पर अपना कब्जा तुरंत समाप्त करने और फलस्तीनी की राजनीतिक स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए किसी भी बाधा को दूर करने और समाधान करने की अपील की गई है। हालांकि प्रस्ताव फलस्तीनी और इस्राइल के बीच विवाद के समाधान के तौर पर दो राष्ट्र सिद्धांत की पुष्टि करता है।
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मसौदा प्रस्ताव पर भारत ने जताई सहमति
'फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार' पर मसौदा प्रस्ताव जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अपनाया गया, जिसमें भारत समेत 42 सदस्य देशों ने पक्ष में मतदान किया। 47-सदस्यीय परिषद में अमेरिका और पराग्वे ही ऐसे दो देश थे, जिन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जबकि अल्बानिया, अर्जेंटीना और कैमरून ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
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फलस्तीनी लोगों के अधिकारों की पुष्टि
प्रस्ताव में फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के जरूरी, स्थायी और अधिकार की पुष्टि की गई, जिसमें स्वतंत्रता, न्याय और सम्मान के साथ जीने का अधिकार और उनके स्वतंत्र फलस्तीन राज्य का अधिकार शामिल है। इसने संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों समेत अंतरराष्ट्रीय कानून और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मापदंडों के अनुरूप इस्राइल-फलस्तीनी युद्ध के लिए एक उचित, व्यापक और स्थायी शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त करने की आवश्यकता की भी पुष्टि की।
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दो राष्ट्र सिद्धांत समाधान को मिला बल
इस प्रस्ताव में इस्राइल से पूर्वी यरुशलम समेत अधिकृत फलस्तीनी क्षेत्र पर अपना कब्जा तुरंत समाप्त करने और फलस्तीनी की राजनीतिक स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए किसी भी बाधा को दूर करने और समाधान करने की अपील की गई है। हालांकि प्रस्ताव फलस्तीनी और इस्राइल के बीच विवाद के समाधान के तौर पर दो राष्ट्र सिद्धांत की पुष्टि करता है।