यूएनएचआरसी: भारत की श्रीलंका से अपील, कहा- न्याय और समानता की तमिलों की मांग पूरे होने से आपका ही फायदा
यूएनएचआरसी में भारत ने श्रीलंका से अपील की है। भारत ने कहा कि न्याय और समानता की तमिलों की मांग पूरी होने से श्रीलंका का ही फायदा है। भारत ने कहा कि यह श्रीलंका के अपने हित में है कि वहां तमिलों की समानता, न्याय, शांति और सम्मान की उम्मीदें पूरी हों।
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यूएनएचआरसी में भारत ने श्रीलंका से अपील की है। भारत ने कहा कि न्याय और समानता की तमिलों की मांग पूरी होने से श्रीलंका का ही फायदा है। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि और जेनेवा में राजदूत इंद्रमणि पांडेय ने शुक्रवार को कहा कि एक मित्र और पड़ोसी होने के नाते भारत ने लंका में तमिलों के अधिकारों की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को हमेशा पूरा किया है। उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि लेकिन यह श्रीलंका के अपने हित में है कि वहां तमिलों की समानता, न्याय, शांति और सम्मान की उम्मीदें पूरी हों।
राजदूत इंद्रमणि पांडेय ने शुक्रवार को ये बयान उच्चायुक्त की मानवाधिकारों की रिपोर्ट पर दिया। इस रिपोर्ट में श्रीलंका में सामन्जस्य, जवाबदेही और मानवाधिकारों को बढावा देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के मित्र और जिम्मेदार पड़ोसी होने के नाते भारत ने निरंतर श्रीलंका में तमिलों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने का आह्वान किया है।
इंद्रमणि पांडेय ने कहा कि भारत का मानना है कि यह उसके अपने हित में है कि संयुक्त श्री लंका में समानता, न्याय,शांति और सम्मान की तमिलों की अपेक्षा को पूरा किया जाए। गौरतलब है कि श्रीलंका में तमिल समुदाय के साथ शक्तियों के विकेंद्रीकरण करने वाले श्रीलंकाई संविधान के 13वें संशोधन को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ने निरंतर चाहता है कि श्रीलंकाई संविधान के 13वें संशोधन (जिसे 13ए के रूप में भी जाना जाता है) को श्रीलंका में सत्ता के हस्तांतरण पर तमिलों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक उपकरण के रूप में प्रयोग करे।
इस संशोधन का उद्देश्य श्रीलंका में प्रांतीय परिषदों का निर्माण करना और अंग्रेजी को लिंक भाषा के रूप में संरक्षित करते हुए सिंहली और तमिल को राष्ट्रीय भाषाओं के रूप में सक्षम बनाना है। यह संशोधन श्रीलंका के नौ प्रांतों में से प्रत्येक में उत्तर और पूर्वी प्रांतों के अस्थायी विलय के साथ निर्वाचित परिषदों में लाया गया था, जिसे लिट्टे ने तमिल हार्टलैंड कहा है।