Pakistan-India: क्या विदेश मंत्री की नहीं सुन रहे राजनयिक? भारत से व्यापार बहाल करने पर प्रवक्ता ने कही यह बात
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत के साथ व्यापार नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। देश के नए विदेश मंत्री इसाक डार के बयान के कुछ ही दिनों के बाद उनके मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को दोबारा शुरू करने की कोई योजना नहीं है। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रवक्ता का बयान यही दिखाता है कि पड़ोसी देश आंतरिक मतभेदों से जूझ रहा है। ऐसे में राजनयिक अपने मंत्री के बयान की ही अनदेखी कर रहे हैं।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर का जिक्र कर आपत्तिजनक बयान; पांच साल बाद भी अड़ा है पाकिस्तान
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में अवैध कदम उठाने के बेबुनियाद आरोप लगाए। उन्होंने कहा, 2019 से ही दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। अपने विदेश मंत्री की राय से बिल्कुल अलग हटते हुए बलूच ने भारत के साथ व्यापार संबंध दोबारा बहाल करने संबंधी सवाल पर कहा, 2019 के बाद से पाकिस्तान की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पाकिस्तान के आपत्तिजनक और बेबुनियाद बयानों को खारिज कर भारत पाकिस्तान को दो-टूक संदेश दे चुका है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश देश के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। दोनों प्रदेशों में सामाजिक-आर्थिक विकास और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की तरफ से किए गए संवैधानिक उपाय पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है, इसमें बाहरी दखल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं।
व्यापार बहाल करने पर विदेश मंत्री डार ने क्या कहा?
गौरतलब है कि ब्रसेल्स में परमाणु ऊर्जा शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद डार ने पिछले हफ्ते (23 मार्च) भारत के साथ कारोबार फिर शुरू करने के इच्छुक होने का संकेत दिया था। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक लंदन में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में रहने वाला व्यापारिक समुदाय और कारोबारी चाहते हैं कि भारत के साथ व्यापार बहाल हो। एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक डार ने कहा, हम भारत के साथ व्यापार के मामलों को गंभीरता से देखेंगे।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत का रूख
दोनों देशों के संबंधों के पहलुओं को समझने के लिए यह जानना भी जरूरी है कि भारत ने आतंकवाद और अलगाववाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। पाकिस्तान कहता रहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की जिम्मेदारी भारत पर है। वह वार्ता के लिए भारत के सामने कश्मीर के संबंध में हुए फैसलों (अगस्त, 2019) को पलटने की शर्त रखता रहा है। हालांकि, भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने पाकिस्तान को साफ तौर पर कह दिया है कि जम्मू-कश्मीर व लद्दाख देश का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा।
भारत ने आतंक व शत्रुतामुक्त वातावरण बनाने की रखी शर्त
भारत का कहना है कि वह पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंध रखने का इच्छुक है। हालांकि, इसके लिए पाकिस्तान को आतंक और शत्रुता मुक्त वातावरण का निर्माण करना होगा। हालांकि, तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद दोनों देशों ने फरवरी 2021 में नियंत्रण रेखा पर युद्धविराम संबंधी समझौते का नवीनीकरण किया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में शहबाज शरीफ को पाकिस्तान का पीएम बनने पर शुभकामनाएं दी थी, जिसके बाद राजनयिक संबंधों पर जमी बर्फ के पिघलने की उम्मीद जगी थी। शरीफ ने शुभकामनाओं के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद भी दिया था।