फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   india-pakistan forget neighbouring religion, health of people depend on god

'भारत-पाक पड़ोसी धर्म भूले, दिल के सुराख अल्लाह भरोसे'

Fri, 23 Mar 2018 01:23 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 23 Mar 2018 01:23 PM IST
विज्ञापन
india-pakistan forget neighbouring religion, health of people depend on god

दिल्ली के घर में रात के तीन बजे घंटी बजती है। घर वाले दरवाजा खोलते हैं, बाहर न कोई बंदा न बंदे की जात। घर दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अफसर का है और घंटी बजाने वाला वो जवान है जिसे भारत सरकार ने पाकिस्तान और पाकिस्तानियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी है। इधर, इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग अपने मुलाजिमों के लिए नया घर बना रहा है, वहां मजदूर काम करने जाते है जिन्हें हमारे जवान पीट डालते हैं। ये वो जवान हैं जिन्हें पाकिस्तान सरकार ने जिम्मेदारी दी है कि किसी भारतीय को इस्लामाबाद में चैन से रहने नहीं देना है। भारतीय उच्चायोग वाले घर से दूध-दही लेने घर से निकलते हैं तो पाकिस्तानी जासूस उनकी गाड़ी के आगे-पीछे गाड़ियां लगा देते हैं।

विज्ञापन


भारत और पाकिस्तान बच्चे नहीं हैं...

दूसरी तरफ, दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग वाले अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते हैं तो उनकी गाड़ी को घेर लिया जाता है और उनके बच्चों की तस्वीरें खींची जाती हैं। ये हमारे रक्षक एक-दूसरे के उच्चायुक्तों के साथ क्या कर रहे हैं? आप भी बचपन में कभी किसी पड़ोसी के घर की घंटी बजा कर भागे होंगे। हो सकता है कि आप ने बचपन में किसी की बेरी पर पत्थर मारा हो। यह छोटी-छोटी शरारतें सारे बच्चे करते हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान कोई बच्चे नहीं हैं। सत्तर साल के हो चुके हैं। कई जंगें लड़ चुके हैं। एक जंग लगातार मीडिया पर और एलओसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर लगी रहती है। सरहदों पर बिजली वाली ट्रेन बिछा रखी है। अगर कोई भाईचारे की बात करे तो उसे घर से ही गालियां पड़ने लगती हैं।
विज्ञापन


भारत में बढ़िया और सस्ता इलाज

अब तो भारत-पाकिस्तान दोस्ती की बात करने वाले लोग भी कम ही रह गए हैं। पहले तो फनकारों को वीजा मिल जाता था, लेकिन अब वो भी बंद है।
फनकारों की तो बात ही छोड़ दीजिए, मेरी एक दोस्त अपने छह साल के बच्चे को उसके बाप से मिलवाने भारत जाया करती थी। उन्हें भी वीजा नहीं मिला।
उसके साथ बदजुबानी भी की गई कि इसे पैदा करने से पहले सोचना चाहिए था। सुना है, भारत में इलाज बढ़िया और सस्ता हो जाता है। कभी-कभी ट्विटर पर देखते हैं, किसी को खून का कैंसर और किसी बच्चे के दिल में सुराख है। ये लोग भारत की विदेश मंत्री से मिन्नत करते हैं। अगर उनका मिजाज ठीक हो तो मेहरबानी करते हुए वीजा दे देती हैं। अगर ना दे तो आम नागरिक उनका क्या कर सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस्लामाबाद अच्छा शहर है.. नहीं भूला, पर वो पिटाई भी नहीं भूला

india-pakistan forget neighbouring religion, health of people depend on god

दुश्मनी पक्की है...

मैंने एक बार दिल्ली से वापस आते समय पाकिस्तानी मरीजों का भरा हुआ जहाज देखा था। सभी इलाज करवाने के लिए भारत गए थे। रातों-रात भारत-पाकिस्तान सरहद पर तनाव पैदा हो गया। वीजा रद्द होने लगे और सभी मरीज तुरंत वापस भागे। कई मरीजों ने अस्पताल वाले कपड़े पहन रखे थे। एक मरीज की बांह में ड्रिप लगी हुई थी। भारत-पाकिस्तान की दुश्मनी पक्की है। हमारा कोई भाईचारा नहीं है। कम से कम हम इंसान की औलाद तो बन सकते हैं। कम से कम अपने बच्चों को अपनी दुश्मनी की जहर के टीके तो ना लगाएं। कई साल पहले मुझे लंदन में एक भारतीय जवान मिला। मेरे हाथ में गोल्डलीफ की डब्बी देखकर मेरे पास आया और बोला, 'पाकिस्तानी लगते हो। सिगरट तो पिलाओ।' मैंने पूछा, 'हां जवान! कभी गए हो पाकिस्तान?'

इस्लामाबाद बहुत अच्छा शहर है...

उसने जवाब दिया, 'मैं आठवीं जमात में था, मेरी मां इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में काम करती थी। मैं इस्लामाबाद के एक पार्क में एक दोस्त के साथ खेल रहा था।' वह आगे बोला, 'आपके जसूसों ने पकड़ लिया और अच्छी तरह पिटाई की। इस्लामाबाद बहुत अच्छा शहर है अभी तक नहीं भूला, पर वह पिटाई भी नहीं भूली।' भारत-पाकिस्तान एक-दूसरे का जो भी बंद कर सकते थे, वह कर चुके हैं। अब यही हो सकता है कि हम अपना आतिफ असलम अपने पास रखें।

आप आशा भोंसले की आवाज पर पिंजरा बना लें। जिस बच्चे के दिल में सुराख है उसे अल्ला के सहारे छोड़ दें। हमें उसकी कोई परवाह नहीं। ये याद रखना कि सर्दियों में जो काली-जहरीली हवा चलती हैं, जिसे हम फॉग कहते हैं, वो ये नहीं पूछती कि ये भारतीय पंजाब है या पाकिस्तानी। जब भूचाल आएगा तो उसे भी वीजा के लिए आवेदन नहीं भरना। जब सूखा पड़ेगा या बाढ़ आएगी तब यह भी वाघा सरहद पर कतार में लगकर नहीं आएंगे। पड़ोसी अच्छा हो या बुरा उसकी जरूरत पड़ ही जाती है। यह ना हो कि हम किसी मुसीबत में हों और किसी के घर की घंटी बजाएं और दरवाजा खोलने वाला कोई ना हो। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed