{"_id":"646e4f06ea1225514302e3a6","slug":"india-has-not-demanded-compensation-from-sri-lanka-for-assistance-during-two-recent-maritime-disasters-2023-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Clarification: 'श्रीलंका से मुआवजे की मांग नहीं की', भारतीय उच्चायोग की दो टूक; जानें क्या है पूरा मामला","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Clarification: 'श्रीलंका से मुआवजे की मांग नहीं की', भारतीय उच्चायोग की दो टूक; जानें क्या है पूरा मामला
Wed, 24 May 2023 11:23 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 24 May 2023 11:23 PM IST
सार
भारत सरकार ने नेबरहुड फर्स्ट' नीति और सभी के लिए सुरक्षा और विकास (एसएजीएआर) सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए दुर्घटना का शिकार हुए जहाजों के लिए मदद की थी।
विज्ञापन
भारत -श्रीलंका
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
2020 और 2021 में हुई दो समुद्री आपदाओं के दौरान सहायता के लिए श्रीलंका से मुआवजे की मांग वाली मीडिया रिपोर्ट्स को श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने बुधवार को साफ खारिज कर दिया है। दरअसल, हाल में श्रीलंका के जलक्षेत्र में दो समुद्री दुर्घटनाएं हुई थीं, जिसमें भारत ने द्वीप राष्ट्र की मदद की थी। इसी को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि सहायता के संदर्भ में नई दिल्ली ने कोलंबो से मुआवजे की मांग की थी। इसे लेकर भारतीय उच्चायोग साफ किया है कि ऐसा कुछ भी नहीं है। भारत ने किसी भी मुआवजे की मांग नहीं की है।
विज्ञापन
भारतीय उच्चायोग ने इस संदर्भ में एक विज्ञप्ति भी जारी की है। इसमें कहा गया है कि भारत के उच्चायोग को कुठ मीडिया रिपोर्ट्स मिली हैं जो बताती हैं कि भारत सरकार ने सितंबर 2020 और मई-जून 2021 में एमटी न्यू डायमंड और एमवी एक्सप्रेस पर्ल में आग लगने की घटनाओं के दौरान प्रदान की गई सहायता के लिए श्रीलंका सरकार से मुआवजे/क्षति की मांग की है। ऐसी खबरें पूरी तरह से झूठी और गलत हैं।
विज्ञापन
विज्ञप्ति में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार 'प्रदूषक भुगतान सिद्धांत' के अनुरूप हमने इन जहाजों द्वारा तैनाती, बचाव गतिविधियों और भंडार के लिए दावा किया है। मिशन ने स्पष्ट किया कि उसने केवल अंतरराष्ट्रीय अभ्यास के आधार पर बीमाकर्ताओं से दावा की जाने वाली लागत को जमा किया है।
विज्ञापन
इसमें यह भी कहा गया है कि भारत सरकार ने नेबरहुड फर्स्ट' नीति और सभी के लिए सुरक्षा और विकास (एसएजीएआर) सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए दुर्घटना का शिकार हुए जहाजों के लिए मदद की थी। भारत ने अपनी 'पड़ोसी पहले' नीति के अनुरूप श्रीलंका के एक सच्चे मित्र और भागीदार के रूप में उसे बहु-आयामी सहायता प्रदान की थी।
बता दें कि सितंबर 2020 में श्रीलंका के पूर्वी तट के पास एमटी न्यू डायमंड जहाज आग की लपटों में घिर गया था। घटना के समय यह कुवैत में मीना अल अहमदी के बंदरगाह से पारादीप के भारतीय बंदरगाह तक 270,000 मीट्रिक टन कच्चे तेल का परिवहन कर रहा था।
वहीं, मई 2021 में सिंगापुर का एक कंटेनर पोत एमवी एक्स-प्रेस पर्ल में में कोलंबो से 16 किमी दूर आग लग गई थी। इन घटनाओं में श्रीलंका नौसेना के अनुरोध के बाद भारतीय तटरक्षक बल ने अपने जहाजों को तुरंत तैनात किया था और शीघ्र सहायता प्रदान की थी।