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विदेश नीति: भारत कूटनीतिक तरीके से यूक्रेन-पश्चिम एशिया का समाधान खोजने में जुटा; ऑस्ट्रेलिया में बोले जयशंकर

Sun, 03 Nov 2024 11:02 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 03 Nov 2024 11:02 PM IST
सार

ऑस्ट्रेलियाई शहर ब्रिसबेन में भारतीय समुदाय के साथ बातचीत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि दोनों संघर्षों ने व्यापक नतीजों के कारण चिंता पैदा की है। उन्होंने दर्शकों के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, हम अलग-अलग तरीकों से दोनों में कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं।

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India engaged in proactive diplomacy for Ukraine, West Asia solution: Jaishankar
एस. जयशंकर, विदेश मंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में युद्ध चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि वैश्वीकृत दुनिया में कहीं भी अस्थिरता का असर हर जगह पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत कूटनीति के माध्यम से रूस-यूक्रेन और इस्राइल-हमास संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान खोजने के प्रयासों में लगा हुआ है, क्योंकि यह उन कुछ देशों में से है जो दोनों स्थितियों में युद्धरत पक्षों से बात कर सकते हैं।
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पीएम मोदी ने हाल ही में की रूस और यूक्रेन की यात्रा
रूस-यूक्रेन संघर्ष में कूटनीति की वापसी के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए, क्योंकि वैश्विक दक्षिण के 125 देश इस युद्ध के संकट और दर्द को महसूस कर रहे हैं। शांतिपूर्ण समाधान खोजने के प्रयासों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी की ओर इशारा करते हुए जयशंकर ने कहा कि मोदी जुलाई में रूस और अगस्त में यूक्रेन गए थे। पीएम मोदी ने जून और फिर सितंबर में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की और अक्टूबर में रूसी शहर कजान में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फिर से बातचीत की। जयशंकर ने कहा, यह ऐसी स्थिति है जिसमें कुछ हद तक...सक्रिय कूटनीति की जरूरत है। हम ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा- हमें लगता है कि दुनिया के बाकी देशों को हाथ खड़े करके यह नहीं कहना चाहिए कि 'ठीक है, चलो उनके संघर्ष करने का इंतजार करते हैं और एक दिन वे थक जाएंगे और कुछ होगा।' क्योंकि हर दिन दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है, इन देशों और क्षेत्र को होने वाली कीमत के अलावा।
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भारत के प्रयास को मिल रहा समर्थन- विदेश मंत्री
जयशंकर ने माना कि जब भारत ने अपने प्रयास शुरू किए थे, तब कुछ हद तक संदेह था, लेकिन आज बहुत ज्यादा समझ है, खास तौर पर पश्चिमी देशों में। इसे ग्लोबल साउथ से भी मजबूत समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि कई बातचीत के जरिए हम कुछ साझा आधार बना पाएंगे ताकि कूटनीति की कुछ शुरुआत फिर से हो सके। पश्चिम एशिया में स्थिति अलग है क्योंकि चल रहे प्रयास इस्राइल-हमास संघर्ष को फैलने से रोकने पर केंद्रित हैं। 
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अस्थिरता का हर जगह प्रभाव पड़ता है- जयशंकर
जयशंकर ने कहा, यहां एक अंतर यह है कि ईरान और इस्राइल एक-दूसरे से सीधे बात करने में असमर्थ हैं। इसलिए कई देश यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वे इस अंतर को पाट सकते हैं, हम उनमें से एक हैं। उन्होंने कहा कि दोनों संघर्ष चिंताजनक स्थिति हैं क्योंकि वैश्वीकृत दुनिया में कहीं भी अस्थिरता का मुद्रास्फीति, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा और बाधित आपूर्ति श्रृंखलाओं के संदर्भ में हर जगह प्रभाव पड़ता है।
 
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