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UNSC: 'वैश्विक खाद्य असुरक्षा की स्थिति चुनौतीपूर्ण, अकेले समाधान नहीं कर सकता कोई देश,' यूएन में बोला भारत

Fri, 04 Aug 2023 06:39 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यूनाइटेड नेशंस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यूनाइटेड नेशंस Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 04 Aug 2023 06:39 PM IST
सार

UNSC: खाद्यान्न वितरण के मामले में समानता, सामर्थ्य और पहुंच के महत्व पर जोर देते हुए भारत ने कहा है कि खुले बाजार को असमानता को बनाए रखने और भेदभाव को बढ़ावा देने का तर्क नहीं होना चाहिए।

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India emphasises importance of equity & accessibility in food grain distribution
रुचिरा कंबोज - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

खाद्यान्न वितरण के मामले में समानता, सामर्थ्य और पहुंच के महत्व पर जोर देते हुए भारत ने कहा है कि खुले बाजार को असमानता को बनाए रखने और भेदभाव को बढ़ावा देने का तर्क नहीं होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने गुरुवार को 'अकाल और संघर्ष प्रेरित वैश्विक खाद्य असुरक्षा' पर यूएनएससी की खुली बहस के दौरान यह टिप्पणी की।

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अपने संबोधन में कम्बोज ने 'काला सागर अनाज पहल' को जारी रखने में संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के लिए भारत के समर्थन की भी पुष्टि की और कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता हमारे प्रधानमंत्री के उन शब्दों के प्रति प्रतिबद्ध है जिसमें उन्होंने कहा था कि खाद्य, उर्वरकों और चिकित्सा उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति पर राजनीति न हो, ताकि भू-राजनीतिक तनाव मानवीय संकट का कारण न बने।

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कंबोज ने कहा, 'वैश्विक खाद्य असुरक्षा की स्थिति चुनौतीपूर्ण है। पिछले चार वर्षों में तीव्र खाद्य कमी का सामना करने वाले लोगों की लगातार संख्या बढ़ रही है। चल रहे सशस्त्र संघर्षों से ग्रस्त दुनिया में खाद्य, उर्वरक और ऊर्जा संकट महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा करते हैं, खासकर वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए। इसका समाधान सामूहिक वैश्विक कार्रवाई में निहित है, क्योंकि कोई भी देश अकेले इन चुनौतियों से नहीं निपट सकता है।'
 

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संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, 62 देशों में 362 मिलियन लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है, जो एक रिकॉर्ड है। भारत ने समाधान खोजने के लिए परिषद के विचार के लिए कई सुझाव भी दिए।

स्थायी प्रतिनिधि कंबोज ने कहा, 'जब खाद्यान्न की बात आती है तो हम सभी के लिए हिस्सेदारी, सामर्थ्य और पहुंच के महत्व को पर्याप्त रूप से समझना आवश्यक है। हम पहले ही देख चुके हैं कि कोविड-19 टीकों के मामले में इन सिद्धांतों की किस तरह अवहेलना की गई। खुले बाजार को असमानता को बनाए रखने और भेदभाव को बढ़ावा देने का तर्क नहीं बनना चाहिए।'

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