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UN: भारत ने फिर इस्राइल-हमास युद्ध को लेकर दोहराया रुख, कहा- तुरंत हो बंधकों की रिहाई, संघर्ष विराम लागू हो

Thu, 18 Jul 2024 08:26 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र/यरुशलम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र/यरुशलम Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 18 Jul 2024 08:26 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने फलस्तीन के मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण समाधान पर प्रतिबद्धता जताई। साथ ही बताया कि भारत यूएनआरडब्ल्यूए को साल 2018 से 50 लाख डॉलर हर साल योगदान के रूप में दे रहा है।

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India at UN calls for immediate ceasefire in Gaza strip, urges for release of hostages news in hindi
संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप प्रतिनिधि आर रवींद्र - फोटो : एएनआई

विस्तार

हमास और इस्राइल बीते नौ महीने से जंग लड़ रहे हैं। इस्राइल द्वारा हमास को खत्म करने का संकल्प गाजा पट्टी के लोगों पर भारी पड़ रहा है। गाजा में पैदा हुई मानवीय परिस्थितियों को लेकर देशभर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कुछ देश इस्राइल पर लगातार स्थायी युद्धविराम के लिए दबाव डाल रहे हैं। हालांकि, यहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई का मामला उठा। भारत ने गाजा में तुरंत युद्धविराम और बिना किसी शर्त के बंधकों की रिहाई का आह्वान किया।

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फलस्तीन की मदद करने में अग्रणी रहा है भारत
पश्चिम एशिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की खुली चर्चा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप प्रतिनिधि आर रवींद्र ने यह भी बताया कि भारत, फलस्तीन के लोगों के लिए एक विश्वसनीय विकास भागीदार रहा है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न रूपों में भारत ने फलस्तीन की करीब 12 करोड़ डॉलर की विकासात्मक सहायता की है, जिसमें यूएनआरडब्ल्यूए में योगदान के रूप में 3.5 करोड़ डॉलर भी शामिल हैं।
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उन्होंने आगे बताया, 'भारत यूएनआरडब्ल्यूए को साल 2018 से 50 लाख डॉलर हर साल योगदान के रूप में दे रहा है। हम पहले ही 25 लाख डॉलर के भुगतान की घोषणा कर चुके हैं। यूएनआरडब्ल्यूए में हमारे वार्षिक योगदान का पहला हिस्सा इस सप्ताह की शुरुआत में 15 जुलाई को भेज दिया गया था।'
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आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा
उन्होंने कहा, 'भारत उन देशों में से है, जिन्होंने पिछले साल सात अक्तूबर को इस्राइल पर हुए आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की। इतना ही नहीं हमने इस्राइल-हमास युद्ध में नागरिकों की जान जाने की भी निंदा की है। हम लगातार संयम, तनाव कम करने और वार्ता एवं कूटनीति के जरिए संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दे रहे हैं।'

इसके अलावा, उन्होंने सभी परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने का आग्रह किया। रवींद्र ने कहा, 'हम गाजा पट्टी में तुरंत पूरी तरह से युद्धविराम, सुरक्षा, समय और निरंतर मानवीय सहायता तथा राहत एवं आवश्यक मानवीय सेवाओं तक निर्बाध पहुंच की मांग दोहराते हैं। इसके अलावा, हम सभी बंधकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई का भी आह्वान करते हैं।'

कतर और मिस्र की सराहना
उन्होंने इस्राइल और फलस्तीन के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहे कतर और मिस्र जैसे देशों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हमने सभी प्रासंगिक बहुपक्षीय मंचों पर अपनी स्थिति को लगातार दोहराया है।

द्वि-राष्ट्र समाधान पर भारत का जोर
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आर रवींद्र ने कहा था कि भारत ने हमेशा बातचीत के आधार पर द्वि-राष्ट्र समाधान (Two State Solution) का समर्थन किया है, जिससे फलस्तीन के एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य राष्ट्र की स्थापना हो सके। उन्होंने कहा था कि भारत ने गाजा में चल रहे इस्राइल-हमास संघर्ष पर एक सैद्धांतिक रुख अपनाया है। 


यह है मामला
हमास ने सात अक्तूबर को इस्राइली शहरों पर पांच हजार से ज्यादा रॉकेट दागकर हमले की शुरुआत की थी। इसके बाद हमास के आतंकियों ने इस्राइल में घुसकर लोगों को मौत के घाट उतारा। इसके जवाब में इस्राइल ने हमास आतंकियों के खिलाफ गाजा में ऑपरेशन शुरू किया था। इस ऑपरेशन में गाजा स्थित हमास के ठिकानों पर जबरदस्त बमबारी की गई है, जिससे अधिकतर गाजा खंडहर में तब्दील हो गया है। अब तक इस्राइल और गाजा में कुल मिलाकर 37000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

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