AI से सेमीकंडक्टर तक भारत-EU आए साथ: क्या जल्द होगा निवेश सुरक्षा समझौता? पीयूष गोयल बोले- समय नहीं इरादा अहम
ब्रसेल्स में आयोजित तीसरी भारत-EU व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ निवेश सुरक्षा समझौते को जल्द अंतिम रूप देना चाहते हैं। वहीं, राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि दोनों पक्षों ने 2026-27 की नई कार्ययोजना पर सहमति बनाई है, जिसके तहत सेमीकंडक्टर, AI, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुसंधान, नवाचार और कुशल पेशेवरों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
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तीसरी भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक के बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि मेरा मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ, दोनों ही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर अब तक हुई सकारात्मक प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए निवेश सुरक्षा समझौते के महत्व को अच्छी तरह समझते हैं। हम दोनों इस दिशा में सक्रियता से काम कर रहे हैं और चाहते हैं कि निवेश सुरक्षा समझौता जल्द से जल्द अंतिम रूप ले। दोनों पक्षों की टीमें इसके विभिन्न पहलुओं पर लगातार चर्चा कर रही हैं। मुझे उम्मीद है कि इसे इस वर्ष के अंत तक, या उसके कुछ समय बाद तक पूरा किया जा सकेगा। हालांकि, मेरे विचार से किसी तय समय-सीमा से अधिक महत्वपूर्ण दोनों पक्षों की स्पष्ट मंशा और प्रतिबद्धता है।
क्या भारत-EU की साझेदारी अब परिणाम आधारित चरण में पहुंच चुकी है?
तीसरी भारत-EU व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक के बाद वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि हमारा सहयोग अब तेजी से कार्रवाई-आधारित और परिणामोन्मुखी साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसमें भारत और यूरोपीय संघ की सरकारों के साथ-साथ उद्योग, अनुसंधान संस्थान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र भी मिलकर काम कर रहे हैं। आज दोनों पक्षों ने वर्ष 2026-27 के लिए एक भविष्योन्मुखी कार्ययोजना पर सहमति बनाई है, जो रणनीतिक और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में हमारे सहयोग का मार्गदर्शन करेगी।
किन क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जाएगा?
उन्होंने कहा कि यह कार्ययोजना अनुसंधान एवं नवाचार में सहयोग को और मजबूत करने, विश्वसनीय एवं लचीली प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखलाओं को विकसित करने, दोनों पक्षों के उद्योगों के बीच अधिक जुड़ाव बढ़ाने और ऐसे डिजिटल समाधान तैयार करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिनसे नागरिकों और कारोबार, दोनों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
सेमीकंडक्टर, AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में क्या रही प्रगति?
जितिन प्रसाद ने कहा कि सेमीकंडक्टर सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति हमारी साझेदारी की अपार संभावनाओं को दर्शाती है।
क्या तकनीकी सहयोग का सीधा लाभ लोगों तक पहुंचेगा?
उन्होंने कहा कि हम यह भी मानते हैं कि प्रौद्योगिकी सहयोग का अंतिम लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। डिजिटल कौशल का विकास, प्रतिभा और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को आपस में जोड़ना तथा कुशल पेशेवरों की अधिक आवाजाही को सुगम बनाना हमारी साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बने रहेंगे।
वैश्विक तकनीकी मानकों को आकार देने में भारत और EU की क्या भूमिका होगी?
उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक प्रौद्योगिकी ढांचे और मानकों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं, जो खुले, विश्वसनीय, इंटरऑपरेबल और समाज की जरूरतों के अनुरूप हों। भारत-EU प्रौद्योगिकी साझेदारी अब एक महत्वपूर्ण नए चरण में प्रवेश कर रही है। आगे हमारा पूरा ध्यान कार्यान्वयन और मापने योग्य परिणामों पर रहेगा।
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आगे की रणनीति क्या होगी?
उन्होंने कहा कि भारत यूरोपीय संघ के साथ मिलकर एक विश्वसनीय, महत्वाकांक्षी और भविष्योन्मुखी प्रौद्योगिकी साझेदारी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य ऐसी साझेदारी विकसित करना है, जो नवाचार, आर्थिक विकास और समावेशी एवं टिकाऊ डिजिटल भविष्य को मजबूती प्रदान करे।