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UN: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में फिर दिखाया आईना, खुली बहस में कहा- सुधार पर वार्ता के लिए प्रतिबद्ध हों

Thu, 18 Jul 2024 05:14 AM IST
विशांत श्रीवास्तव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Thu, 18 Jul 2024 05:14 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत आर. रवींद्र ने सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा है कि यूएन को सुधार पर वार्ता के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।

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India again showed the mirror in the United Nations, said in the open debate – commit to talks on reforms
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से उसके सुधार पर समयबद्ध बातचीत के लिए प्रतिबद्ध होने का आह्वान किया है। भारत ने स्पष्ट तौर पर प्रमुख देशों और समूहों द्वारा परिषद के तंत्र में हेरफेर को बहुपक्षीय भावना के लिए ‘हानिकारक’ बताया है। बता दें, चीन नहीं चाहता कि सुरक्षा परिषद में सुधार हों और भारत को इसका स्थायी सदस्य बनने का मौका मिले।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत आर. रवींद्र ने सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा, विश्व संस्था के बहुपक्षीय प्रणाली के नाकाम रहने का प्राथमिक कारण इसका अभी भी 1945 के पुराने नजरिये में फंसा होना है। यह सुरक्षा परिषद की संरचना में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। इसलिए, सुधारित बहुपक्षवाद पर भारत की स्थिति का मूल, सुरक्षा परिषद में सुधार के आह्वान में निहित है, जो समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है। सुधारों पर समयबद्ध वार्ता के लिए पुनः प्रतिबद्धता का आह्वान करते हुए, रवींद्र ने कहा, बड़े देशों या समूहों द्वारा अपने संकीर्ण हित में बातचीत प्रक्रियाओं और तंत्रों में तोड़फोड़ की जा रही है। यह बहुपक्षीय भावना के लिए हानिकारक है और जहां भी जरूरी हो, इसका विरोध होना चाहिए।  
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चुनौतियों के जवाब में संयुक्त राष्ट्र असमर्थ
भारतीय दूत ने कहा, हम एक और विश्व युद्ध रोक सकते हैं, लेकिन यह आतंकवाद, महामारी, जलवायु परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकियों से पैदा खतरों व  साइबर हमलों जैसी जटिल वैश्विक चुनौतियों का जवाब देने में संयुक्त राष्ट्र की असमर्थता को नहीं छिपाता है। उन्होंने जी-20 सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी के बयान का जिक्र भी किया जिसमें उन्होंने कहा था कि जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, उस समय की दुनिया आज से बिल्कुल अलग थी। 
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विकास साझेदारी से शांति-निर्माण में जुटा भारत
सैन्य सलाहकार कर्नल आशीष भल्ला ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में कहा कि भारत ने हमेशा शांति स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ व्यापक विकास साझेदारी के माध्यम से शांति स्थापना में अपनी भागीदारी निभाने को तत्पर है। ‘शांति निर्माण आयोग की रिपोर्ट’ पर संयुक्त बहस में भारत का वक्तव्य देते हुए कर्नल भल्ला ने कहा- शिक्षा, शांति-निर्माण के लिए एक प्रमुख घटक है और शांति बनाए रखने में भारत ने हमेशा शांति स्थापना तथा शांति निर्माण दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 


लाभों को समेकित करना आवश्यक
कर्नल भल्ला ने कहा, भारत की विकासात्मक परियोजनाओं का संचयी मूल्य अब 40 अरब डॉलर से अधिक है। उन्होंने 2023 की पीबीसी रिपोर्ट को आयोग द्वारा की गई सकारात्मक पहल का प्रमाण बताया। सैन्य सलाहकार कर्नल भल्ला ने कहा, हमारा मानना है कि इन लाभों को और अधिक चर्चा के साथ समेकित करने की आवश्यकता है। उन्होंने शांति निर्माण में भारत की निरंतर प्रतिबद्धता का आश्वासन भी दिया।
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