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यूएनएचआरसी : श्रीलंका के खिलाफ सख्त प्रस्ताव पारित, मतदान से दूर रहा भारत, बयान जारी कर पड़ोसी देश से यह कहा

Tue, 23 Mar 2021 05:54 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,जिनेवा Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 23 Mar 2021 05:54 PM IST
सार

यूएनएचआरसी में श्रीलंका के लिए मंगलवार का दिन खराब रहा। मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने उसके खिलाफ सख्त प्रस्ताव पारित कर दिया। हालांकि भारत ने मतदान में हिस्सा नहीं लेकर उसके प्रति नरम रवैए का परिचय दिया, लेकिन बयान जारी कर अपनी अपेक्षा भी प्रकट की। 

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India abstains in a vote in the UN Human Rights Council on a resolution against Sri Lanka
UNHRC

विस्तार

श्रीलंका के मानवाधिकार रिकॉर्ड के खिलाफ जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) ने मंगलवार को सख्त प्रस्ताव पारित कर दिया। हालांकि भारत मतदान से दूर रहा, लेकिन मतदान से पहले भारत ने पड़ोसी देश से आग्रह किया कि वह द्वीपीय देश में सुलह प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और तमिल समुदाय की आकांक्षाओं के समाधान के लिए राजनीतिक प्राधिकार के हस्तांतरण की अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे।

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प्रस्ताव के समर्थन में 22 देश आए
यूएनएचआरसी ने ‘प्रमोशन ऑफ रीकंसिलिएशन अकाउंटैबिलिटी एंड ह्यूमन राइट्स इन श्रीलंका’ शीर्षक वाला प्रस्ताव पारित किया। श्रीलंका पर कोर समूह द्वारा पेश प्रस्ताव के समर्थन में 47 में से 22 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि ग्यारह सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। कोर समूह में ब्रिटेन, कनाडा और जर्मनी जैसे देश शामिल हैं। भारत उन 14 देशों में शामिल था, जो मतदान में शामिल नहीं हुए।  
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भारत ने बयान जारी किया
मतदान से पहले, भारत ने बयान जारी कहा कि एक नजदीकी पड़ोसी होने के नाते उसने 2009 के बाद श्रीलंका में राहत, पुनर्वास, पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में योगदान दिया है। जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव पवन कुमार बधे ने बयान में कहा कि श्रीलंका में मानवाधिकारों के सवाल पर भारत का दृष्टिकोण दो मौलिक विचारों द्वारा निर्देशित है। एक श्रीलंका के तमिलों को समानता, न्याय, सम्मान और शांति के लिए हमारा समर्थन। दूसरा श्रीलंका की एकता, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करना। 



तमिलनाडु चुनाव का असर
तमिलनाडु में होने वाले चुनावों से पहले राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों ने भारत सरकार से यूएनएचआरसी सत्र में श्रीलंका के खिलाफ जवाबदेही और सुलह के संकल्प के साथ रुख अपनाने का आग्रह किया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जनवरी में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान श्रीलंका की सुलह प्रक्रिया और एक समावेशी राजनीतिक दृष्टिकोण के समर्थन को रेखांकित किया था, जो जातीय सद्भाव को प्रोत्साहित करता है।

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