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संयुक्त राष्ट्र में भारत: मदद को राजनीति से जोड़ने का विरोध करें, वरना बढ़ेगी खाद्य असुरक्षा

Fri, 12 Mar 2021 05:52 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र
पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 12 Mar 2021 05:52 PM IST
सार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में कहा कि मानवीय हालात का राजनीतिकरण करने का बढ़ता चलन दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत ने कहा कि देशों को विकास संबंधी मदद को राजनीतिक प्रक्रिया में प्रगति से जोड़ने का विरोध करना चाहिए। इससे संघर्ष वाले हालात में खाद्य असुरक्षा बढ़ेगी।

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Increasing  trend of politicization of human conditions is Unfortunate, says India in UNSC
संयुक्त राष्ट्र - फोटो : social media

विस्तार

'संघर्ष और खाद्य सुरक्षा' विषय पर गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की खुली चर्चा में यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही आवश्यक है कि दानदाता समुदाय संघर्ष से प्रभावित देशों में सहायता बढ़ाएं। वे यह सुनिश्चित करें कि लोगों की मूलभूत जरूरतों का राजनीतिकरण किए बगैर मानवीय एजेंसियों को आवश्यक धन मिल सके ताकि वे अपनी योजनाओं का पूरी तरह से क्रियान्वयन कर सकें।

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उन्होंने कहा, 'सभी मानवीय कार्रवाई प्राथमिक तौर पर मानवता, निष्पक्षता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों से प्रेरित होनी चाहिए लेकिन दुर्भाग्य से हम मानवीय हालात के राजनीतिकरण के बढ़ते चलन को देख रहे हैं। दानदाताओं के इस रूख से संघर्ष के हालात में खाद्य असुरक्षा ही बढ़ेगी।' इसके साथ ही यूएनएससी को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि संघर्ष के कारण भूखमरी और अकाल के हालात बनते हैं और इन हालात के कारण संघर्ष होता है।
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उन्होंने कहा, 'यदि आप लोगों का पेट नहीं भर रहे हैं तो आप संघर्ष को हवा दे रहे हैं।' तिरुमूर्ति ने विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के अनुमानों का जिक्र किया। इनमें कहा गया था कि साल 2020 के अंत तक खाद्य असुरक्षा से प्रभावित लोगों की संख्या दोगुनी से भी अधिक होकर 27 करोड़ पर पहुंच जाएगी। 'ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस 2020' रिपोर्ट और 15 अन्य एजेंसियों का अनुमान है कि संघर्ष प्रभावित देशों में 7.7 करोड़ से अधिक लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं।
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तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत का यह मानना है कि सशस्त्र संघर्ष तथा आतंकवाद, इनके अलावा चरम मौसम, फसलों पर कीड़े लगना, भोजन की कीमतों में उछाल, आर्थिक संकट किसी भी कमजोर देश को तबाह कर सकते हैं। इन वजहों की वजह से वहां खाद्य असुरक्षा बढ़ सकती है और अकाल का जोखिम भी बढ़ सकता है।


इसके साथ ही विनाशकारी कोविड-19 संकट से जूझ रही दुनिया में खाद्य सुरक्षा को बुनियादी न्यूनतम आवश्यकता बताते हुए तिरुमूर्ति ने महात्मा गांधी को उद्धृत किया। उन्होंने कहा, 'दुनिया में लोग भूख से इतने पीड़ित हैं कि रोटी के अलावा ईश्वर किसी और रूप में उनके सामने नहीं आ सकता।' तिरुमूर्ति ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान भारत ने हजारों मैट्रिक टन अनाज खाद्य सहायता के रूप में म्यांमार, मालदीव और अफगानिस्तान समेत अनेक देशों को दिया है।

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