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निशाने पर हिंदू: पाकिस्तान-अफगानिस्तान ही नहीं बांग्लादेश में भी जुल्म की इंतहा, वो घटनाएं, जब तबाह कर दिए गए घर-पूजास्थल

Tue, 19 Oct 2021 06:04 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, ढाका/नई दिल्ली
रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, ढाका/नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 19 Oct 2021 06:04 PM IST
सार

अगर पिछले 10 सालों की ही बात कर लें, तो बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की दर्जनों घटनाएं सामने आई हैं। बांग्लादेश के आइन ओ सालीश केंद्र के मुताबिक, पिछले 9 सालों में हिंदुओं के 3721 घरों-मंदिरों में तोड़फोड़ और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है। 

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Incident of Communal Violence in Bangladesh on rise as Hindus become targets of Muslim Mobs 12 worse incidents
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बांग्लादेश में पिछले एक हफ्ते में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के दो बड़े मामले सामने आ चुके हैं। पहली घटना चांदपुर जिले में नवरात्रि के दौरान हुई, जहां चरमपंथियों की भीड़ ने हिंदू मंदिर पर हमला कर दिया। इस हमले में भगवान की मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ की गई, वहीं अपराधियों की ओर से फायरिंग में 4 हिंदुओं की मौत की भी खबर सामने आई। ऐसी ही एक और घटना शनिवार को भी हुई, जब कट्टरपंथियों ने फेनी में हिंदुओं के मंदिर और दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। घटना में कम से कम 40 लोग घायल हुए।
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इन मामलों में खुद बांग्लादेश सरकार और प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कार्रवाई की बात कही है। लेकिन इस देश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमले की कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई मौकों पर मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदू इलाकों में घुसकर बर्बरता दिखाई है। अगर पिछले 10 सालों की ही बात कर लें, तो दर्जनों ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। बांग्लादेश के आइन ओ सालीश केंद्र के मुताबिक, पिछले 9 सालों में हिंदुओं के 3721 घरों-मंदिरों में तोड़फोड़ और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है। इन घटनाओं को लेकर बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी मिया सेप्पो ने भी चिंता जताई है और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हालिया हमले को लेकर सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।
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इस बीच अमर उजाला आपको उन 12 घटनाओं की जानकारी दे रहा है, जिनकी वजह से बांग्लादेश में हिंदुओं को सबसे ज्यादा प्रभावित होना पड़ा है। इन घटनाओं के बाद जहां हजारों की संख्या में बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू नागरिक शरणार्थी की तरह जीने के लिए मजबूर हुए हैं, वहीं कई भारत के साथ लगी बांग्लादेश की सीमा को पार करने की कोशिशों में हैं। भारत सरकार भी सीएए के जरिए ऐसे पीड़ित हिंदू समुदाय को शरण देने की योजना बना रही है, लेकिन अब तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। 
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पहले कब-कब हुए हिंदू समुदाय पर हमले?

1. शल्ला, मार्च 2021
इसी साल 18 मार्च को बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की घटना सामने आ चुकी है। तब आरोप लगाया गया था कि नौगांव के रहने वाले एक हिंदू शख्स ने कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम के संयुक्त सचिव मौलाना मुफ्ती ममून-उल हक के एक भाषण की फेसबुक पोस्ट के जरिए निंदा की थी। इससे भड़के मौलाना के समर्थकों ने नोआगांव के शल्ला उपजिला में हिंदुओं के घरों पर हमला कर दिया था। हथियारबंद हमलावरों ने गांव के 80 घरों में तोड़फोड़ और आगजनी भी की थी। इस घटना के बाद सैकड़ों की संख्या में हिंदुओं को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा था। 19 मार्च के दिन उपद्रवियों ने बांग्लादेश के उत्तरगांव में मां काली के मंदिर और मूर्तियों को भी तोड़ दिया था। 

2. मुरादनगर, नवंबर 2020

पिछले साल नवंबर में भी हिंदुओं पर कट्टरपंथी संगठनों की ओर से हमले का मामला सामने आया था। तब एक हिंदू व्यक्ति के कथित तौर पर चार्ली हेब्दो के कार्टूनों को लेकर समर्थन को घटना की वजह बताया गया था। दरअसल, फ्रांस में एक स्कूल में पैगंबर से जुड़ा एक कार्टून दिखाने के लिए टीचर की हत्या हुई थी। इसके बाद पूरे मुस्लिम जगत में पैगंबर और इस्लाम को लेकर चार्ली हेब्दो के कार्टूनों की आलोचना की जा रही थी। इसी बीच एक हिंदू की ओर से जाहिर अभिव्यक्ति मुस्लिम कट्टरपंथियों को पसंद नहीं आई और उन्होंने कोमिला जिले के मुरादनगर उपजिला में कोरबानपुर गांव में घुसकर 10 हिंदू परिवारों पर हमला कर दिया था। कुछ घरों में भी आग लगा दी गई थी। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने 5 लोगों को जेल में डाला था, जबकि 500 पर केस दर्ज किया गया।

3. बुराहनुद्दीन, अक्टूबर 2019

इसी तरह 23 अक्टूबर 2019 को बांग्लादेश के बुराहनुद्दीन में इस्लामी कट्टरपंथियों के विरोध प्रदर्शन में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पुलिसकर्मियों समेत सैकड़ों लोग घायल भी हुए थे। बताया गया था कि मुस्लिम गुट एक हिंदू लड़के बिप्लब चंद्र बैद्य की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि बिप्लब चंद्र ने फेसबुक पोस्ट के जरिए धार्मिक भावनाओं को आहत किया था। इस पोस्ट के बाद मुस्लिमों की एक भीड़ ने 12 हिंदू घर और एक मंदिर में भी तोड़फोड़ की थी। इसके अलावा एक घर और गाड़ियों में भी आगजनी की गई थी। हालांकि, जांच में बाद में सामने आया था कि यह पोस्ट किसी हिंदू ने नहीं, बल्कि दो मुस्लिम व्यक्तियों ने पोस्ट की थी। 

4. रंगपुर, नवंबर 2017

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ इसी तरह की हिंसक घटना 10 नवंबर 2017 को रंगपुर सदर उपजिला में हुई थी। यहां के ठाकुरपारा गांव में अफवाह फैल गई थी कि गांव के ही एक व्यक्ति ने फेसबुक पोस्ट के जरिए पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है। इसके बाद मुस्लिमों की भीड़ ने गांव में घुसकर हिंदू घरों में तोड़फोड़ की और आवासों में आग लगा दी। इस घटना में कई हिंदू घायल हुए थे। तब भी पुलिसकर्मियों से भिड़ंत में एक उपद्रवी की मौत हुई थी। बाद में यह सामने आया था कि यह पोस्ट दो मुस्लिम व्यक्तियों ने ही की थी।

5. नासिरनगर, अक्तूबर 2016

बांग्लादेश में सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों के दम पर ही हिंदुओं के खिलाफ हिंसा कैसे बढ़क उठती है, इसका एक उदाहरण अक्तूबर 2016 में नासिरनगर उपजिला में हुई हिंसा में देखने को मिला था। तब भी मुस्लिमों की भीड़ ने एक फेसबुक पोस्ट को आपत्तिजनक बताते हुए नासिरनगर के ब्राह्मणबरिया में हिंदुओं पर हमला कर दिया। इस दौरान 300 घरों में तोड़फोड़ के साथ लूटपाट की गई और 19 मंदिर क्षतिग्रस्त हुए। इसके अलावा करीब 100 हिंदू और मंदिर के पुजारी भी इन हमलों में घायल हुए थे। 

6. होमना, अप्रैल 2014

हिंदुओं के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों का एक मामला 2014 में आया था, जब करीब तीन हजार मुस्लिमों की भीड़ ने होमना उपजिला में दो दर्जन घरों पर हमला कर दिया था और हिंदू मंदिरों में जमकर तबाही मचाई थी। बताया जाता है कि बागसीतारामपुर के एक गांव में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा एक फेसबुक पोस्ट के बाद से बिगड़ी थी, जिसमें दो युवाओं पर कथित तौर पर पैगंबर का अपमान करने का आरोप लगाया गया था। इसके विरोध में हमले हुए थे, उनमें 8 मदरसों के शिक्षक और छात्र भी शामिल थे। इन हमलों से पहले मदरसों के लाउडस्पीकर से मुस्लिमों के जुटने की भी अपील की गई थी। 

7. ठाकुरगांव और 7 उपजिले, 2014

बांग्लादेश में 2014 के आम चुनाव के दौरान हिंदू राजनीति के चलते हिंसा का शिकार बने। दरअसल, विपक्ष की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और उसकी गठबंधन की साथी जमात-ए-इस्लामी ने चुनाव का बायकॉट करने का एलान किया। हालांकि, हिंदुओं ने चुनाव में हिस्सा लेना जारी रखा। इसके चलते चुनाव खत्म होने के बाद दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने हिंदुओं के घर पर हमले किए। यह हिंसा ठाकुरगांव, दिनाजपुर, रंगपुर, बोगरा, लालमोनिरहाट, राजशाही, चटगांव और जेसोर तक 8 उपजिलों में फैली थी। इन हिंसक घटनाओं के बाद कई बंगाली हिंदू घर छोड़कर भागने के लिए मजबूर हो गए। 

8. संथिया, नवंबर 2013

बांग्लादेश के पबना जिले के संथिया में 2 नवंबर 2013 को मुस्लिमों की भीड़ ने कथित तौर पर 26 हिंदू घरों में घुसकर तबाही मचाई थी। यह घटना भी पैगंबर को लेकर एक फेसबुक पोस्ट के बाद हुई थी। इसमें 10वीं क्लास के हिंदू बच्चे पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। इसके बाद बच्चे के साथ मारपीट हुई और हमलावरों ने लोगों को जुटाकर हिंदुओं को जबरदस्त तरीके से पीटा था। 

9. 20 जिले, फरवरी 2013

28 फरवरी 2013 को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने जमात-ए-इस्लामी संगठन के उपाध्यक्ष दिलावर हुसैन सईदी को 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों का दोषी पाया था और उसे मौत की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले के बाद जमात-ए-इस्लामी और उसके स्टूडेंट विंग इस्लामी छात्र शिबिर ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदुओं के खिलाफ हमले शुरू कर दिए। अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने तब दावा किया था कि 20 से ज्यादा जिलों में 1500 हिंदुओं के घर और 50 से ज्यादा मंदिर तबाह किए गए। इस हिंसा में 100 से ज्यादा लोगों की मौत भी हुई थी, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल थे। 

10. हथजारी, फरवरी 2012 

बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के लिए 2012 सबसे खूनी साल साबित हुआ था। इस दौरान कट्टरपंथियों के निशाने पर हिंदू सबसे ज्यादा रहे। चटगांव के हथजारी और बाशखाली से लेकर कॉक्स बाजार के रमू तक हिंदुओं पर कई बड़े हमले हुए। ऐसा पहला बड़ा हमला हथजारी में 9 और 10 फरवरी को शुरू हुआ, जब जमात-ए-इस्लामी के छात्र सगंठन ने 8 मंदिरों और कई घरों को आग के हवाले कर दिया। इस घटना को 9 साल से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन पीड़ितों को आज तक इंसाफ नहीं मिला। 

11. सतखीरा, मार्च-अप्रैल 2012

जमात-ए-इस्लामी ने इसके बाद ऐसी कुछ घटनाओं को फतेपुर और चकदाहा में भी अंजाम दिया। इस दौरान 12 घरों को आग लगा दी गई और हिंदू समुदाय के दो गांवों में उपद्रव फैल गया। इस घटना के पीछे भी कथित तौर पर ईशनिंदा की बात कही गई थी। कट्टरपंथियों के एक अखबार ने इस बारे में काफी अफवाहों का प्रसार किया और इसी गलत जानकारी के बाद मुस्लिमों ने हिंदुओं पर जुल्म किए। 

12. चिरिरबंदर और रमू, अगस्त-सितंबर 2012

बांग्लादेश के दिनाजपुर स्थित चिरिरबंदर उपजिला में 4 अगस्त 2012 को कट्टरपंथियों ने साजिशन 50 हिंदू घरों में आग लगा दी थी। यह घटना जमात-ए-इस्लामी के नेता आफताब अली मुल्ला और चटगांव मेट्रोपोलिटन कॉलेज की प्रोफेसर हामिदा खातून के कथित भड़काऊ भाषणों के बाद सामने आई थीं। इन भाषणों के बाद स्थानीय मुस्लिमों ने हिंदुओं पर हमले किए थे। इसी साल सितंबर में भी इस्लामी संगठनों ने कॉक्स बाजार के रमू में एक फेक फेसबुक पोस्ट के बहकावे में आते हुए बौद्ध धर्मस्थलों और हिंदू मंदिरों को तबाह कर दिया था। बताया जाता है कि इस घटना में 25 हजार से ज्यादा मुस्लिम शामिल रहे थे। 
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