Hindi News ›   World ›   In the fourth general election held in Israel in Just two years, the political crisis still remain as no party getting majority

इस्राइल: त्रिशंकु चुनाव नतीजों के बाद अब क्या हैं संभावनाएं, कौन लेगा बेंजामिन नेतन्याहू की जगह?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरुशलम Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 25 Mar 2021 03:38 PM IST

सार

नेतन्याहू अगर नाकाम रहे तो मुमकिन है कि मध्यमार्गी अतिड पार्टी के नेता यायर लैपिड के नेतृत्व में सरकार बनाने की कोशिश हो। अतिड पार्टी को 18 सीटें मिली हैं। सदन में वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होगी...
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

इस्राइल में दो साल के भीतर हुए चौथे आम चुनाव में भी किसी पार्टी को बहुमत न मिलने के कारण राजनीतिक संकट और गहरा गया है। विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव नतीजों का एक ही साफ संदेश है और वह ये कि इस्राइल के ज्यादातर मतदाता प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बाहर देखना चाहते हैं। लेकिन उनकी जगह कौन ले, इस बारे में कोई साफ जनादेश नहीं उभरा है।



बुधवार रात तक चुनाव नतीजों का अंतिम एलान नहीं हुआ था। लेकिन ये साफ है कि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी एक बार फिर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। 120 सदस्यीय संसद में उसे 30 सीटें मिली हैं। पिछले सदन में उसके पास 36 सीटें थीं। 2015 के बाद सदन में लिकुड पार्टी की सदस्य संख्या उतने कम कभी नहीं रही, जितनी अब होगी। दूसरी तरफ मध्यमार्गी- वामपंथी पार्टियों के गठबंधन को काफी लाभ हुआ है, लेकिन स्पष्ट बहुमत से वह भी दूर रह गया है।


इसलिए अब इस्राइल में क्या राजनीतिक सूरत उभरेगी, फिलहाल इस पर कयास ही लगाए जा रहे हैं। इस्राइली मीडिया में चल रही चर्चा के मुताबिक नेतन्याहू फिर सरकार बनाने की पूरी कोशिश करेंगे। इसके लिए उनके पास दो विकल्प हैं। नेतन्याहू लिकुड पार्टी से अलग हुए नेता गिडियन सार के नेतृत्व वाली कंजरवेटिव पार्टी से मेलमिलाप की कोशिश कर सकते हैं। अगर सार राजी हो जाते हैं, तो फिर अन्य धार्मिक दलों को लेकर नेतन्याहू फिर से सरकार बनाने में सफल हो जाएंगे। नेतन्याहू के पास दूसरा विकल्प इस्लामी पार्टी रा’म से गठबंधन करने का है। लेकिन उस हालत में यहूदी धार्मिक पार्टियां उस गठबंधन में शामिल होने पर हिचक सकती हैँ। इसलिए इसकी संभावना कम मानी जा रही है।

नेतन्याहू अगर नाकाम रहे तो मुमकिन है कि मध्यमार्गी अतिड पार्टी के नेता यायर लैपिड के नेतृत्व में सरकार बनाने की कोशिश हो। अतिड पार्टी को 18 सीटें मिली हैं। सदन में वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होगी। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि लैपिड के नेतृत्व में सरकार तभी बन सकती है, जब गिडियन सार उसमें शामिल हों और उसका समर्थन अरब आबादी में आधार रखने वाली पार्टियां करें। ऐसा गठबंधन बनने की गुंजाइश फिलहाल कम है।

अगली संभावना यह है कि दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के नेता नफताली बेनेट लिकुड पार्टी से गठबंधन तोड़ कर नेतन्याहू विरोधी पार्टियों से जा मिलें और उनके नेतृत्व में नया गठबंधन बने। लेकिन यामिना पार्टी को सिर्फ सात सीटें मिली हैं। ऐसे में लैपिड और दूसरे मध्यमार्गी- वामपंथी नेता उनके नाम पर तभी राजी हो सकते हैं, जब वे नेतन्याहू को हटाने के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हो जाएं।

अगर ये संभावनाएं साकार नहीं हुईं, तो फिर इस्राइल में राजनीतिक गतिरोध बना रहेगा। तब नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। साथ ही उस हालत में अगले कुछ महीनों में अगला आम चुनाव कराया जाएगा। ऐसा हुआ तो वह अप्रैल 2019 के बाद पांचवां आम चुनाव होगा।

इस चुनाव में सबसे ज्यादा ध्यान मंसूर अब्बास की रा’म पार्टी ने खींचा है। यह मुस्लिम ब्रदरहुड से निकलकर बनी नई पार्टी है। अब्बास ने अरब पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। वे अकेले चुनाव मैदान में उतरे और उनकी पार्टी को पांच सीटें मिली हैं। अब्बास ने पुरानी किसी लामबंदी से जुड़ने से इनकार कर दिया है। इसके बदले उन्होंने कहा है कि उनके समर्थक मतदाताओं की उम्मीदों को जो पार्टी या नेता पूरा करने का वादा करेगा, वे उसे समर्थन देंगे।

इस्राइल में चुनाव आनुपातिक मतदान प्रणाली से होता है। इसलिए वहां बहुत कम आधार रखने वाली छोटी पार्टियों को भी संसद में नुमाइंदगी मिल जाती है। इससे विखंडित जनादेश आना और लगातार राजनीतिक अस्थिरता बने रहना अब आम बात हो गई है।

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