इमरान खान की मुश्किलें और बढ़ीं, चीनी घोटाले में जांच समिति कर सकती है पूछताछ
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। चाहे कोरोना को लेकर ढिलाई बरतने का मामला हो, चीन से नजदीकी बढ़ाने की बात हो, बार बार विश्व समुदाय के सामने कश्मीर का मुद्दा उठाना हो या फिर आतंकी फंडिंग रोकने की कोशिशों में नाकाम होने का सवाल, इमरान खान हर तरफ से विपक्ष के साथ साथ दुनिया के तमाम देशों के निशाने पर हैं।
लेकिन आंतरिक तौर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप और खासकर 100 अरब रुपये के चीनी घोटाले को लेकर उन्हें नई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए बनी जांच समिति के सामने अब इमरान खान को भी पेश करने की बात उठने लगी है।
पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टी पीएमएल-एन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शाहिद खाकान अब्बासी ने जांच कमीशन के सामने अपना बयान दर्ज कराने के दौरान यह बात जोर देकर कही कि इस जांच में प्रधानमंत्री इमरान खान और वित्त मंत्री असद उमर को भी शामिल किया जाना चाहिए।
उनका कहना था कि जांच समिति की रिपोर्ट का तबतक कोई मतलब नहीं रह जाएगा जबतक प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की भूमिका की जांच नहीं होती और उनसे पूछताछ नहीं की जाती। ये इसलिए भी सबसे ज्यादा जरूरी है क्योंकि इकॉनामिक कोऑर्डिनेशन कमेटी के तत्काली चेयरमैन असद उमर और इमरान खान ने ये जानते हुए भी कि देश में चीनी का स्टॉक उतना नहीं है, इसके निर्यात की इजाजत कैसे दे दी।
100 अरब के इस चीनी घोटाले के लिए सीधे सीधे प्रधानमंत्री इमरान खान जिम्मेदार हैं
अब्बासी ने जांच समिति को खुद चिट्ठी लिखकर गुजारिश की थी कि वह चीनी घोटाले के बारे में बहुत सारी सच्चाइयां जानते हैं और समिति को जांच में हर तरह का सहयोग देने के साथ ही कुछ तथ्य बताना चाहते हैं।
जुलाई 2017 में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर लगे अल अजीजिया मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से उनकी जगह प्रधानमंत्री का पद संभाल चुके अब्बासी का कहना है कि 100 अरब के इस चीनी घोटाले के लिए सीधे सीधे प्रधानमंत्री इमरान खान जिम्मेदार हैं।
जांच समिति को उनसे यह पूछना चाहिए कि इस तथ्य को जानते हुए कि देश में चीनी का अतिरिक्त स्टॉक नहीं है, उन्होंने चीनी निर्यात की इजाजत क्यों दी और अपने देश के लोगों को 45 फीसदी ज्यादा दाम बढ़ाकर चीनी क्यों बेची गई। उन्होंने कहा कि इससे सीधे सीधे चीनी मिल मालिकों की कमाई 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से अरबों में हो गई। इससे साफ है कि चीनी निर्यात का फैसला सरासर गलत था।
अब्बासी ने कहा कि इससे साफ है कि या तो प्रधानमंत्री बेईमान हैं, या नाकाबिल हैं या फिर वो दोनों हैं। इसकी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि यह आपसी मतभेद या राजनीतिक विद्वेष का मामला नहीं है, यह सीधा सीधा कैबिनेट से जुड़े लोगों पर सवाल उठाने वाला है जिन्होंने इस फैसले से 16 महीनों तक अरबों रुपये कमाए और आम जनता इतनी महंगी चीनी खरीदने को मजबूर हुई।
जांच समिति को अपनी रिपोर्ट 25 अप्रैल को सौंपनी थी, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना संकट के बीच 28 अप्रैल को हुई कैबिनेट की बैठक में कमेटी को जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन हफ्ते का वक्त और दे दिया गया है।