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कट्टरपंथियों के दबाव में झुकी इमरान सरकार, हिंदू मंदिर के निर्माण कार्य को रोका
Sun, 05 Jul 2020 12:27 AM IST
अवधेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अवधेश कुमार
Updated Sun, 05 Jul 2020 12:27 AM IST
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इमरान खान (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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\\पाकिस्तान की इमरान सरकार ने मुस्लिम कट्टरपंथियों की धमकी के आगे झुकते हुए इस्लामाबाद में बनने जा रहे हिंदू मंदिर के निर्माण पर रोक लगा दी है। हालांकि कहा जा रहा है कि बिल्डिंग प्लान की मंजूरी नहीं होने के चलते यह कदम उठाया गया है।
भगवान कृष्ण का यह मंदिर इस्लामाबाद के एच-9 इलाके में 20 हजार वर्गफुट में बनाया जा रहा है। पाकिस्तान के मानवाधिकारों के संसदीय सचिव लाल चंद्र माल्ही ने मंदिर की आधारशिला रखी थी। धार्मिक मामलों के मंत्री पीर नूरुल हक कादरी ने कहा था कि मंदिर के निर्माण पर आने वाला 10 करोड़ रुपये का खर्च सरकार वहन करेगी। उन्होंने इसके लिए पीएम इमरान खाने भी अपील की थी। इस मंदिर के लिए वर्ष 2017 में जमीन दी गई थी।
मंदिर की आधारशिला रखे जाने के बाद से ही कई कट्टरपंथी धार्मिक संस्थाओं ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए इसे इस्लाम विरोधी करार दिया। मजहबी शिक्षा देने वाले संस्थान जामिया अशर्फिया के मुफ्ती जियाउद्दीन ने कहा कि गैर मुस्लिमों के लिए मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल बनाने के लिए सरकारी धन खर्च नहीं किया जा सकता। इसी संस्था ने मंदिर निर्माण को लेकर फतवा जारी करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) के लिए सरकारी धन से मंदिर निर्माण कई सवाल खड़े कर रहा है।
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भगवान कृष्ण का यह मंदिर इस्लामाबाद के एच-9 इलाके में 20 हजार वर्गफुट में बनाया जा रहा है। पाकिस्तान के मानवाधिकारों के संसदीय सचिव लाल चंद्र माल्ही ने मंदिर की आधारशिला रखी थी। धार्मिक मामलों के मंत्री पीर नूरुल हक कादरी ने कहा था कि मंदिर के निर्माण पर आने वाला 10 करोड़ रुपये का खर्च सरकार वहन करेगी। उन्होंने इसके लिए पीएम इमरान खाने भी अपील की थी। इस मंदिर के लिए वर्ष 2017 में जमीन दी गई थी।
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मंदिर की आधारशिला रखे जाने के बाद से ही कई कट्टरपंथी धार्मिक संस्थाओं ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए इसे इस्लाम विरोधी करार दिया। मजहबी शिक्षा देने वाले संस्थान जामिया अशर्फिया के मुफ्ती जियाउद्दीन ने कहा कि गैर मुस्लिमों के लिए मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल बनाने के लिए सरकारी धन खर्च नहीं किया जा सकता। इसी संस्था ने मंदिर निर्माण को लेकर फतवा जारी करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) के लिए सरकारी धन से मंदिर निर्माण कई सवाल खड़े कर रहा है।
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