Pakistan: आईएमएफ तैयार नहीं है पाकिस्तान को कर्ज देने पर, दोनों पक्षों में बढ़ी कड़वाहट
Pakistan: आईएमएफ अपनी विस्तारित कोष सुविधा (ईएफएफ) के तहत पाकिस्तान को 6.5 बिलियन डॉलर का ऋण देने को तैयार हुआ था। यह ऋण जारी करने के पहले वह पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ नौ बार समीक्षा बैठकें कर चुका है...
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पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज मिलने की उम्मीद लगातार घटती जा रही है। आईएमएफ के मौजूदा सहायता कार्यक्रम की समयसीमा 30 जून को पूरा हो जाएगी। इसके बाद ऋण के लिए फिर से सहमति बनाने की जरूरत होगी। अभी तक जितने संकेत हैं, आईएमएफ पिछले साल बनी सहमति के तहत ऋण की किस्तें जारी करने को तैयार नहीं है।
आईएमएफ अपनी विस्तारित कोष सुविधा (ईएफएफ) के तहत पाकिस्तान को 6.5 बिलियन डॉलर का ऋण देने को तैयार हुआ था। यह ऋण जारी करने के पहले वह पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ नौ बार समीक्षा बैठकें कर चुका है। इन बैठकों में पाकिस्तान के अधिकारी आईएमएफ को इस बात पर आश्वस्त करने में नाकाम रहे कि पाकिस्तान सरकार उसकी शर्तों पर अपेक्षित अमल कर रही है। अब आईएमएफ के साथ पाकिस्तान की 11वीं समीक्षा बैठक बुधवार को होगी।
पाकिस्तान के अखबार द न्यूज में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक नौवीं समीक्षा बैठक में आईएमएफ ने जो शर्तों रखी थीं, उन पर अभी तक सहमति नहीं बन सकी है। चूंकि नौवीं समीक्षा बैठक की शर्तों पर सहमति नहीं बनी, इसलिए आईएमएफ ने दसवीं समीक्षा बैठक को रद्द कर दिया था। यह बैठक इस वर्ष तीन फरवरी को होनी थी। अब पर्यवेक्षकों की नजर इस बात पर है कि तीन मई को तय 11वीं समीक्षा बैठक का क्या अंजाम होता है।
द न्यूज ने बड़े अफसरों के हवाले से बताया है कि नौवीं समीक्षा को संपन्न करने में हुई देर के लिए पाकिस्तान और आईएमएफ के अधिकारी एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं। नौवीं बैठक में आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार के सामने अन्य स्रोतों से वित्त जुटाने संबंधी शर्त लगाई थी। आईएमएफ सूत्रों के मुताबिक इस बारे में वे पाकिस्तान से पुष्ट सूचना पाने का अभी तक इंतजार कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने आईएमएफ को बताया है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान को तीन बिलियन डॉलर की सहायता देने की गारंटी दी है। लेकिन आईएमएफ जोर डाल रहा है कि पाकिस्तान विश्व बैंक से दो बिलियन डॉलर और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) से 90 करोड़ डॉलर हासिल करने संबंधी गारंटी दे। इसके अलावा पाकिस्तान से यह कहा गया है कि वह कॉमर्शियल बैंकों से ऋण मिलने संबंधी गारंटी भी दे। आईएमएफ ने साफ संकेत दिया है कि दो से तीन बिलियन डॉलर के अतिरिक्त कर्ज की गारंटी अगर पाकिस्तान नहीं जुटा पाता है, तो आईएमएफ अपने प्रोग्राम के तहत ऋण की किस्तें जारी नहीं करेगा।
पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों ने मीडिया ब्रीफिंग में आरोप लगाया है कि आईएमएफ पाकिस्तान के साथ राजनीति खेल रहा है। उन्होंने कहा है- यह और कुछ नहीं, बल्कि पॉलिटिकल गेम है, वरना आईएमएफ कब का पाकिस्तान को ऋण जारी कर चुका होता। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के सलाहकार डॉ. खकन नजीब ने अखबार द न्यूज को बताया है कि ऋण जारी करने में अनुचित देर से 10वीं और 11वीं समीक्षा को पूरा करना मुश्किल हो गया है। इस बीच पाकिस्तान डिफॉल्ट करने (ऋण चुकाने में अक्षम होने) के कगार पर बना हुआ है।