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Pakistan Economic Crisis: आईएमएफ ने की कृपा, वरना अपनी अर्थव्यवस्था संभालने में नाकाम है पाकिस्तान

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 04 Sep 2022 05:55 PM IST
सार

28 में सिर्फ 12 शर्तें ही पूरी होने के बावजूद आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए 1.1. बिलियन डॉलर का कर्ज मंजूर कर दिया है, लेकिन बदले में उसने आठ नई शर्तें उस पर थोप दी हैं। 

IMF Pakistan
IMF Pakistan - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 1.1 बिलियन डॉलर की मंजूरी देने से पहले जो 28 शर्तें रखी थीं, पाकिस्तान उनमें से 16 को पूरा करने में नाकाम रहा। इनमें विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने की शर्त भी थी। पाकिस्तान सरकार की इन नाकामियों के बावजूद आईएमएफ ने कर्ज मंजूर किया, तो समझा जाता है कि ऐसा अमेरिका की मदद के कारण हुआ। इस बारे में सियासी हलकों में कई कयास लगाए जा रहे हैँ।



बाजवा ने अमेरिकी विदेश उपमंत्री को किया था फोन
पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने कर्ज दिलाने में मदद के लिए अमेरिका विदेश उपमंत्री वेंडी शरमन को फोन किया था। इसमें उन्होंने गुजारिश की थी कि अमेरिका आईएमएफ में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे। कुछ चर्चाओं के मुताबिक तब अमेरिका ने कुछ शर्तें रखी थीं। बताया जाता है कि बाजवा उन पर सहमत हुए थे। उसके बाद अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद की।


आईएमएफ ने 1.1 बिलियन डॉलर कर्ज के बदले आठ नई शर्तें थोपीं
हालांकि 28 में सिर्फ 12 शर्तें ही पूरी होने के बावजूद आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए 1.1. बिलियन डॉलर का कर्ज मंजूर कर दिया है, लेकिन बदले में उसने आठ नई शर्तें उस पर थोप दी हैं। इसके अलावा जो शर्तें पाकिस्तान ने पूरी नहीं की, उन्हें पूरा करने के लिए आईएमएफ ने नई समयसीमा उसे दी है। शर्तों के मामले में पाकिस्तान के रिकॉर्ड और नई शर्तें लगाई जाने की जानकारी आईएमएफ 7वीं और 8वीं समीक्षा बैठक के विवरण से सामने आई है। यह ब्योरा शुक्रवार को जारी किया गया।

शहबाज सरकार में बढ़ रहा असंतोष
इस बीच इस बात के संकेत मिले हैं कि आर्थिक प्रबंधन के मुद्दों पर शहबाज शरीफ सरकार के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेताओं में देश की आर्थिक बदहाली और उसे संभालने के तरीकों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। इस बात के साफ संकेत शुक्रवार को मिले, जब वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने कहा कि मौजूदा सरकार का कार्यकाल अभी 13 महीने और बचा है, लेकिन उस पूरी अवधि तक वे शायद वित्त मंत्री नहीं रहेंगे।

सत्ताधारी पार्टी के ही नेताओं ने जताई नाराजगी
कराची में एक समारोह में इस्माइल ने कहा, ‘मेरी सरकार के अभी 13 महीने और बचे हैं, लेकिन संभव है कि मुझे उतना वक्त ना मिले।’ बताया जाता है कि पीएमएल-एन के प्रमुख नवाज शरीफ, आर्थिक मोर्चे पर शहबाज शरीफ सरकार के प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। हाल में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं की एक बैठक में उन्होंने अपनी नाराजगी दो-टूक जताई थी।

वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल से नाखुश हैं नवाज शरीफ
हाल में वरिष्ठ पत्रकार सुहैल वाराइच ने लंदन में नवाज शरीफ से मुलाकात की थी। उसके बाद उन्होंने न्यूज चैनल से बातचीत में कहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री मिफ्ताह इस्माइल के काम से बेहद नाखुश हैं। नवाज शरीफ की राय है कि सिर्फ इसहाक डार ही देश की जख्मी अर्थव्यवस्था पर मरहम लगा सकते हैं।’
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समीक्षा रिपोर्ट के बाद शरीफ सरकार और इस्माइल की बढ़ेंगी मुश्किलें
समझा जाता है कि आईएमएफ की समीक्षा बैठकों की रिपोर्ट सामने आने के बाद शरीफ सरकार और मिफ्ताह इस्माइल की मुश्किलें बढ़ेंगी। आईएमएफ की ज्यादातर शर्तें पूरी करने की बात सामने आने के बाद आलोचकों को यह कहने का मौका मिलेगा कि शरीफ सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने में नाकाम साबित हो रही है।

पर्यवेक्षकों ने चेतावनी दी है कि इस बार भले संभवतः अमेरिकी मदद से कर्ज की किस्त मंजूर हो गई हो, लेकिन हमेशा अमेरिका मदद के लिए आगे नहीं आएगा।

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