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US Iran War: 'अगर हमने पहले कार्रवाई नहीं की होती, तो वे हमला कर देते', ट्रंप ने ईरान पर हमले का किया बचाव
Wed, 04 Mar 2026 03:00 AM IST
Pavan
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Pavan
Updated Wed, 04 Mar 2026 03:00 AM IST
सार
US Iran War: पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव पर टिकी है। अगर दोनों पक्षों के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो यह संघर्ष और बड़े स्तर पर फैल सकता है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका के हमले का बचाव किया और कहा कि अगर अमेरिका पहले हमला नहीं करता तो ईरान हमला कर देता।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हालिया अमेरिकी हमलों का जोरदार बचाव किया है। ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई जरूरी थी, क्योंकि उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि तेहरान पहले हमला करने की तैयारी कर रहा था। उनके मुताबिक अगर अमेरिका ने पहले कदम नहीं उठाया होता, तो हालात परमाणु युद्ध तक पहुंच सकते थे।
यह भी पढ़ें - संघर्ष खत्म करना चाहता है ईरान?: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर तेहरान बोला- सम्मान के साथ बातचीत के लिए तैयार
चार दिन से पश्चिम एशिया में तनाव
पश्चिम एशिया में तनाव अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और इस्राइल की तरफ से 28 फरवरी को किए गए हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइल से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
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'एक महीने में परमाणु हथियार बना सकता था ईरान'
व्हाइट हाउस में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि बातचीत चल रही थी, लेकिन उन्हें लगा कि ईरान अचानक हमला कर सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर हमने अभी जो किया, वह नहीं किया होता, तो वे पहले हमला कर देते।' ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान एक महीने के अंदर परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता था। ट्रंप ने ईरान की सरकार को 'खतरनाक और चरमपंथी विचारधारा वाला' बताया और कहा कि पिछले 47 वर्षों से वह दुनिया में आतंक फैलाता रहा है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की भी आलोचना की और कहा कि ओबामा ने ईरान के साथ 'सबसे खराब समझौता' किया था, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में खत्म कर दिया।
'अब काफी कमजोर हो चुकी है ईरान की ताकत'
ट्रंप ने सैन्य अभियान का नाम 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' बताया और कहा कि इस कार्रवाई से ईरान की मिसाइल क्षमता और एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार अब ईरान की ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। इस बीच जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी कहा कि वह ईरान के मौजूदा शासन को लेकर अमेरिका के साथ एक जैसी सोच रखते हैं। हालांकि ट्रंप ने कुछ यूरोपीय देशों की आलोचना भी की। उन्होंने जर्मनी की सराहना की, लेकिन स्पेन और ब्रिटेन के रुख पर नाराजगी जताई।
यह भी पढ़ें - ईरान में नई सरकार किसकी?: कौन संभाल सकता है जिम्मा? ट्रंप ने दिए बड़े संकेत, रजा पहलवी के नाम पर कही बड़ी बात
बहरीन, कतर, सऊदी और यूएई में भी तनाव
पश्चिम एशिया के कई देशों- जैसे बहरीन, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात- में भी हालात तनावपूर्ण हैं, क्योंकि ईरान ने इन क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे आम लोगों और विदेशों में काम कर रहे लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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चार दिन से पश्चिम एशिया में तनाव
पश्चिम एशिया में तनाव अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और इस्राइल की तरफ से 28 फरवरी को किए गए हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइल से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
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'एक महीने में परमाणु हथियार बना सकता था ईरान'
व्हाइट हाउस में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि बातचीत चल रही थी, लेकिन उन्हें लगा कि ईरान अचानक हमला कर सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर हमने अभी जो किया, वह नहीं किया होता, तो वे पहले हमला कर देते।' ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान एक महीने के अंदर परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता था। ट्रंप ने ईरान की सरकार को 'खतरनाक और चरमपंथी विचारधारा वाला' बताया और कहा कि पिछले 47 वर्षों से वह दुनिया में आतंक फैलाता रहा है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की भी आलोचना की और कहा कि ओबामा ने ईरान के साथ 'सबसे खराब समझौता' किया था, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में खत्म कर दिया।
'अब काफी कमजोर हो चुकी है ईरान की ताकत'
ट्रंप ने सैन्य अभियान का नाम 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' बताया और कहा कि इस कार्रवाई से ईरान की मिसाइल क्षमता और एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार अब ईरान की ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। इस बीच जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी कहा कि वह ईरान के मौजूदा शासन को लेकर अमेरिका के साथ एक जैसी सोच रखते हैं। हालांकि ट्रंप ने कुछ यूरोपीय देशों की आलोचना भी की। उन्होंने जर्मनी की सराहना की, लेकिन स्पेन और ब्रिटेन के रुख पर नाराजगी जताई।
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बहरीन, कतर, सऊदी और यूएई में भी तनाव
पश्चिम एशिया के कई देशों- जैसे बहरीन, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात- में भी हालात तनावपूर्ण हैं, क्योंकि ईरान ने इन क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे आम लोगों और विदेशों में काम कर रहे लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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