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वैक्सीन बनी तो बच्चों के टीकाकरण में हो सकती है बड़ी देरी
Sat, 06 Jun 2020 05:49 PM IST
मुकेश कुमार झा
अमर उजाला रिसर्च टीम, वॉशिंगटन
अमर उजाला रिसर्च टीम, वॉशिंगटन
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Sat, 06 Jun 2020 05:49 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
संक्रमण से बचाने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक दिन रात एक किए हुए हैं। इसी कड़ी में कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि वैक्सीन बनी तो बच्चों को लगाने में देर हो सकती है। ट्रायल व्यस्क लोगों पर चल रहा है, बच्चे ट्रायल से दूर हैं।
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अमेरिका के वरिष्ठ संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फॉसी का कहना है कि दुनिया भर में अब तक 10 वैक्सीन का ट्रायल मनुष्यों पर हुआ है। उम्मीद है कि वर्ष 2021 तक वैक्सीन बन जाएगी। हालांकि शुरुआती आंकड़ों को देखेंगे तो इनमे से कुछ वैक्सीन का परीक्षण बच्चों पर नहीं हुआ है। वैक्सीन लोगों पर इसके सार्थक परिणाम देखने को मिले हैं ऐसी स्थिति में अगर वैक्सीन आती है तो बिना परीक्षण बच्चों पर इसका प्रयोग नहीं हो सकता है हालांकि डॉक्टर फॉसी का कहना है कि वक्त लोगों में जो परिणाम सामने आए हैं। वैसे ही परिणाम बच्चों में देखने को मिलेंगे तो राह आसान होगी लेकिन ये समय बताएगा।
बच्चों में परीक्षण में लगेगा लंबा समय
यूनिवर्सिटी ऑफ पीटर्सबर्ग के माइक्रोबायोलॉजी एंड मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स विभाग के डॉक्टर पॉल डुप्रेक्स का कहना है कि बच्चों में वैक्सीन का परीक्षण और ट्रायल करने में कई महीने लगेंगे संभव है कि वर्षों लग जाएं। वे कहते हैं कि बच्चे वयस्क लोगों की तुलना में पूरी तरह से अलग होते हैं। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता व्यक्त लोगों की तुलना में अलग ढंग से काम करती है। ऐसे में बच्चों पर वैक्सीन का परीक्षण अधिक सतर्कता के साथ अलग से करना होगा।
बच्चों को वैक्सीन समय पर लगेगी
फिलाडेल्फिया में वैक्सीन एजुकेशन सेंटर के निदेशक डॉ पॉल का कहना है कि बच्चों को टीका समय पर लगेगा। हां यह जरूर है कि शुरुआती अध्ययन में बच्चों को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में जिस वैक्सीन का परीक्षण उन पर नहीं हुआ है वह उन्हें देना बिल्कुल ठीक नहीं होगा। बच्चे भविष्य हैं और किसी तरह की चूक पूरी दुनिया की नींव हिला सकती है। व्यस्क लोगों की अपनी अहमियत होती है लेकिन बच्चों को लेकर सावधानी बरतनी होगी।
बहुत कम बच्चे संक्रमण की चपेट में
यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा बर्मिंघम के पीडियाट्रिक इनफेक्शियस डिजीज के प्रोफेसर डेविड किंबर्लिन का कहना है कि बहुत कम बच्चे संक्रमण की चपेट में आए हैं। यह अच्छी बात है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इस ओर ध्यान ही न दें अभी वायरस बीमार लोगों को अपना अधिक शिकार बना रहा है। कल स्टैंड बदले या आक्रामक रूप ले तो बच्चों को अपना शिकार बनाने लगे बच्चों को हर तरह के खतरे से दूर रखने की हर संभव कोशिश करनी होगी।
भारत में 18 से कम उम्र के 47 करोड़ बच्चे
यूनाइटेड नेशन चिल्ड्रन इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) के आंकड़े के अनुसार, देश में करीब 25 करोड़ 30 लाख किशोर हैं। हर पांचवी में से एक व्यक्ति की उम्र 10 से 19 वर्ष के बीच है। हर उम्र के बच्चों की कुल संख्या करीब 47 करोड़ है जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। यह बच्चे देश की कुल संख्या का 39 फ़ीसदी हैं इसमें 29 फ़ीसदी बच्चे 6 वर्ष तक हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि देश के 50 फीट से अधिक बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं।