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ICC: 'गाजा में युद्ध की जांच पर इस्राइल की आपत्तियां हो खारिज', न्यायाधीशों से बोले आईसीसी के मुख्य अभियोक्ता

Tue, 14 Jan 2025 06:34 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हेग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हेग Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 14 Jan 2025 06:34 PM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के मुख्य अभियोक्ता ने जजों से इस्राइल की आपत्तियों को खारिज करने की मांग की है। वहीं इस मामले में इस्राइल ने दिसंबर में दायर एक फाइलिंग में तर्क दिया कि वह अपने नेताओं के खिलाफ आरोपों की खुद जांच कर सकता है और इस्राइलियों की जांच जारी रखना राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन है।

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ICC chief prosecutor wants Israeli objections over Netanyahu warrant to be rejected, News in hindi
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय - फोटो : ANI

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के मुख्य अभियोक्ता ने न्यायाधीशों से कहा है कि गाजा में 13 महीने से चल रहे युद्ध की जांच पर इस्राइल की आपत्तियों को खारिज किया जाना चाहिए। ब्रिटिश अधिवक्ता करीम खान ने सोमवार देर रात हेग में मौजूद अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर इस्राइल की अपील पर अपना औपचारिक जवाब प्रस्तुत किया, जब न्यायाधीशों ने पिछले साल इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, उनके पूर्व रक्षा मंत्री और हमास के सैन्य प्रमुख के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसमें उन पर गाजा में युद्ध के संबंध में मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप लगाया गया था।
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'इस्राइलियों की जांच जारी रखना राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन'
संकटग्रस्त इस्राइली नेता, जो अपनी मातृभूमि में भी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं, ने गिरफ्तारी वारंट को 'राष्ट्रों के इतिहास में एक काला दिन' कहा और आरोपों से लड़ने की कसम खाई। व्यक्ति सीधे गिरफ्तारी वारंट का विरोध नहीं कर सकते, लेकिन इस्राइल राज्य पूरी जांच पर आपत्ति कर सकता है। इस्राइल ने दिसंबर में दायर एक फाइलिंग में तर्क दिया कि वह अपने नेताओं के खिलाफ आरोपों की खुद जांच कर सकता है और इस्राइलियों की जांच जारी रखना राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन है।
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न्यायाधीशों से आने वाले महीनों में फैसला देने की उम्मीद
ब्रिटिश अधिवक्ता करीम खान ने अपने संयुक्त 55-पन्नों के जवाब में कहा कि रोम संविधि, वह संधि जिसने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना की, उसे सदस्य देशों के क्षेत्र में होने वाले अपराधों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देती है, चाहे अपराधी कहीं से भी हों। न्यायाधीशों से आने वाले महीनों में फैसला देने की उम्मीद है।
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2002 में हुई थी आईसीसी की स्थापना
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना 2002 में अंतिम उपाय के रूप में स्थायी न्यायालय के रूप में की गई थी, जो दुनिया के सबसे जघन्य अत्याचारों - युद्ध अपराध, मानवता के विरुद्ध अपराध, नरसंहार और आक्रामकता के अपराध के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर मुकदमा चलाता है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के 125 सदस्य देशों में फलस्तीन, यूक्रेन, कनाडा और यूरोपीय संघ के सभी देश शामिल हैं, लेकिन कई देश इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करते हैं, जिनमें इस्राइल, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश शामिल हैं।
 
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