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Politics: यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष ने की PM मोदी की तारीफ, बोले- अंतरराष्ट्रीय मंच पर ट्रंप को किया शर्मिंदा
Sat, 20 Sep 2025 02:12 AM IST
शिव शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sat, 20 Sep 2025 02:12 AM IST
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राजनीतिक विज्ञानी और यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष इयान ब्रेमर
- फोटो : ANI
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राजनीतिक विज्ञानी और यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष इयान ब्रेमर ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद मई में भारत-पाकिस्तान तनाव बढ़ाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता के दावों को सार्वजनिक तौर से खारिज करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। शुक्रवार को एक साक्षात्कार के दौरान ब्रेमर ने इसे अन्य वैश्विक नेताओं की चुप्पी के उलट पीएम मोदी का साहसिक कदम करार दिया।
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ब्रेमर ने कहा कि ट्रंप का रवैया था, मैं ताकतवर हूं, राष्ट्रपति हूं,मेरी बात माननी होगी, लेकिन मोदी ने, चीन और रूस की तरह उनका सामना किया। पीएम मोदी ने साफ कहा कि अमेरिका की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह कहकर ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय मंच पर शर्मिंदा किया। ब्रेमर के मुताबिक, मोदी का यह फैसला सोचा-समझा था। इससे उन्हें घरेलू राजनीति में मजबूती मिली और उनकी अमेरिका से अलग स्वतंत्र छवि भी दिखी,जो अमेरिका के अधिकतर सहयोगी देशों में नहीं दिखती। उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का उदाहरण देते हुए कहा कि स्टार्मर ने ट्रंप की नीतियों को नापसंद करने के बावजूद उन्हें खुश करने की कोशिश की ताकि बेहतर समझौते मिल सकें। वहीं अधिकतर नेता ट्रंप की तारीफों के पुल बांधते रहे,लेकिन मोदी ने उन्हें सबके सामने चुनौती दी और घरेलू स्तर पर फायदा उठाया। हालांकि, ब्रेमर ने कहा कि देखना होगा इसका असर दोनों देशों के सुरक्षा और आर्थिक रिश्तों पर पड़ता है या नहीं।
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अमेरिका-पाक रिश्तों में अनैतिक कारोबार की गंध
ब्रेमर ने कहा कि ट्रंप का पाकिस्तान से नज़दीकी बढ़ाना असल में रणनीति नहीं बल्कि कारोबार था। ट्रंप परिवार और उनके करीबी लोग पाकिस्तान के साथ पैसों के सौदों में शामिल थे। इसे उन्होंने अनैतिक और अवसरवादी बताया। ब्रेमर ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के रक्षा समझौते को अमेरिकी असफलताओं के खिलाफ एक सुरक्षा घेरा कहा। उन्होंने कहा कि इसमें परमाणु सहयोग भी शामिल हो सकता है। ब्रेमर ने बताया कि सऊदी का झुकाव पाकिस्तान की ओर तब बढ़ा जब अमेरिका ने इस्राइल को कतर पर बमबारी से रोकने या सजा देने में कुछ नहीं किया। कतर अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा रखता है और वहां हमले में एक कतरी नागरिक की मौत हुई। इससे सऊदी अरब इससे बेहद नाराज हुआ और उसने पाकिस्तान से रक्षा समझौता कर लिया।
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मोदी-पुतिन की लिमोजिन सवारी और अमेरिका को संदेश
यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष इयान ब्रेमर के मुताबिक,हाल ही में चीन में हुई शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ लिमोजिन में बैठना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं था। यह अमेरिका को सीधा संदेश था, खासकर उस समय जब वॉशिंगटन भारत को रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा था। ब्रेमर ने याद दिलाया कि मोदी ने अन्य एससीओ देशों की तरह चीन की बेल्ट एंड रोड पहल में शामिल होने से इन्कार किया था और बीजिंग के द्वितीय विश्व युद्ध समारोह से भी दूरी बनाई थी। उन्होंने कहा कि पुतिन के साथ लिमोजिन यात्रा चीन से नजदीकी नहीं, बल्कि ट्रंप को सीधा संदेश थी मैं अपनी राह खुद चुनूंगा। मोदी का दांव कामयाब रहा। ब्रेमर ने कहा कि मोदी की यह हिम्मत दुनिया ने नोटिस की और इसका उल्टा असर नहीं हुआ। बल्कि, इससे ट्रंप को मोदी से दोस्ताना तरीके से जुड़ने की जरूरत महसूस हुई।
अगर अमेरिका मजबूत यूरोप नहीं चाहता तो मजबूत भारत क्यों चाहेगा?
ब्रेमर ने कहा कि अमेरिका लंबे समय की साझेदारियों में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। उन्होंने कहा,अगर अमेरिका मजबूत यूरोप में दिलचस्पी नहीं रखता, तो यह मानना मुश्किल है कि वह मजबूत भारत चाहता है।