फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   humanitarian crisis of Afghanistan one out of three Afghans do not have bread for two times, emergency situation in four provinces

अफगानिस्तान का मानवीय संकट: तीन में से एक अफगानी को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं, चार प्रांत में आपात स्थिति

Tue, 31 Aug 2021 06:44 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 31 Aug 2021 06:44 PM IST
विज्ञापन
सार
अफगानिस्तान का मानवीय संकट विकराल होता जा रहा है। जनवरी के बाद से संघर्ष में पांच लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। अफगानिस्तान के चार प्रांत में भोजन की कमी के कारण लोग आपात स्थिति का सामना कर रहे हैं। 
loader
humanitarian crisis  of Afghanistan  one out of three Afghans do not have bread for two times, emergency situation in four provinces
अफगान नागरिक - फोटो : PTI

विस्तार

तालिबान ने काबुल पर 15 अगस्त को कब्जा किया है लेकिन सत्ता हासिल करने के लिए उसकी हिंसा और आतंक के कारण लाखों लोग अफगानिस्तान में विस्थापित हो गए हैं। तालिबान के हिंसा के कारण अब तक पांच लाख से ज्यादा लोग अपना घर-बार छोड़कर दूसरे देशों में शरण ले चुके हैं। ऑफिस फॉर द कॉर्डिनेशन ऑफ ह्यूमैनटेरियन अफेयर्स के मुताबिक अकेले जुलाई में, अफगानिस्तान में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की संख्या पिछले महीने की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई।



तालीबानी शासन के भय और आतंक के कारण इस महीने लगभग 206,967 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। यूएन हाइ कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी (यूएनसीएचआर) के मुताबिक विस्थापितों की संख्या अब 570,000 से अधिक हो गई है जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं। पिछले दो हफ्तों में अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने काबुल हवाई अड्डे से कम से कम 113,500 लोगों को देश से बाहर निकाला है।


तालिबान के कट्टर शासन और अधिक हिंसा के डर से अफगान नागरिक देश छोड़कर भाग गए हैं। विस्थापितों के सामने बेघर होने का सबसे बड़ा खतरा पैदा हो गया है। साथ ही सूखे, भोजन की कमी, ध्वस्त हो चुकी स्वास्थ्य प्रणाली और कोरोना महामारी के कारण उनके सामने कई और सवाल खड़े हो गए हैं। 

एक तिहाई आबादी के सामने खाने का संकट
अफगानिस्तान पहले से दुनिया के सबसे गरीब देशों में एक है। मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता के कारण और चार दशकों के युद्ध की तबाही की वजह से देश में 72 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे पहुंच गए हैं। कोरोनावायरस महामारी से पहले, देश की 54.5 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती थी। पिछले साल, पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा था कि 90 प्रतिशत आबादी दो डॉलर प्रतिदिन से कम पर जीवन यापन कर रही है। देश की अर्थव्यवस्था ढहने के कगार पर पहुंच गई है। ऐसे में पहले से ही आपदाओं से जूझ रहे अफगानिस्तान के हालात के और खराब होने की आशंकाएं बढ़ने लगी है।

विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के अनुसार, अफगानिस्तान की 38 मिलियन की आबादी में एक तिहाई के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वहीं यूनिसेफ ने 10 मिलियन अफगान बच्चों पर भुखमरी का खतरा मंडराने की चेतावनी जारी की है। जबकि दो मिलियन बच्चे पहले से ही कुपोषित हैं। यहां समस्या इसलिए भी विकराल रूप धारण कर रही है कि क्योंकि तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान को दी जाने वाली विदेशी सहायता रोक दी गई है।

विश्व बैंक ने अफगानिस्तान को दी जाने वाली सहायता राशि और करोड़ों की फंडिंग पर रोक लगा दी है। तालिबान के हाथ अकूत संपत्ति न लग जाए इसलिए अमेरिका स्थित उसके केंद्रीय बैंक 'दा अफगानिस्तान बैंक' (डीएबी) के विदेशी मुद्रा भंडार को भी फ्रीज कर दिया गया है। डीएबी के पास इस समय नौ अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। इन सब वजहों से अफगान नागरिकों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। अफगानिस्तान एक ऐसा देश है जो ज्यादातर विदेशी सहायता पर ही निर्भर रहा है। विश्व बैंक के मुताबिक इस देश के  जीडीपी का 40 फीसदी हिस्सा विदेशी मदद से आता है। अब अफगानिस्तान के लोग पैसे-पैसे के लिए मोहताज हो गए हैं।

अधिकांश परिवारों में पिछली फसल का खाद्य पदार्थ समाप्त
दो हफ्ते पहले तालिबान के अधिग्रहण से पहले ही अफगानिस्तान के लोगों को खाने की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा था, स्थिति अब और खराब होती जा रही है। सूखे की वजह से लगभग 40 प्रतिशत फसलें नष्ट हो गई हैं और पशुधन भी बर्बाद हो गया है। अफगानिस्तान तीन सालों में दूसरी बार सूखे का भी सामना कर रहा है, इससे हालात और खराब होते जा रहे हैं।

चार प्रांत में आपत स्थिति
इंटीग्रेटेड फेज क्लासिफिकेशन के मुताबिक दयाकुंडी, फरयाब, घोर और बदाख्शान इन चारों प्रांतों के लोग भोजन की कमी के आपात स्थिति का सामना कर रहे हैं। खाद्य पदार्थों की उच्च स्तर पर बढ़ी हुई कीमतों के कारण दूसरे प्रांतों के लोग भी बहुत तकलीफ में जी रहे हैं। मौजूदा समय में, अधिकांश परिवारों में पिछली फसल का खाद्य भंडार बहुत पहले ही समाप्त हो चुका है और वे बाजार से  अनाज खरीद कर खाने को मजबूर हैं। 

प्री-लीन सीजन असेसमेंट के अनुसार, अफगान नगारिकों के पिछली फसल के अनाज का स्टॉक औसतन केवल पांच महीने तक ही चला। ग्रामीण क्षेत्रों में 47 फीसदी लोगों मुख्य तौर पर खेती-किसानी करते हैं। जबकि शहरी क्षेत्रों में, केवल तीन फीसदी परिवारों के पास ही कृषि भूमि है। ग्रामीण इलाकों में 53 फीसदी लोगों की कृषि से आय होती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में, केवल नौ फीसदी लोगों की ही खेती-किसानी से आमदनी होती है। पीएलएसए के अनुसार, मई में 81 फीसदी किसानों के पास अपनी जमीन पर खेती करने के लिए प्रमाणित गेहूं के बीज ही नहीं थे।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया से मिला जानकारी के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र की खाद्य-सहायता शाखा सितंबर में अतिरिक्त धन के बिना खाद्य पदार्थ अफगानिस्तान भेजना शुरू करेगी। इंटीग्रेटेड फेज क्लासिफिकेशन के मुताबिक नवंबर में फसल और कटाई के बाद ही हालात में मामूली सुधार हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed