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अध्ययन: अनुमान से ज्यादा तेजी से बदल रही मानव जैविक संरचना, 10 हजार साल में 400 से ज्यादा जीन में बदलाव
Sun, 19 Apr 2026 05:13 AM IST
Nirmal Kant
अमर उजाला नेटवर्क, बोस्टन/लंदन।
अमर उजाला नेटवर्क, बोस्टन/लंदन।
Published by: Nirmal Kant
Updated Sun, 19 Apr 2026 05:13 AM IST
सार
पिछले 10,000 वर्षों में मानव शरीर में अपेक्षा से कहीं तेज जैविक बदलाव हुए हैं। 15,836 जीनोम के विश्लेषण से यह जानकारी निकलकर सामने आई है। शोध में 479 जीन वेरिएंट्स में समय के साथ बदलाव दर्ज किया गया है। वैज्ञानिक इसके पीछे क्या कारण मानते हैं, पढ़िए रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
मानव विकास को लंबे समय तक धीमी और क्रमिक प्रक्रिया माना जाता रहा है,लेकिन अब तक के सबसे बड़े प्राचीन डीएनए अध्ययन ने इस धारणा को सीधे चुनौती दी है। नेचर में प्रकाशित इस शोध के अनुसार पिछले 10,000 वर्षों में मानव विकास ने अप्रत्याशित रूप से तेजी पकड़ी, जिसमें सैकड़ों जीन वेरिएंट्स पर प्राकृतिक चयन के स्पष्ट और मजबूत संकेत मिले।
15,836 प्राचीन मानवों के जीनोम पर आधारित यह अध्ययन दिखाता है कि कृषि, बीमारियों और बदलती जीवनशैली ने मानव जैविक संरचना को पहले के अनुमान से कहीं अधिक तेजी से बदला। नेचर के अनुसार हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के पॉपुलेशन जेनेटिसिस्ट डेविड राइख और कम्प्यूटेशनल जेनेटिसिस्ट अली अकबरी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में यूरोप और मध्य पूर्व, के प्राचीन डीएनए का विश्लेषण किया गया। शोध में 10,000 से अधिक नए जीनोम जोड़े गए। वैज्ञानिकों ने 479 ऐसे जीन वेरिएंट्स की पहचान की, जिनमें समय के साथ लगातार वृद्धि या कमी दर्ज हुई।
जटिल गुणों का भी किया गया विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने जीडब्ल्यूएएस, यानी जीनोम-वाइड एसोसिएशन स्टडी के आधार पर जटिल गुणों का भी विश्लेषण किया। यह ऐसी तकनीक है, जिससे जीन और बीमारियों के बीच संबंध खोजे जाते हैं। इसमें पाया गया कि टाइप-2 डायबिटीज, बाइपोलर डिसऑर्डर व सिजोफ्रेनिया के जोखिम से जुड़े जीन संयोजन समय के साथ कम हुए, जबकि शिक्षा के वर्षों, आय और बुद्धिमत्ता से जुड़े संयोजन बढ़े। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये केवल सांख्यिकीय संकेत हैं और सीधे कारण-परिणाम संबंध नहीं दर्शाते।
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तेजी से अनुकूलन के लिए मजबूर हुआ मानव शरीर
कृषि की शुरुआत के बाद भोजन, रहन-सहन और पर्यावरण में आए बदलावों ने मानव शरीर को तेजी से अनुकूलन के लिए मजबूर किया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि लगभग 5,000 वर्ष पहले शुरू हुए ब्रॉन्ज एज के दौरान विकास की गति और तेज हुई। डेविड राइख के अनुसार यह समय आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत परिवर्तनकारी था, जिसने जीवनशैली में बड़े बदलाव लाए और उसी अनुपात में जीन स्तर पर परिवर्तन तेज हुए।
ये भी पढ़ें: 'ट्रंप प्रशासन के लिए खतरा हैं मुनीर, ईरान से करीबी संबंध', अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का बड़ा दावा
कुछ जीनों में रोलरकोस्टर जैसा उतार-चढ़ाव: शोध में यह भी पाया गया कि सभी जीन वेरिएंट्स एक दिशा में नहीं बदले। लगभग दो-तिहाई वेरिएंट्स में समय के साथ बार-बार बढ़ने और घटने का पैटर्न देखा गया। उदाहरण के तौर पर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, यानी तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली बीमारी, के जोखिम से जुड़ा एक वेरिएंट लगभग 6,000 वर्ष पहले तेजी से बढ़ा, लेकिन पिछले 2,000 वर्षों में कुछ यूरोपीय समूहों में इसकी आवृत्ति घटने लगी।
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15,836 प्राचीन मानवों के जीनोम पर आधारित यह अध्ययन दिखाता है कि कृषि, बीमारियों और बदलती जीवनशैली ने मानव जैविक संरचना को पहले के अनुमान से कहीं अधिक तेजी से बदला। नेचर के अनुसार हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के पॉपुलेशन जेनेटिसिस्ट डेविड राइख और कम्प्यूटेशनल जेनेटिसिस्ट अली अकबरी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में यूरोप और मध्य पूर्व, के प्राचीन डीएनए का विश्लेषण किया गया। शोध में 10,000 से अधिक नए जीनोम जोड़े गए। वैज्ञानिकों ने 479 ऐसे जीन वेरिएंट्स की पहचान की, जिनमें समय के साथ लगातार वृद्धि या कमी दर्ज हुई।
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जटिल गुणों का भी किया गया विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने जीडब्ल्यूएएस, यानी जीनोम-वाइड एसोसिएशन स्टडी के आधार पर जटिल गुणों का भी विश्लेषण किया। यह ऐसी तकनीक है, जिससे जीन और बीमारियों के बीच संबंध खोजे जाते हैं। इसमें पाया गया कि टाइप-2 डायबिटीज, बाइपोलर डिसऑर्डर व सिजोफ्रेनिया के जोखिम से जुड़े जीन संयोजन समय के साथ कम हुए, जबकि शिक्षा के वर्षों, आय और बुद्धिमत्ता से जुड़े संयोजन बढ़े। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये केवल सांख्यिकीय संकेत हैं और सीधे कारण-परिणाम संबंध नहीं दर्शाते।
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तेजी से अनुकूलन के लिए मजबूर हुआ मानव शरीर
कृषि की शुरुआत के बाद भोजन, रहन-सहन और पर्यावरण में आए बदलावों ने मानव शरीर को तेजी से अनुकूलन के लिए मजबूर किया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि लगभग 5,000 वर्ष पहले शुरू हुए ब्रॉन्ज एज के दौरान विकास की गति और तेज हुई। डेविड राइख के अनुसार यह समय आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत परिवर्तनकारी था, जिसने जीवनशैली में बड़े बदलाव लाए और उसी अनुपात में जीन स्तर पर परिवर्तन तेज हुए।
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कुछ जीनों में रोलरकोस्टर जैसा उतार-चढ़ाव: शोध में यह भी पाया गया कि सभी जीन वेरिएंट्स एक दिशा में नहीं बदले। लगभग दो-तिहाई वेरिएंट्स में समय के साथ बार-बार बढ़ने और घटने का पैटर्न देखा गया। उदाहरण के तौर पर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, यानी तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली बीमारी, के जोखिम से जुड़ा एक वेरिएंट लगभग 6,000 वर्ष पहले तेजी से बढ़ा, लेकिन पिछले 2,000 वर्षों में कुछ यूरोपीय समूहों में इसकी आवृत्ति घटने लगी।
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